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Kaithal News: दागी मार्केट कमेटी सचिवों के हाथों में फिर फसल खरीद की कमान

संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 28 Mar 2026 12:51 AM IST
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Tainted market committee secretaries once again in charge of crop procurement
7 दिसंबर को प्रका​शित समाचार।
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नरेंद्र पंडित
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कैथल। गेहूं खरीद सीजन की शुरुआत के साथ ही मंडियों में एक बार फिर गड़बड़ी की आशंका गहराने लगी है। गत धान सीजन में फर्जी गेटपास काटने के आरोप में चार्जशीट किए गए मार्केट कमेटी सचिवों को दोबारा फसल खरीद की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जिससे काम के दौरान पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

करोड़ों रुपये के फर्जी गेटपास और धान खरीद में अनियमितताओं के मामले की जांच अभी जारी है। इसके बावजूद विभाग ने सख्त कार्रवाई करने की बजाय उन्हीं अधिकारियों को फिर से मंडियों में तैनात कर दिया है।
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कैथल मार्केट कमेटी के सहायक सचिव नरेंद्र ढुल, चीका के सतबीर राविश, ढांड के देवेंद्र मोर, कलायत के बलवान सिंह, पूंडरी के गुलाब सिंह और सीवन के मंजीत सिंह को मुख्य प्रशासक मुकेश आहुजा द्वारा चार्जशीट किया गया था। वर्ष 2023 में चीका के सहायक सचिव नरेंद्र ढुल को धान खरीद व उठान में अनियमितता पाए जाने पर निलंबित भी किया जा चुका है।

भाकियू चढूनी के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना का कहना है कि ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन अधिकारियों की मौजूदगी में खरीद प्रक्रिया निष्पक्ष रह पाएगी या फिर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहेगी। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि दागी अधिकारियों को नहीं हटाया गया तो भाकियू आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। संवाद

आरोपी सचिवों को जिम्मेदारी देना गलत : लीलाराम

कैथल के पूर्व भाजपा विधायक लीला राम गुर्जर ने कहा कि धान घोटाले में चार्जशीट हुए अधिकारियों को दोबारा खरीद में ड्यूटी देना उचित नहीं है। उन्होंने विभाग से इन पर कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि जांच लंबित होने के बावजूद ऐसे अधिकारियों की तैनाती से सरकार की छवि धूमिल हो सकती है।

कागजों में दिखाई गई थी रिकॉर्ड खरीद

िछले धान सीजन में भौतिक रूप से आवक कम होने के बावजूद कागजों में रिकॉर्ड खरीद दर्शाई गई थी। प्राथमिक जांच में सामने आया था कि कुछ सचिवों ने मिलर्स और बिचौलियों के साथ मिलकर हजारों फर्जी गेटपास जारी किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए छह अधिकारियों को चार्जशीट किया गया था। नियमानुसार, जांच पूरी होने तक ऐसे अधिकारियों को संवेदनशील पदों से दूर रखा जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में इसके विपरीत निर्णय लिया गया है। हालांकि ढांड के एक सचिव का तबादला किया जा चुका है, जबकि अन्य अब भी यहीं तैनात हैं।
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