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Kurukshetra News: टेम्पो ट्रैवलर मालिक ने किया फर्जी क्लेम लेने का प्रयास
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कुरुक्षेत्र। जिले में एक टेम्पो ट्रैवलर मालिक ने सड़क दुर्घटना के मामले में बीमा कंपनी के साथ फ्रॉड करने की कोशिश की। आरोपी ने फर्जी बीमा पॉलिसी बनाकर कोर्ट में पेश की और क्लेम का दावा किया लेकिन जांच में उसकी पोल खुल गई।
बीमा कंपनी की शिकायत के अनुसार घटना 7 मार्च 2021 को नेशनल हाईवे 44 के सर्विस रोड पर हुई थी। तेज रफ्तार टेम्पो ट्रैवलर ने पीछे से एक कार को टक्कर मार दी। इसमें कार चालक राजेंद्र कुमार को गंभीर चोटें आईं। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की।
जांच के दौरान पता चला कि टेम्पो ट्रैवलर के मालिक मनजिंद्र सिंह के पास उस समय कोई बीमा पॉलिसी नहीं थी। कोर्ट में मुकदमा पहुंचने पर मनजिंद्र सिंह ने 25 जून 2020 से 24 जून 2021 तक की झूठी पॉलिसी को वैध बताते हुए पेश कर दिया। बीमा कंपनी ने पॉलिसी की जांच की तो खुलासा हुआ कि यह पॉलिसी कभी जारी ही नहीं की गई और न ही इसके लिए कोई प्रीमियम लिया गया। कंपनी के रिकॉर्ड में इस पॉलिसी का कोई जिक्र नहीं मिला। आरोपी ने इसे खुद बनाकर पेश किया था।
जांच में आगे पता चला कि मनजिंद्र सिंह ने दूसरे ट्रैवलर की पॉलिसी को अपने केस में इस्तेमाल करने के लिए नंबर बदल दिया था। कोर्ट में पेश की गई पॉलिसी में ट्रैवलर का नंबर अलग था, जबकि प्राथमिकी, कोर्ट दस्तावेजों और अन्य कागजात में मूल नंबर दर्ज था। कोर्ट में फर्जी दस्तावेज पेश करने से आरोपी की चाल विफल हो गई और बीमा कंपनी के शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
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बीमा कंपनी की शिकायत के अनुसार घटना 7 मार्च 2021 को नेशनल हाईवे 44 के सर्विस रोड पर हुई थी। तेज रफ्तार टेम्पो ट्रैवलर ने पीछे से एक कार को टक्कर मार दी। इसमें कार चालक राजेंद्र कुमार को गंभीर चोटें आईं। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की।
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जांच के दौरान पता चला कि टेम्पो ट्रैवलर के मालिक मनजिंद्र सिंह के पास उस समय कोई बीमा पॉलिसी नहीं थी। कोर्ट में मुकदमा पहुंचने पर मनजिंद्र सिंह ने 25 जून 2020 से 24 जून 2021 तक की झूठी पॉलिसी को वैध बताते हुए पेश कर दिया। बीमा कंपनी ने पॉलिसी की जांच की तो खुलासा हुआ कि यह पॉलिसी कभी जारी ही नहीं की गई और न ही इसके लिए कोई प्रीमियम लिया गया। कंपनी के रिकॉर्ड में इस पॉलिसी का कोई जिक्र नहीं मिला। आरोपी ने इसे खुद बनाकर पेश किया था।
जांच में आगे पता चला कि मनजिंद्र सिंह ने दूसरे ट्रैवलर की पॉलिसी को अपने केस में इस्तेमाल करने के लिए नंबर बदल दिया था। कोर्ट में पेश की गई पॉलिसी में ट्रैवलर का नंबर अलग था, जबकि प्राथमिकी, कोर्ट दस्तावेजों और अन्य कागजात में मूल नंबर दर्ज था। कोर्ट में फर्जी दस्तावेज पेश करने से आरोपी की चाल विफल हो गई और बीमा कंपनी के शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई।