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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि के शोधार्थी ने टमाटर के पौधे में बदलाव कर उन्हें पौष्टिक बनाने पर किया शोध
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फोटो संख्या:56- हकेंवि शोधार्थी बादल महाकालकर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार के साथ-
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के शोधार्थी बादल महाकालकर को आईसी-एसआईएलएफईबी सम्मेलन (सस्टेनेबल इनोवेशन्स इन लाइफ साइंसेज, फूड, एनवायरनमेंट एंड बायोटेक्नोलॉजी) में बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। बादल महाकालकर ने सम्मेलन में टमाटर के पौधे को बेहतर बनाने से जुड़ा शोध प्रस्तुत किया।
यह सम्मेलन गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार में 12-13 मार्च को हुआ। बादल महाकालकर ने सम्मेलन में टमाटर की फसल को बेहतर बनाने से जुड़ा शोध प्रस्तुत किया।
शोध में वे जीनोम एडिटिंग नाम की आधुनिक और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। यह तकनीक पौधों में छोटे-छोटे बदलाव करके उन्हें ज्यादा पौष्टिक, मजबूत व बदलते मौसम के अनुकूल बनाने में मदद करती है।
बादल का शोध टमाटर की ऐसी किस्में विकसित करने पर केंद्रित है जो अधिक पोषण दे, लंबे समय तक सुरक्षित रहें और किसानों को बेहतर उत्पादन दे। बादल महाकालकर प्रो. रूपेश देशमुख और डॉ. हुमैरा सोनाह के मार्गदर्शन में पीएचडी कर रहे हैं। दोनों वैज्ञानिक इस शोध के सुपरवाइजर हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने बादल महाकालकर को बधाई देते हुए कहा कि बादल का शोध केवल हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे भारत के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है और यदि बादल इसी तरह शोध करते रहे तो भविष्य में एक बड़े वैज्ञानिक बन सकते हैं।
विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के शोधार्थी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं, जो संस्थान के लिए गर्व की बात है।
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यह सम्मेलन गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार में 12-13 मार्च को हुआ। बादल महाकालकर ने सम्मेलन में टमाटर की फसल को बेहतर बनाने से जुड़ा शोध प्रस्तुत किया।
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शोध में वे जीनोम एडिटिंग नाम की आधुनिक और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। यह तकनीक पौधों में छोटे-छोटे बदलाव करके उन्हें ज्यादा पौष्टिक, मजबूत व बदलते मौसम के अनुकूल बनाने में मदद करती है।
बादल का शोध टमाटर की ऐसी किस्में विकसित करने पर केंद्रित है जो अधिक पोषण दे, लंबे समय तक सुरक्षित रहें और किसानों को बेहतर उत्पादन दे। बादल महाकालकर प्रो. रूपेश देशमुख और डॉ. हुमैरा सोनाह के मार्गदर्शन में पीएचडी कर रहे हैं। दोनों वैज्ञानिक इस शोध के सुपरवाइजर हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने बादल महाकालकर को बधाई देते हुए कहा कि बादल का शोध केवल हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे भारत के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है और यदि बादल इसी तरह शोध करते रहे तो भविष्य में एक बड़े वैज्ञानिक बन सकते हैं।
विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के शोधार्थी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं, जो संस्थान के लिए गर्व की बात है।