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शक्ति परंपरा के संरक्षण, संवर्धन, वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त रहा शक्तिपीठ : सतपाल
Thu, 23 Jul 2026 03:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 23 Jul 2026 03:47 AM IST
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय संगोष्ठी शक्तिमीमांसा में सहभागिता करने पहुंचे शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप मां
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कुरुक्षेत्र। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर जम्मू एवं श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड कटरा के संयुक्त तत्वावधान में चार दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शक्तिमीमांसा 51 शक्तिपीठ भारतीय विरासत के आध्यात्मिक स्तंभ में देशभर के शक्तिपीठों के पीठाध्यक्ष, महंत, विद्वान, शोधकर्ता एवं धर्माचार्य एक मंच पर एकत्रित हुए। इस दौरान भारतीय शक्ति परंपरा के विविध आयामों पर मंथन किया गया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन अकादमिक सत्र में हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ कुरुक्षेत्र के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने शक्तिपीठ एवं राष्ट्रीय विरासत विषय पर अपना शोधपत्र एवं प्रेरणादायी व्याख्यान प्रस्तुत किया। शक्तिपीठ के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के तौर पर पीठाध्यक्ष के साथ सेवक मंडल उपाध्यक्ष डॉ. एमके मौद्गिल एवं संयोजक सुनील वर्मा सम्मिलित हुए। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा, श्राइन बोर्ड के सीईओ सहित कई विद्वान पहुंचे।
पीठाध्यक्ष ने कहा कि शक्तिपीठ केवल धार्मिक आस्था केंद्र नहीं, भारतीय संस्कृति, राष्ट्र चेतना और सनातन ज्ञान परंपरा के जीवंत स्तंभ हैं। मां भगवती संपूर्ण सृष्टि की मूल शक्ति हैं तथा शक्तिपीठ उसी आदिशक्ति के जागृत केंद्र हैं। श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक सोच, जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त होती है। शक्ति तत्त्व एवं महत्व, रोजगार सृजन, पर्यावरण सृजन, सांस्कृतिक सृजन तथा योग एवं निरोग सृजन इत्यादि विषयों पर विचार रखे। बोले कि शक्तिपीठ धार्मिकता के माध्यम से लोगों को उत्तम रोजगार उपलब्ध करा स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाते हैं, समाज के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं। श्रीदेवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ कुरुक्षेत्र की सहभागिता ने प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से दर्शाया।
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नवरात्र, मेले, भंडारे, संकीर्तन, उत्सवों में होता सांस्कृतिक विरासत सशक्त बनाने का कार्य
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पीठाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय मंदिर परंपरा सदैव पर्यावरण संरक्षण की संवाहक रही है। मंदिरों में पीपल, वट, आम सहित अनेक पवित्र वृक्षों का संरक्षण प्रकृति और संस्कृति के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। नवरात्र, मेले, भंडारे, संकीर्तन, धार्मिक उत्सव सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं।
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शक्तिपीठ परिसर में बन रहे 51 फुट ऊंचे शब्दाक्षर मां महागौरव स्थल की दी जानकारी
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उन्होंने शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप भद्रकाली मंदिर कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व पर बताया कि महाभारत काल से जुड़ा यह शक्तिपीठ सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। कुरुक्षेत्र तीर्थ की महत्ता भी सुनाई। शक्तिपीठ परिसर में बन रहे 51 फुट ऊंचे शब्दाक्षर मां महागौरव स्थल की जानकारी साझा की। विशिष्ट अतिथियों एवं विद्वानों को कुरुक्षेत्र दर्शन का निमंत्रण दिया।
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राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन अकादमिक सत्र में हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ कुरुक्षेत्र के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने शक्तिपीठ एवं राष्ट्रीय विरासत विषय पर अपना शोधपत्र एवं प्रेरणादायी व्याख्यान प्रस्तुत किया। शक्तिपीठ के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के तौर पर पीठाध्यक्ष के साथ सेवक मंडल उपाध्यक्ष डॉ. एमके मौद्गिल एवं संयोजक सुनील वर्मा सम्मिलित हुए। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा, श्राइन बोर्ड के सीईओ सहित कई विद्वान पहुंचे।
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पीठाध्यक्ष ने कहा कि शक्तिपीठ केवल धार्मिक आस्था केंद्र नहीं, भारतीय संस्कृति, राष्ट्र चेतना और सनातन ज्ञान परंपरा के जीवंत स्तंभ हैं। मां भगवती संपूर्ण सृष्टि की मूल शक्ति हैं तथा शक्तिपीठ उसी आदिशक्ति के जागृत केंद्र हैं। श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक सोच, जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त होती है। शक्ति तत्त्व एवं महत्व, रोजगार सृजन, पर्यावरण सृजन, सांस्कृतिक सृजन तथा योग एवं निरोग सृजन इत्यादि विषयों पर विचार रखे। बोले कि शक्तिपीठ धार्मिकता के माध्यम से लोगों को उत्तम रोजगार उपलब्ध करा स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाते हैं, समाज के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं। श्रीदेवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ कुरुक्षेत्र की सहभागिता ने प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से दर्शाया।
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नवरात्र, मेले, भंडारे, संकीर्तन, उत्सवों में होता सांस्कृतिक विरासत सशक्त बनाने का कार्य
पीठाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय मंदिर परंपरा सदैव पर्यावरण संरक्षण की संवाहक रही है। मंदिरों में पीपल, वट, आम सहित अनेक पवित्र वृक्षों का संरक्षण प्रकृति और संस्कृति के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। नवरात्र, मेले, भंडारे, संकीर्तन, धार्मिक उत्सव सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं।
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शक्तिपीठ परिसर में बन रहे 51 फुट ऊंचे शब्दाक्षर मां महागौरव स्थल की दी जानकारी
उन्होंने शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप भद्रकाली मंदिर कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व पर बताया कि महाभारत काल से जुड़ा यह शक्तिपीठ सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। कुरुक्षेत्र तीर्थ की महत्ता भी सुनाई। शक्तिपीठ परिसर में बन रहे 51 फुट ऊंचे शब्दाक्षर मां महागौरव स्थल की जानकारी साझा की। विशिष्ट अतिथियों एवं विद्वानों को कुरुक्षेत्र दर्शन का निमंत्रण दिया।