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नारनौल में अवैध खनन घोटाला:विजिलेंस ने माइनिंग विभाग के क्लर्क को किया गिरफ्तार, 16 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल (हरियाणा)
Published by: Naveen
Updated Thu, 02 Apr 2026 12:30 PM IST
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सार
जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति की राशि को कम करने के लिए फर्जी शपथ पत्र और गलत कीमत के दस्तावेज लगाए गए। अधिकारियों ने बिना सत्यापन के इन दस्तावेजों को स्वीकार कर लिया, जिससे 4 लाख रुपये तक के जुर्माने को घटाकर 2 लाख या उससे भी कम कर दिया गया।
जांच करते अधिकारी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
अवैध खनन से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में विजिलेंस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नारनौल में माइनिंग विभाग के क्लर्क चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले करीब दस दिन पूर्व सहायक खनन अधिकारी को पंचकूला से पकड़ा गया था। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच के बाद की गई है, जिसमें सरकारी राजस्व को लाखों रुपये की हानि पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं।
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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो रेवाड़ी और नारनौल की संयुक्त टीम इस मामले की जांच कर रही थी। जांच में खुलासा हुआ कि विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी वाहन मालिकों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाते थे और राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेशों की अनदेखी करते हुए कम जुर्माना वसूल कर वाहनों को छोड़ देते थे।
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जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति की राशि को कम करने के लिए फर्जी शपथ पत्र और गलत कीमत के दस्तावेज लगाए गए। अधिकारियों ने बिना सत्यापन के इन दस्तावेजों को स्वीकार कर लिया, जिससे 4 लाख रुपये तक के जुर्माने को घटाकर 2 लाख या उससे भी कम कर दिया गया। इस गड़बड़ी से सरकार को करीब 21 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
इस मामले में कुल 17 अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। विजिलेंस द्वारा धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि शेष आरोपियों की तलाश जारी है।