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Kaithal News: हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से गूंजा विवि सभागार
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:48 AM IST
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कार्यक्रम में हनुमान जी के आदर्शों पर विचार रखते विद्वान
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हनुमान जन्मोत्सव पर महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में एक दिवसीय विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्वविद्यालय के टीक परिसर स्थित सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और ज्ञानमय बना रहा।
गोष्ठी का शुभारंभ वैदिक परंपरा के अनुसार मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए हनुमान जन्मोत्सव के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत योग विभागाध्यक्ष डॉ. रामानंद मिश्र ने अपने विचार रखते हुए हनुमान जी के आदर्श चरित्र, उनकी भक्ति, बल, बुद्धि और विनम्रता को विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ रहा, जिससे सभागार में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। वक्ताओं ने हनुमान जी को केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन और नेतृत्व के आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद आचार्य बृज बिहारी भारद्वाज ने कहा कि हनुमान जी सेवा, समर्पण और कर्मयोग के सर्वोच्च उदाहरण हैं। वहीं मुख्य वक्ता आचार्य सतीश आर्य ने युवाओं को हनुमान जी के आदर्शों को अपनाने का संदेश देते हुए उन्हें शक्ति, ज्ञान और समर्पण का अद्वितीय संगम बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत ने की। उन्होंने कैथल की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए महाभारत के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र का संबंध हनुमान जी से जुड़ा रहा है, जो इसकी विशेष पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे हनुमान जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर सफलता की ओर अग्रसर हों।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन शर्मा और सभी का आभार कुलसचिव प्रो. संजय गोयल ने व्यक्त किया। इस अवसर पर श्याम बंसल, डॉ. जितेंद्र ठकराल, उमेश शर्मा आदि मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल और सार्थक बना दिया।
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कैथल। हनुमान जन्मोत्सव पर महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में एक दिवसीय विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्वविद्यालय के टीक परिसर स्थित सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और ज्ञानमय बना रहा।
गोष्ठी का शुभारंभ वैदिक परंपरा के अनुसार मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए हनुमान जन्मोत्सव के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत योग विभागाध्यक्ष डॉ. रामानंद मिश्र ने अपने विचार रखते हुए हनुमान जी के आदर्श चरित्र, उनकी भक्ति, बल, बुद्धि और विनम्रता को विस्तार से समझाया।
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कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ रहा, जिससे सभागार में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। वक्ताओं ने हनुमान जी को केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन और नेतृत्व के आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद आचार्य बृज बिहारी भारद्वाज ने कहा कि हनुमान जी सेवा, समर्पण और कर्मयोग के सर्वोच्च उदाहरण हैं। वहीं मुख्य वक्ता आचार्य सतीश आर्य ने युवाओं को हनुमान जी के आदर्शों को अपनाने का संदेश देते हुए उन्हें शक्ति, ज्ञान और समर्पण का अद्वितीय संगम बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. राजेन्द्रकुमार अनायत ने की। उन्होंने कैथल की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए महाभारत के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र का संबंध हनुमान जी से जुड़ा रहा है, जो इसकी विशेष पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे हनुमान जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर सफलता की ओर अग्रसर हों।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन शर्मा और सभी का आभार कुलसचिव प्रो. संजय गोयल ने व्यक्त किया। इस अवसर पर श्याम बंसल, डॉ. जितेंद्र ठकराल, उमेश शर्मा आदि मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल और सार्थक बना दिया।