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Kaithal News: 3.50 करोड़ का अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल जंग खा रहा, कोरोना में बेडों की कमी से निपटने के लिए मिला था
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जिला नागरिक अस्पताल परिसर में बना पोर्टेबल अस्पताल। संवाद
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कैथल। कोरोना काल में बेडों की कमी से निपटने के लिए मिला करोड़ों रुपये का 100 बेड का पोर्टेबल अस्पताल अब जंग खा रहा है। अस्पताल प्रबंधन मरम्मत करवाने व देखरेख पर खर्च करने के बजाय इसको जगह की कमी को दूर करने तक ही सिमटा हुआ है। 100 बेड के इस अत्याधुनिक अस्पताल के ज्यादातर कमरों से बेड हटाए जा चुके हैं।
प्रबंधन ने अस्पताल के अंदर कहीं ऑक्सीजन सिलिंडर रख दिए हैं, कहीं ब्लड सैंपल कलेक्शन सेंटर और कहीं ड्रेसिंग रूम बना दिए हैं। मंगलवार और वीरवार को काला पीलिया की ओपीडी के लिए भी इसका इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन को जब ये पोर्टेबल अस्पताल सौंपा गया था तो ये अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस था और इसमें 10 आईसीयू बेड और 90 सामान्य ऑक्सीजन बेड लगे हुए थे। एक कक्ष में वेंटिलेटर युक्त दो आईसीयू बेड और सामान्य कक्ष में छह ऑक्सीजन बेड भी शामिल थे। सभी कक्षों में सभी तरह की मूलभूत सुविधाएं मौजूद थी।
इसमें बच्चों के लिए निक्कू वार्ड भी बनाया गया था लेकिन अब अस्पताल इसकी देखरेख व रखरखाव पर ध्यान नहीं दे रहा है। करीब 3.50 करोड़ रुपये से ज्यादा का यह पोर्टेबल अस्पताल 2021 में कैथल स्वास्थ्य विभाग को मिला था, क्योंकि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में बेडों की भारी कमी थी और लोगों को इलाज के लिए दाखिल करने के लिए सरकारी अस्पताल में बेड ही नहीं थे।
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पोर्टेबल अस्पताल को मरम्मत व देखभाल की जरूरत
पोर्टेबल अस्पताल 2021 में मिला था और इसकी उम्र उस समय करीब 15 साल बताई गई थी। पोर्टेबल अस्पताल देखरेख और मरम्मत नहीं होने से खराब हो रहा है। दरवाजों पर लगे लॉक व डोर क्लोजर खराब हो चुके हैं। पेंट उतर जाने के कारण लोहे के पाइप व सामान को जंग लग रहा है। छत भी जंग लगने व मरम्मत नहीं होने से उखड़ने लगी है। कई कमरों के एसी खराब पड़े हैं और नीचे का फर्श भी टूट चुका है। पोर्टेबल अस्पताल जिला नागरिक अस्पताल परिसर में पार्किंग स्टैंड पर बनाया गया था और यह 1682 गज जगह में फैला हुआ है।
पोर्टेबल अस्पताल का इस्तेमाल अच्छे से हो रहा है, क्योंकि अस्पताल में इतनी जगह नहीं है और कमी को देखते हुए ब्लड सैंपल कलेक्शन सेंटर, ड्रेसिंग रूम, काला पीलिया की ओपीडी, एनसीडी रूम, टीबी लैब, आइसोलेशन वार्ड और डेंगू वार्ड बनाया हुआ है। कुछ कमरों का लगातार इस्तेमाल हो रहा है और कुछ जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं। वे खुद कई बार निरीक्षण कर चुकी हैं और आदेश भी दिए थे कि इनकी सफाई और मरम्मत लगातार करवाते रहें, ताकि लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जा सके।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।
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प्रबंधन ने अस्पताल के अंदर कहीं ऑक्सीजन सिलिंडर रख दिए हैं, कहीं ब्लड सैंपल कलेक्शन सेंटर और कहीं ड्रेसिंग रूम बना दिए हैं। मंगलवार और वीरवार को काला पीलिया की ओपीडी के लिए भी इसका इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन को जब ये पोर्टेबल अस्पताल सौंपा गया था तो ये अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस था और इसमें 10 आईसीयू बेड और 90 सामान्य ऑक्सीजन बेड लगे हुए थे। एक कक्ष में वेंटिलेटर युक्त दो आईसीयू बेड और सामान्य कक्ष में छह ऑक्सीजन बेड भी शामिल थे। सभी कक्षों में सभी तरह की मूलभूत सुविधाएं मौजूद थी।
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इसमें बच्चों के लिए निक्कू वार्ड भी बनाया गया था लेकिन अब अस्पताल इसकी देखरेख व रखरखाव पर ध्यान नहीं दे रहा है। करीब 3.50 करोड़ रुपये से ज्यादा का यह पोर्टेबल अस्पताल 2021 में कैथल स्वास्थ्य विभाग को मिला था, क्योंकि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में बेडों की भारी कमी थी और लोगों को इलाज के लिए दाखिल करने के लिए सरकारी अस्पताल में बेड ही नहीं थे।
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पोर्टेबल अस्पताल को मरम्मत व देखभाल की जरूरत
पोर्टेबल अस्पताल 2021 में मिला था और इसकी उम्र उस समय करीब 15 साल बताई गई थी। पोर्टेबल अस्पताल देखरेख और मरम्मत नहीं होने से खराब हो रहा है। दरवाजों पर लगे लॉक व डोर क्लोजर खराब हो चुके हैं। पेंट उतर जाने के कारण लोहे के पाइप व सामान को जंग लग रहा है। छत भी जंग लगने व मरम्मत नहीं होने से उखड़ने लगी है। कई कमरों के एसी खराब पड़े हैं और नीचे का फर्श भी टूट चुका है। पोर्टेबल अस्पताल जिला नागरिक अस्पताल परिसर में पार्किंग स्टैंड पर बनाया गया था और यह 1682 गज जगह में फैला हुआ है।
पोर्टेबल अस्पताल का इस्तेमाल अच्छे से हो रहा है, क्योंकि अस्पताल में इतनी जगह नहीं है और कमी को देखते हुए ब्लड सैंपल कलेक्शन सेंटर, ड्रेसिंग रूम, काला पीलिया की ओपीडी, एनसीडी रूम, टीबी लैब, आइसोलेशन वार्ड और डेंगू वार्ड बनाया हुआ है। कुछ कमरों का लगातार इस्तेमाल हो रहा है और कुछ जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं। वे खुद कई बार निरीक्षण कर चुकी हैं और आदेश भी दिए थे कि इनकी सफाई और मरम्मत लगातार करवाते रहें, ताकि लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जा सके।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।

जिला नागरिक अस्पताल परिसर में बना पोर्टेबल अस्पताल। संवाद