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Haryana: बाबैन के प्राचीन शिवालय मंदिर का 108 फुट ऊंचा गुंबद धमाके के साथ ढहा, मलबे में दबने से पुजारी की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
Published by: Naveen
Updated Sun, 21 Jun 2026 10:38 AM IST
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सार
हादसे के समय मंदिर के पुजारी रोजाना की तरह तड़के उठकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और मंदिर की सेवा में जुटे हुए थे। गुंबद इतनी तेजी से गिरा कि उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। जोरदार धमाके की आवाज सुनकर भारी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे।
प्राचीन शिवालय मंदिर
- फोटो : संवाद
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विस्तार
कुरुक्षेत्र के उपमंडल बाबैन से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन शिवालय मंदिर का विशाल गुंबद आज तड़के सुबह करीब 4 बजे एक जोरदार धमाके के साथ अचानक ढह गया। 108 फुट ऊंचा यह गुंबद ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गया। इस दर्दनाक हादसे में मंदिर के अंदर सेवा और पूजा-अर्चना की तैयारी कर रहे मुख्य पुजारी की मलबे में दबने से मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, मंदिर का गर्भगृह और पवित्र शिवलिंग भी इस मलबे के नीचे पूरी तरह दब गया है।
तड़के 4 बजे जोरदार धमाके से सहम गया इलाका
चश्मदीदों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, हादसा सुबह करीब 4 बजे हुआ जब पूरा इलाका सो रहा था। अचानक एक बहुत जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी, जिसके साथ ही पूरी धरती हिल गई। आस-पास के लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक प्राचीन शिवालय का भव्य और विशाल 108 फुट ऊंचा गुंबद भरभराकर नीचे गिर चुका था। आसमान में धूल का एक गहरा गुबार छा गया और चीख-पुकार मच गई।
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मलबे में दबने से सेवादार पुजारी की दर्दनाक मौत
हादसे के समय मंदिर के पुजारी रोजाना की तरह तड़के उठकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और मंदिर की सेवा में जुटे हुए थे। गुंबद इतनी तेजी से गिरा कि उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। जोरदार धमाके की आवाज सुनकर भारी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और तुरंत मलबे को हटाने का काम शुरू किया। लेकिन मलबे का आकार इतना बड़ा था कि पुजारी को बचाया नहीं जा सका और मलबे के नीचे दबने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
मौके पर पहुंचा प्रशासनिक अमला
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। मलबे को हटाने और राहत कार्य के लिए तुरंत जेसीबी (JCB) मशीनों को काम पर लगाया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता सबसे पहले मलबे को पूरी तरह साफ करने और स्थिति को नियंत्रित करने की है। प्राचीन मंदिर के इस तरह अचानक मलबे के ढेर में तब्दील होने से पूरे क्षेत्र में शोक और सन्नाटे का माहौल है।