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Kurukshetra News: गांव घनौरा जाट्टान में किसानों ने लिया प्रशिक्षण में हिस्सा
Sat, 18 Jul 2026 03:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 18 Jul 2026 03:57 AM IST
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कुरुक्षेत्र। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जिले के गांव धनौरा जाट्टान में प्राकृतिक खेती विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.अश्वनी कुमार (पौध रोग) तथा डॉ. सरिता रानी (सस्य विज्ञान) की टीम ने प्राकृतिक खेती को जिले में बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को प्रशिक्षित किया ताकि जिले के ज़्यादा से ज़्यादा किसानों को जागरुक किया जा सके। कृषि विज्ञान केंद्र, कुरुक्षेत्र की वैज्ञानिक डॉ.सरिता रानी (सस्य विज्ञान) ने किसानों को रासायनिक खाद और दवाइयों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी, पर्यावरण तथा स्वास्थ्य को होने वाले नुक़सान के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने बताया कि खेती में प्रयोग होने वाले रासायनिक पदार्थों रूपी जहर के सेवन से आज हर घर में कोई ना कोई सदस्य किसी ना किसी बीमारी से परेशान है और हमे अपने, अपने परिवार तथा देशवासियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के मुख्य घटक जीवामृत तथा घनजीवामृत बनाने की प्रक्रिया तथा प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिला कृषि विज्ञान केंद्र के ही वैज्ञानिक डॉ.अश्वनी कुमार ने फसलों में होने वाले रोगों की रोकथाम के लिए प्राकृतिक खेती में खट्टी लस्सी एवम जीवाणुओं के प्रयोग के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आहवाहन किया। संवाद
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उन्होंने बताया कि खेती में प्रयोग होने वाले रासायनिक पदार्थों रूपी जहर के सेवन से आज हर घर में कोई ना कोई सदस्य किसी ना किसी बीमारी से परेशान है और हमे अपने, अपने परिवार तथा देशवासियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के मुख्य घटक जीवामृत तथा घनजीवामृत बनाने की प्रक्रिया तथा प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिला कृषि विज्ञान केंद्र के ही वैज्ञानिक डॉ.अश्वनी कुमार ने फसलों में होने वाले रोगों की रोकथाम के लिए प्राकृतिक खेती में खट्टी लस्सी एवम जीवाणुओं के प्रयोग के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आहवाहन किया। संवाद
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