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Karnal News: मेडिकल कॉलेज की बदहाली पर रिटायर्ड अधिकारी ने मुख्य सचिव को भेजी शिकायत
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल।कल्पना चाव ला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में व्यवस्थाओं के बदहाल होने पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त सहायक कुलसचिव दविंदर सचदेवा ने स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखा है। उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक, उपायुक्त करनाल और विधायक जगमोहन आनंद को विस्तृत शिकायत भेजी है।
दविंदर सचदेवा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि अस्पताल की समस्याओं को लेकर पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में कॉटन जैसी जरूरी सामग्री तक उपलब्ध नहीं है जिससे प्राथमिक उपचार में भी दिक्कत आ रही है। लैब में पर्याप्त जांच सुविधाएं नहीं होने के कारण मरीजों को निजी लैब में भेजा जा रहा है जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
दवा की कमी की भी शिकायत
अस्पताल की फार्मेसी में जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में कई जगह खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं जिनकी जगह प्लाईवुड लगाया गया है। लंबे समय से मरम्मत नहीं हुई है। कुर्सियां दरवाजे और अन्य फर्नीचर जर्जर अवस्था में हैं। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर भी टूटी हालत में हैं जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
खराब पंखों को ठीक कराने के बजाय अन्य जगहों से निकालकर लगाया जा रहा है, जिससे रखरखाव व्यवस्था की पोल खुल रही है। अस्पताल परिसर की अधिकतर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं जिससे रात में मरीजों और परिजनों को दिक्कत होती है और सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं। अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी मरीजों और उनके परिजनों के लिए खतरा बनी हुई है।
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दविंदर सचदेवा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि अस्पताल की समस्याओं को लेकर पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में कॉटन जैसी जरूरी सामग्री तक उपलब्ध नहीं है जिससे प्राथमिक उपचार में भी दिक्कत आ रही है। लैब में पर्याप्त जांच सुविधाएं नहीं होने के कारण मरीजों को निजी लैब में भेजा जा रहा है जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
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दवा की कमी की भी शिकायत
अस्पताल की फार्मेसी में जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में कई जगह खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं जिनकी जगह प्लाईवुड लगाया गया है। लंबे समय से मरम्मत नहीं हुई है। कुर्सियां दरवाजे और अन्य फर्नीचर जर्जर अवस्था में हैं। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर भी टूटी हालत में हैं जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
खराब पंखों को ठीक कराने के बजाय अन्य जगहों से निकालकर लगाया जा रहा है, जिससे रखरखाव व्यवस्था की पोल खुल रही है। अस्पताल परिसर की अधिकतर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं जिससे रात में मरीजों और परिजनों को दिक्कत होती है और सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं। अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी मरीजों और उनके परिजनों के लिए खतरा बनी हुई है।