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Mahendragarh-Narnaul News: प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रेरित कर रहे ओमवीर
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 25 Mar 2026 11:43 PM IST
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फोटो 1किसान ओमवीर सिंह।
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मंडी अटेली। गांव खोड़ निवासी 75 वर्षीय किसान ओमवीर सिंह चार-पांच वर्षों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाकर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। वे जैविक खेती के लिए अन्य किसानों को प्रेरित करते हैं। वह खुद खाद और कीटनाशक तैयार करते हैं।
कई बार सम्मानित हो चुके प्रगतिशील किसान ओमवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने जींद में तीन दिन का प्रशिक्षण लेकर प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने मौसमी, नींबू व अमरूद के पौधे लगाए और अब सब्जियों की खेती भी जैविक तरीके से कर रहे हैं। वर्तमान में वे आलू, गोभी, टिंडा और घीया की खेती कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जीवामृत तैयार करने के लिए 200 लीटर पानी, गुड़, गौमूत्र, गोबर और बेसन का मिश्रण बनाकर 21 दिनों तक तैयार किया जाता है। इसके अलावा नीम, धतूरा और आकड़ें के पत्तों से कीटनाशक दवाई बनाई जाती है, जबकि फंगस नियंत्रण के लिए चावल और गुड़ का उपयोग किया जाता है।
किसान का कहना है कि प्राकृतिक खेती रासायनिक खेती की तुलना में सस्ती और स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। उनके प्रयासों को देखते हुए प्रशासन द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
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कई बार सम्मानित हो चुके प्रगतिशील किसान ओमवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने जींद में तीन दिन का प्रशिक्षण लेकर प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने मौसमी, नींबू व अमरूद के पौधे लगाए और अब सब्जियों की खेती भी जैविक तरीके से कर रहे हैं। वर्तमान में वे आलू, गोभी, टिंडा और घीया की खेती कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि जीवामृत तैयार करने के लिए 200 लीटर पानी, गुड़, गौमूत्र, गोबर और बेसन का मिश्रण बनाकर 21 दिनों तक तैयार किया जाता है। इसके अलावा नीम, धतूरा और आकड़ें के पत्तों से कीटनाशक दवाई बनाई जाती है, जबकि फंगस नियंत्रण के लिए चावल और गुड़ का उपयोग किया जाता है।
किसान का कहना है कि प्राकृतिक खेती रासायनिक खेती की तुलना में सस्ती और स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। उनके प्रयासों को देखते हुए प्रशासन द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।