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Kurukshetra News: केयू में बनेगा लोक साहित्य और संस्कृति शोध केंद्र
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कुरुक्षेत्र। केयू का द्वितीय द्वार। संस्थान
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा की लोक संस्कृति और साहित्य पर शोध के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में नया केंद्र स्थापित होगा। यह केंद्र लोक विरासत को सहेजने और बढ़ावा देने का काम करेगा। केंद्र लोकगीत, लोककथाओं, लोकनाट्य, लोकभाषा, लोककला और लोकजीवन से जुड़ी सामग्री एकत्र करेगा। इसका दस्तावेजीकरण डिजिटलीकरण और प्रकाशन भी किया जाएगा।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि हरियाणा की लोक संस्कृति में जनजीवन और पारंपरिक कलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि धरोहर हरियाणा संग्रहालय की सामग्री हिंदी विभाग के कमरा नंबर-8 में स्थानांतरित होगी। इससे शोधार्थियों को हरियाणवी लोक साहित्य और संस्कृति से संबंधित पुस्तकें एक ही स्थान पर मिलेंगी। हिंदी विभाग में पहले से ही इन विषयों पर शोध हो रहा है। शोध केंद्र बनने से शोध कार्य को गति मिलेगी।
संगोष्ठियों से लेकर डिजिटलीकरण तक होगा काम
प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से हरियाणवी लोक साहित्य एवं संस्कृति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियां, कार्यशालाएं और व्याख्यान मालाएं आयोजित की जा सकेंगी। शोध परियोजनाओं और प्रदर्शनियों के साथ लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और प्रकाशन भी किया जा सकेगा।
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शोध परियोजनाओं के लिए समिति का प्रस्ताव
हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि शोध केंद्र की स्थापना और इससे जुड़ी परियोजनाओं के संचालन के लिए समिति गठित करने का प्रस्ताव है। जिसमें लोक संपर्क विभाग के निदेशक, युवा एवं सांस्कृतिक मामले के निदेशक, जेएलएन पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्ष, लोक संपर्क विभाग के उपनिदेशक, सहायक रजिस्ट्रार (सामान्य) तथा वित्त अधिकारी के प्रतिनिधि को सदस्य प्रस्तावित किया गया है। यह समिति केंद्र की स्थापना, उपलब्ध साहित्य व संसाधनों के उपयोग और शोध परियोजनाओं को दिशा देने का काम करेगी।
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कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि हरियाणा की लोक संस्कृति में जनजीवन और पारंपरिक कलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि धरोहर हरियाणा संग्रहालय की सामग्री हिंदी विभाग के कमरा नंबर-8 में स्थानांतरित होगी। इससे शोधार्थियों को हरियाणवी लोक साहित्य और संस्कृति से संबंधित पुस्तकें एक ही स्थान पर मिलेंगी। हिंदी विभाग में पहले से ही इन विषयों पर शोध हो रहा है। शोध केंद्र बनने से शोध कार्य को गति मिलेगी।
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संगोष्ठियों से लेकर डिजिटलीकरण तक होगा काम
प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से हरियाणवी लोक साहित्य एवं संस्कृति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियां, कार्यशालाएं और व्याख्यान मालाएं आयोजित की जा सकेंगी। शोध परियोजनाओं और प्रदर्शनियों के साथ लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और प्रकाशन भी किया जा सकेगा।
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शोध परियोजनाओं के लिए समिति का प्रस्ताव
हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि शोध केंद्र की स्थापना और इससे जुड़ी परियोजनाओं के संचालन के लिए समिति गठित करने का प्रस्ताव है। जिसमें लोक संपर्क विभाग के निदेशक, युवा एवं सांस्कृतिक मामले के निदेशक, जेएलएन पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्ष, लोक संपर्क विभाग के उपनिदेशक, सहायक रजिस्ट्रार (सामान्य) तथा वित्त अधिकारी के प्रतिनिधि को सदस्य प्रस्तावित किया गया है। यह समिति केंद्र की स्थापना, उपलब्ध साहित्य व संसाधनों के उपयोग और शोध परियोजनाओं को दिशा देने का काम करेगी।