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Karnal News: वारंटी में खराब बैटरी बदलने में देरी पर जुर्माना
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करनाल। वारंटी अवधि में खराब हुई बैटरी को समय पर बदलने के बजाय ग्राहक को बार-बार चक्कर कटवाना एक्साइड कंपनी और उसके अधिकृत डीलर को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मामले में एक्साइड बैटरी और निर्मल बैटरी के प्रबंधन को उपभोक्ता को बैटरी की कीमत 4,500 रुपये देने का आदेश दिया। मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए 4,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
फैसला आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह तथा सदस्य नीरू अग्रवाल और सर्वजीत कौर की पीठ ने सुनाया। आयोग के फैसले के अनुसार, 45 दिनों में उपभोक्ता को भुगतान करना होगा। आयोग ने शिकायतकर्ता को कंपनी की ओर से 10 जुलाई 2025 को उपलब्ध कराई गई अप्रयुक्त नई बैटरी को वापस सौंपने का आदेश दिया। फैसले में आयोग ने स्पष्ट किया कि वारंटी का लाभ देना केवल कागजी औपचारिकता नहीं है, बल्कि उपभोक्ता की शिकायत का समय पर और प्रभावी समाधान करना भी कंपनी की जिम्मेदारी है।
फैसले के अनुसार, सेक्टर-8 अर्बन एस्टेट निवासी नवीन वर्मा ने अपनी सैंट्रो कार के लिए 14 नवंबर 2022 को निर्मल बैटरी से एक्साइड कंपनी की बैटरी खरीदी थी। खरीद के कुछ समय बाद ही बैटरी में परेशानी शुरू हो गई। कार स्टार्ट नहीं होती थी। डीलर ने समस्या को कार की चार्जिंग से जुड़ा बताते हुए बैटरी को दो बार चार्ज किया और इसके लिए उनसे पैसे लिए। बाद में मैकेनिक से जांच कराने पर कार के सिस्टम में कोई खराबी नहीं मिली। इसके बावजूद बैटरी की समस्या बनी रही। जनवरी 2025 में डीलर की ओर से बैटरी बदल दी गई लेकिन कुछ ही महीनों बाद इस बैटरी में भी समस्या आने लगी।
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परेशान होकर खरीदनी पड़ी दूसरी बैटरी
बार-बार डीलर के चक्कर काटने के बावजूद दूसरी बैटरी को नहीं बदला गया। समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो नवीन ने 30 जून 2025 को 4,500 रुपये में दूसरी कंपनी की नई बैटरी खरीदी। इसके बाद कार सुचारू रूप से चलने लगी। उन्होंने एक्साइड कंपनी के मुख्यालय को ईमेल के माध्यम से शिकायत की। कंपनी ने 10 जुलाई 2025 को नई बैटरी उपलब्ध कराई लेकिन नवीन इससे पहले ही बैटरी खरीद चुके थे।
गुडविल जेस्चर की दलील नहीं मानी
सुनवाई के दौरान कंपनी और डीलर की ओर से दलील दी गई कि कार के चार्जिंग सिस्टम में समस्या थी और ग्राहक की सुविधा के लिए उन्होंने गुडविल जेस्चर के तहत बैटरी बदलने की कार्रवाई की थी। आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि अगर वारंटी के दौरान खराब बैटरी को समय पर बदला जाता और शिकायत का उचित समाधान किया जाता तो उपभोक्ता को अपनी जेब से दूसरी बैटरी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। समय पर सेवा उपलब्ध न कराना और उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से चक्कर कटवाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
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फैसला आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह तथा सदस्य नीरू अग्रवाल और सर्वजीत कौर की पीठ ने सुनाया। आयोग के फैसले के अनुसार, 45 दिनों में उपभोक्ता को भुगतान करना होगा। आयोग ने शिकायतकर्ता को कंपनी की ओर से 10 जुलाई 2025 को उपलब्ध कराई गई अप्रयुक्त नई बैटरी को वापस सौंपने का आदेश दिया। फैसले में आयोग ने स्पष्ट किया कि वारंटी का लाभ देना केवल कागजी औपचारिकता नहीं है, बल्कि उपभोक्ता की शिकायत का समय पर और प्रभावी समाधान करना भी कंपनी की जिम्मेदारी है।
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फैसले के अनुसार, सेक्टर-8 अर्बन एस्टेट निवासी नवीन वर्मा ने अपनी सैंट्रो कार के लिए 14 नवंबर 2022 को निर्मल बैटरी से एक्साइड कंपनी की बैटरी खरीदी थी। खरीद के कुछ समय बाद ही बैटरी में परेशानी शुरू हो गई। कार स्टार्ट नहीं होती थी। डीलर ने समस्या को कार की चार्जिंग से जुड़ा बताते हुए बैटरी को दो बार चार्ज किया और इसके लिए उनसे पैसे लिए। बाद में मैकेनिक से जांच कराने पर कार के सिस्टम में कोई खराबी नहीं मिली। इसके बावजूद बैटरी की समस्या बनी रही। जनवरी 2025 में डीलर की ओर से बैटरी बदल दी गई लेकिन कुछ ही महीनों बाद इस बैटरी में भी समस्या आने लगी।
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परेशान होकर खरीदनी पड़ी दूसरी बैटरी
बार-बार डीलर के चक्कर काटने के बावजूद दूसरी बैटरी को नहीं बदला गया। समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो नवीन ने 30 जून 2025 को 4,500 रुपये में दूसरी कंपनी की नई बैटरी खरीदी। इसके बाद कार सुचारू रूप से चलने लगी। उन्होंने एक्साइड कंपनी के मुख्यालय को ईमेल के माध्यम से शिकायत की। कंपनी ने 10 जुलाई 2025 को नई बैटरी उपलब्ध कराई लेकिन नवीन इससे पहले ही बैटरी खरीद चुके थे।
गुडविल जेस्चर की दलील नहीं मानी
सुनवाई के दौरान कंपनी और डीलर की ओर से दलील दी गई कि कार के चार्जिंग सिस्टम में समस्या थी और ग्राहक की सुविधा के लिए उन्होंने गुडविल जेस्चर के तहत बैटरी बदलने की कार्रवाई की थी। आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि अगर वारंटी के दौरान खराब बैटरी को समय पर बदला जाता और शिकायत का उचित समाधान किया जाता तो उपभोक्ता को अपनी जेब से दूसरी बैटरी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। समय पर सेवा उपलब्ध न कराना और उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से चक्कर कटवाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।