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Kurukshetra News: मीरी-पीरी अस्पताल के चिकित्सकों को दो माह से वेतन नहीं, बढ़ रहा रोष
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शाहाबाद। एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा को ज्ञापन सौंपते चिकित्सक। स्वयं
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शाहाबाद। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड मेडिकल ट्रस्ट के संचालन की जिम्मेदारी अब हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) के अधीन आ चुकी है जबकि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने संस्थान के संचालन से स्वयं को अलग कर लिया है। इस प्रशासनिक बदलाव का सीधा असर अस्पताल के कर्मचारियों और चिकित्सा सेवाओं पर पड़ने लगा है।
अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि पिछले दो माह से उन्हें वेतन नहीं मिला है जबकि अस्पताल में उपयोग होने वाले आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और अन्य जरूरी सामान की भी कमी महसूस की जाने लगी है, इसके बावजूद डॉक्टर और स्टाफ मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए लगातार सेवाएं दे रहे हैं।
अस्पताल के सीईओ संदीप इंद्र सिंह चीमा ने कर्मचारियों और चिकित्सकों की समस्याओं को एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा तथा न्यायालय के फैसले से पहले ट्रस्ट के सचिव रहे सुखमिंद्र सिंह के समक्ष रखा। बुधवार को दोनों पदाधिकारी मीरी-पीरी संस्थान पहुंचे और चिकित्सकों व कर्मचारियों के साथ बैठक की। इस दौरान डॉक्टरों और स्टाफ ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
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ज्ञापन में चिकित्सकों डॉ. करमिंद्र ढिल्लो, डॉ. राघव शर्मा, डॉ. साहिल, डॉ. मनदीप सिंह कोहली, डॉ. वितराग, डॉ. विभा मदान, डॉ. आशा, डॉ. गगनदीप सिंह, डॉ. अमन, डॉ. नितिन राणा, डॉ. अभिनव गुप्ता, डॉ. मोविल गुप्ता, डॉ. मनीष, डॉ. एस.एस. ढिल्लो, डॉ. निशा सिंह, डॉ. आयूशी गेरा, डॉ. गुरपिंद्र बीर सिंह, डॉ. अभिषेक माहना, डॉ. उदय प्रताप सिंह, डॉ. आभा मित्तल, डॉ. अरविंद ने कहा कि दो माह से वेतन न मिलने के बावजूद वे जनहित में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो उन्हें कठोर निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
4 जून को कुरुक्षेत्र में होगी मीरी-पीरी संस्थान को लेकर बैठक
एचएसजीएमसी अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि संस्थान के संचालन, कर्मचारियों के वेतन, अस्पताल के भविष्य और निर्माण कार्यों को लेकर चार जून को जिला स्थित एचएसजीएमसी मुख्य कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें सभी 49 सदस्य भाग लेंगे और संस्थान के भविष्य को लेकर ठोस एवं दीर्घकालिक निर्णय लिया जाएगा, इसके साथ ही आवश्यक बजट पारित करने पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने चिकित्सकों और कर्मचारियों से भी संयम बनाए रखने की अपील की।
एसजीपीसी ने भी दिया सहयोग का प्रस्ताव
न्यायालय के फैसले से पहले ट्रस्ट के सचिव रहे सुखमिंद्र सिंह ने कहा कि एचएसजीएमसी को संस्थान की जिम्मेदारी पूरी तरह संभाल लेनी चाहिए। यदि एचएसजीएमसी आर्थिक रूप से संस्थान को संचालित करने में कठिनाई महसूस कर रही है तो वह औपचारिक रूप से एसजीपीसी को लिखकर दे सकती है, ऐसे में एसजीपीसी दोबारा संस्थान का संचालन संभालने और मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि पिछले दो माह से उन्हें वेतन नहीं मिला है जबकि अस्पताल में उपयोग होने वाले आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और अन्य जरूरी सामान की भी कमी महसूस की जाने लगी है, इसके बावजूद डॉक्टर और स्टाफ मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए लगातार सेवाएं दे रहे हैं।
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अस्पताल के सीईओ संदीप इंद्र सिंह चीमा ने कर्मचारियों और चिकित्सकों की समस्याओं को एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा तथा न्यायालय के फैसले से पहले ट्रस्ट के सचिव रहे सुखमिंद्र सिंह के समक्ष रखा। बुधवार को दोनों पदाधिकारी मीरी-पीरी संस्थान पहुंचे और चिकित्सकों व कर्मचारियों के साथ बैठक की। इस दौरान डॉक्टरों और स्टाफ ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
ज्ञापन में चिकित्सकों डॉ. करमिंद्र ढिल्लो, डॉ. राघव शर्मा, डॉ. साहिल, डॉ. मनदीप सिंह कोहली, डॉ. वितराग, डॉ. विभा मदान, डॉ. आशा, डॉ. गगनदीप सिंह, डॉ. अमन, डॉ. नितिन राणा, डॉ. अभिनव गुप्ता, डॉ. मोविल गुप्ता, डॉ. मनीष, डॉ. एस.एस. ढिल्लो, डॉ. निशा सिंह, डॉ. आयूशी गेरा, डॉ. गुरपिंद्र बीर सिंह, डॉ. अभिषेक माहना, डॉ. उदय प्रताप सिंह, डॉ. आभा मित्तल, डॉ. अरविंद ने कहा कि दो माह से वेतन न मिलने के बावजूद वे जनहित में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो उन्हें कठोर निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
4 जून को कुरुक्षेत्र में होगी मीरी-पीरी संस्थान को लेकर बैठक
एचएसजीएमसी अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि संस्थान के संचालन, कर्मचारियों के वेतन, अस्पताल के भविष्य और निर्माण कार्यों को लेकर चार जून को जिला स्थित एचएसजीएमसी मुख्य कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें सभी 49 सदस्य भाग लेंगे और संस्थान के भविष्य को लेकर ठोस एवं दीर्घकालिक निर्णय लिया जाएगा, इसके साथ ही आवश्यक बजट पारित करने पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने चिकित्सकों और कर्मचारियों से भी संयम बनाए रखने की अपील की।
एसजीपीसी ने भी दिया सहयोग का प्रस्ताव
न्यायालय के फैसले से पहले ट्रस्ट के सचिव रहे सुखमिंद्र सिंह ने कहा कि एचएसजीएमसी को संस्थान की जिम्मेदारी पूरी तरह संभाल लेनी चाहिए। यदि एचएसजीएमसी आर्थिक रूप से संस्थान को संचालित करने में कठिनाई महसूस कर रही है तो वह औपचारिक रूप से एसजीपीसी को लिखकर दे सकती है, ऐसे में एसजीपीसी दोबारा संस्थान का संचालन संभालने और मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।