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Mahendragarh-Narnaul News: श्रद्धालुओं को सुनाई श्रीराम जन्म की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 25 Mar 2026 11:31 PM IST
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फोटो संख्या:84- मोहल्ला जवाहर नगर में आयोजित कथा के दौरान कथा सुनती महिलाएं--स्रोत- आयोजक
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महेंद्रगढ़। मोहल्ला जवाहर नगर में स्थित दुर्गा माता मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं को श्रीराम जन्म की कथा सुनाई गई।
कथा वाचक पंडित हेमराज भारद्वाज ने कहा कि जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म होने वाला था, तब समस्त अयोध्या नगरी में शुभ शकुन होने लगे। भगवान राम का जन्म होने पर अयोध्या नगरी में खुशी का माहौल हो गया। चारों ओर मंगल गान होने लगे।
उन्होंने कहा कि भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति ईश्वर की सत्ता को मानने से भले ही इंकार कर दे, लेकिन एक न एक दिन उसे ईश्वर की महत्ता को स्वीकार करना ही पड़ता है।
संसार में जितने भी असुर उत्पन्न हुए सभी ने ईश्वर के अस्तित्व को नकार दिया और स्वयं भगवान बनने का ढोंग करने लगे, लेकिन जब ईश्वर ने अपनी सत्ता की एक झलक दिखाई तो सभी का अस्तित्व धरा से ही समाप्त हो गया। अधर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो लेकिन धर्म के मार्ग पर चलने वाले के आगे अधिक समय तक नहीं टिक सकता।
उन्होंने कहा मां काली को पशुबलि या किसी जीव की हत्या स्वीकार नहीं है। इसे एक गलत परंपरा और अज्ञानता से उपजी प्रथा माना गया है। कथा का समापन 27 मार्च को किया जाएगा। समापन के अवसर पर सुबह श्रद्धालुओं की ओर से हवन व प्रसाद वितरित किया जाएगा। इस मौके पर अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथा वाचक पंडित हेमराज भारद्वाज ने कहा कि जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म होने वाला था, तब समस्त अयोध्या नगरी में शुभ शकुन होने लगे। भगवान राम का जन्म होने पर अयोध्या नगरी में खुशी का माहौल हो गया। चारों ओर मंगल गान होने लगे।
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उन्होंने कहा कि भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति ईश्वर की सत्ता को मानने से भले ही इंकार कर दे, लेकिन एक न एक दिन उसे ईश्वर की महत्ता को स्वीकार करना ही पड़ता है।
संसार में जितने भी असुर उत्पन्न हुए सभी ने ईश्वर के अस्तित्व को नकार दिया और स्वयं भगवान बनने का ढोंग करने लगे, लेकिन जब ईश्वर ने अपनी सत्ता की एक झलक दिखाई तो सभी का अस्तित्व धरा से ही समाप्त हो गया। अधर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो लेकिन धर्म के मार्ग पर चलने वाले के आगे अधिक समय तक नहीं टिक सकता।
उन्होंने कहा मां काली को पशुबलि या किसी जीव की हत्या स्वीकार नहीं है। इसे एक गलत परंपरा और अज्ञानता से उपजी प्रथा माना गया है। कथा का समापन 27 मार्च को किया जाएगा। समापन के अवसर पर सुबह श्रद्धालुओं की ओर से हवन व प्रसाद वितरित किया जाएगा। इस मौके पर अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।