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Kurukshetra News: बाबैन के नागेश्वर महादेव मंदिर का 108 फुट ऊंचा गुंबद ढहा, मलबे में दबने से महंत की मौत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2026 02:29 AM IST
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108-foot-high dome of Babain's Nageshwar Mahadev Temple collapses; Mahant dies after being buried under the debris.
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कुरुक्षेत्र/ बाबैन। क्षेत्र के प्राचीन एवं प्रसिद्ध उप ज्योतिर्लिंग नागेश्वर महादेव मंदिर का 108 फीट ऊंचा गुंबद रविवार तड़के चार बजे भरभराकर गिर गया। गुंबद के मलबे के नीचे दबने से मंदिर परिसर में सो रहे करीब 74 वर्षीय महंत नटराजन गिरी की मौत हो गई। गुंबद का मलबा गिरने से मंदिर के गर्भगृह को भी नुकसान पहुंचा और शिवलिंग भी जमींदोज हो गया, साथ ही गर्भगृह में स्थापित प्राचीन देवी-देवाताओं की प्रतिमाओं को भी नुकसान हुआ है।

सुबह चार बजे के करीब मंदिर में गुंबद गिरने से जोरदार धमाका हुआ। ग्रामीण दौड़ते हुए मंदिर की ओर आए। मंदिर का मंजर देख हर कोई हैरान रह गया। उसी समय मंदिर के पुजारी ने बताया कि महंत रात को मंदिर परिसर में ही चारपाई डालकर सोए थे, जो कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं, तभी ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए मलबा हटाना शुरू किया और महंत नटराजन को मलबे से निकाला लेकिन महंत को जब तक मलबे से निकाला तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
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घटना की सूचना मिलते ही बाबैन थाना एसएचओ राजीव कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद शव को कब्जे में ले लिया। हादसे की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र शोक की लहर दौड़ गई। मंदिर के संरक्षक महंत त्रिकाल गिरी, सेवादार भजन गिरी, सरपंच संजीव सिंगला गोल्डी व अन्य लोगों ने इस हादसे पर गहरा शोक जताया।
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आस्था का प्रमुख केंद्र है नागेश्वर महादेव मंदिर
नागेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र के सबसे प्राचीन और श्रद्धा के केंद्रों में से एक माना जाता है। संरक्षक महंत त्रिकाल गिरी के अनुसार यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है तथा यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है। मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। मंदिर की देखरेख लंबे समय से महंत त्रिकाल गिरी कर रहे हैं। वहीं वर्ष 2012 में मंदिर का पुनर्निर्माण और विस्तार कार्य भी कराया गया था। मंदिर का गुंबद क्यों गिरा, यह कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। संरक्षक महंत त्रिकाल गिरी बताते हैं कि अभी यह जांच का विषय है लेकिन ऐसी संभावना नहीं लग रही थी कि गुंबद ऐसे गिर सकता है।

गर्भगृह में भी नुकसान
गुंबद के गिरने से मंदिर के गर्भगृह को भी नुकसान पहुंचा है। गर्भगृह के भीतर मलबा गिरने से शिवलिंग एवं अन्य धार्मिक प्रतिमाएं मलबे के नीचे दब गई हैं। देर शाम तक भी मंदिर परिसर में भारी मात्रा में मलबा पड़ा रहा और उसके हटने के बाद ही वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रतिनिधि ने लिया जायजा
घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यालय के प्रतिनिधि कैलाश सैनी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर प्रबंधन से घटना की जानकारी प्राप्त की तथा स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान बाबैन के सरपंच संजीव सिंगला गोल्डी, मंडल प्रधान विकास शर्मा जालखेड़ी, अनिल टाटकी, भीम बैरथला, सुखदेव कपूर, रिंकू कश्यप, रामऋषि सैनी, शिव शरण शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और क्षेत्रवासी भी पहुंचे।
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