{"_id":"6a3461f3110fb4416d07cadd","slug":"despite-supervision-by-five-officers-and-videography-of-every-pickup-and-dispatch-9000-sacks-of-wheat-have-gone-missing-karnal-news-c-18-knl1018-930798-2026-06-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: पांच अफसरों की निगरानी, हर उठान की वीडियोग्राफी में निकासी फिर भी 9 हजार गेहूं के कट्टे गायब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: पांच अफसरों की निगरानी, हर उठान की वीडियोग्राफी में निकासी फिर भी 9 हजार गेहूं के कट्टे गायब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
करनाल। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कुंजपुरा गोदाम से करीब 9585 गेहूं के कट्टे गायब होने के मामले में विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। क्योंकि जिस गोदाम से स्टॉक गायब हुआ है, वहां से गेहूं की निकासी पांच अधिकारियों की निगरानी, वीडियोग्राफी और तय प्रक्रिया के तहत होती रही। हर उठान पर सभी अधिकारियों के हस्ताक्षर भी हैं। बावजूद इसके गोदाम से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का गेहूं गायब हो गया।
एसीबी की जांच से पहले एएफएसओ ने स्टॉक के भौतिक सत्यापन की भी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी थी जबकि इससे पहले होते आ रहे हर उठान पर विभाग अधिकारी की ओर से हमेशा लिखा जाता रहा है कि देखने में स्टॉक पूरा लग रहा है लेकिन वास्तविकता पूरे उठान के बाद ही सामने आएगी।
हालांकि अब विभाग की ओर से यह दलील दी जा रही है कि गेहूं हाल ही में चोरी नहीं हुआ बल्कि करीब एक वर्ष पहले ही स्टॉक के बीच से कट्टे निकाल लिए गए थे जो बाद की गिनती में पकड़ में नहीं आए। दूसरी ओर शिकायतकर्ता ने इस तर्क को खारिज करते हुए दावा किया कि उसके पास बिना गेट पास और बिना कांटा कराए गेहूं से भरे वाहन निकलने के वीडियो सहित अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। अब मामले की जांच एसीबी कर रही है। इंस्पेक्टर निर्मल का कहना है कि यह लापरवाही है या संगठित तरीके से सरकारी अनाज का घोटाला इसका खुलासा जांच के बाद हो सकेगा।
विज्ञापन
स्टॉक गिनती के तरीके पर विभाग का बचाव
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि गोदाम में गेहूं के बड़े-बड़े चट्टे (स्टैक) लगाए जाते हैं और उनकी गिनती ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई के आधार पर अनुमानित गणना से की जाती है। अगर किसी ने स्टैक के बीच से कट्टे निकाल लिए हों और ऊपर का हिस्सा यथावत रखा गया हो तो पहली नजर में कमी दिखाई नहीं देती। असल रिपोर्ट तभी सामने आती है जबकि गेहूं पूरी तरह से उठाया जा चुका हो। यही वजह रही कि अप्रैल-मई 2025 के दौरान यह कमी गिनती में नहीं आ सकी।
शिकायतकर्ता बोला- बिना गेट पास निकलती थीं गाड़ियां
शिकायतकर्ता विकास का आरोप है कि गोदाम से बिना गेटपास और बिना कांटा कराए भी गेहूं से लदी गाड़ियां बाहर निकाली जाती थीं। दावा किया कि 22-23 मई को उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया था, जिसे सबूत के तौर पर जांच एजेंसियों को सौंपा है। जिस वाहन का वीडियो उनके पास है, उसकी विभागीय रिकॉर्ड में कोई एंट्री तक नहीं दिखाई गई। उन्होंने मामले को लेकर अदालत का भी दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट के निर्देश पर तत्कालीन खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के अधिकारियों से स्टॉक संबंधी शपथ पत्र भी लिए गए थे। उन्होंने पूरे मामले का जिम्मेदार एएफएसओ को ठहराया है। शिकायत के बाद मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कुंजपुरा गोदाम का भौतिक सत्यापन किया। जांच में मौके पर करीब 9315 गेहूं के कट्टे ही मिले जबकि रिकॉर्ड के अनुसार वहां 18900 कट्टे मौजूद होने चाहिए थे।
-- -
पहले भी हो चुकी है चोरी, मंत्री के निरीक्षण में मिले थे 4904 कट्टे कम
कुंजपुरा गोदाम पहले भी गेहूं चोरी के मामले में चर्चा में रह चुका है। पिछले वर्ष शिकायत मिलने पर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने स्वयं गोदाम का निरीक्षण किया था। उस समय करीब 1.81 लाख कट्टों के स्टॉक में से 4904 कट्टे कम पाए थे। मामले में विभाग ने तत्कालीन निरीक्षक अशोक शर्मा और उप निरीक्षक संदीप को निलंबित किया था। इसके बाद पूरे गोदाम की जिम्मेदारी एएफएसओ मुकेश कुमार गुप्ता को सौंपी गई और शेष करीब 1.78 लाख कट्टों का गेहूं लगातार एफसीआई और सरकारी डिपो में भेजा जाता रहा। अब उसी बचे हुए स्टॉक में से करीब 18900 कट्टों में लगभग 9585 कट्टे गायब मिलने से विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चोरी रोकने के लिए बनाई गई थी पांच अफसरों की कमेटी
बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं को देखते हुए विभाग ने गोदाम की निगरानी के लिए पांच अधिकारियों की विशेष कमेटी बनाई थी। इसमें एएफएसओ मुकेश कुमार गुप्ता, निरीक्षक राजेश और कैलाश, तथा उप निरीक्षक अमजद और बिजेंद्र को जिम्मेदारी दी गई थी। निर्देश थे कि जब भी गोदाम से गेहूं की निकासी होगी, कमेटी के सदस्य मौके पर मौजूद रहेंगे। लोडिंग से लेकर वाहन रवाना होने तक पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी और रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा।
एसीबी की जांच से पहले एएफएसओ ने स्टॉक के भौतिक सत्यापन की भी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी थी जबकि इससे पहले होते आ रहे हर उठान पर विभाग अधिकारी की ओर से हमेशा लिखा जाता रहा है कि देखने में स्टॉक पूरा लग रहा है लेकिन वास्तविकता पूरे उठान के बाद ही सामने आएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
हालांकि अब विभाग की ओर से यह दलील दी जा रही है कि गेहूं हाल ही में चोरी नहीं हुआ बल्कि करीब एक वर्ष पहले ही स्टॉक के बीच से कट्टे निकाल लिए गए थे जो बाद की गिनती में पकड़ में नहीं आए। दूसरी ओर शिकायतकर्ता ने इस तर्क को खारिज करते हुए दावा किया कि उसके पास बिना गेट पास और बिना कांटा कराए गेहूं से भरे वाहन निकलने के वीडियो सहित अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। अब मामले की जांच एसीबी कर रही है। इंस्पेक्टर निर्मल का कहना है कि यह लापरवाही है या संगठित तरीके से सरकारी अनाज का घोटाला इसका खुलासा जांच के बाद हो सकेगा।
स्टॉक गिनती के तरीके पर विभाग का बचाव
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि गोदाम में गेहूं के बड़े-बड़े चट्टे (स्टैक) लगाए जाते हैं और उनकी गिनती ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई के आधार पर अनुमानित गणना से की जाती है। अगर किसी ने स्टैक के बीच से कट्टे निकाल लिए हों और ऊपर का हिस्सा यथावत रखा गया हो तो पहली नजर में कमी दिखाई नहीं देती। असल रिपोर्ट तभी सामने आती है जबकि गेहूं पूरी तरह से उठाया जा चुका हो। यही वजह रही कि अप्रैल-मई 2025 के दौरान यह कमी गिनती में नहीं आ सकी।
शिकायतकर्ता बोला- बिना गेट पास निकलती थीं गाड़ियां
शिकायतकर्ता विकास का आरोप है कि गोदाम से बिना गेटपास और बिना कांटा कराए भी गेहूं से लदी गाड़ियां बाहर निकाली जाती थीं। दावा किया कि 22-23 मई को उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया था, जिसे सबूत के तौर पर जांच एजेंसियों को सौंपा है। जिस वाहन का वीडियो उनके पास है, उसकी विभागीय रिकॉर्ड में कोई एंट्री तक नहीं दिखाई गई। उन्होंने मामले को लेकर अदालत का भी दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट के निर्देश पर तत्कालीन खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के अधिकारियों से स्टॉक संबंधी शपथ पत्र भी लिए गए थे। उन्होंने पूरे मामले का जिम्मेदार एएफएसओ को ठहराया है। शिकायत के बाद मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कुंजपुरा गोदाम का भौतिक सत्यापन किया। जांच में मौके पर करीब 9315 गेहूं के कट्टे ही मिले जबकि रिकॉर्ड के अनुसार वहां 18900 कट्टे मौजूद होने चाहिए थे।
पहले भी हो चुकी है चोरी, मंत्री के निरीक्षण में मिले थे 4904 कट्टे कम
कुंजपुरा गोदाम पहले भी गेहूं चोरी के मामले में चर्चा में रह चुका है। पिछले वर्ष शिकायत मिलने पर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने स्वयं गोदाम का निरीक्षण किया था। उस समय करीब 1.81 लाख कट्टों के स्टॉक में से 4904 कट्टे कम पाए थे। मामले में विभाग ने तत्कालीन निरीक्षक अशोक शर्मा और उप निरीक्षक संदीप को निलंबित किया था। इसके बाद पूरे गोदाम की जिम्मेदारी एएफएसओ मुकेश कुमार गुप्ता को सौंपी गई और शेष करीब 1.78 लाख कट्टों का गेहूं लगातार एफसीआई और सरकारी डिपो में भेजा जाता रहा। अब उसी बचे हुए स्टॉक में से करीब 18900 कट्टों में लगभग 9585 कट्टे गायब मिलने से विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चोरी रोकने के लिए बनाई गई थी पांच अफसरों की कमेटी
बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं को देखते हुए विभाग ने गोदाम की निगरानी के लिए पांच अधिकारियों की विशेष कमेटी बनाई थी। इसमें एएफएसओ मुकेश कुमार गुप्ता, निरीक्षक राजेश और कैलाश, तथा उप निरीक्षक अमजद और बिजेंद्र को जिम्मेदारी दी गई थी। निर्देश थे कि जब भी गोदाम से गेहूं की निकासी होगी, कमेटी के सदस्य मौके पर मौजूद रहेंगे। लोडिंग से लेकर वाहन रवाना होने तक पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी और रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा।