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Mahendragarh-Narnaul News: महिलाओं ने किया गणगौर का विसर्जन
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 21 Mar 2026 11:37 PM IST
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फोटो नंबर-15गणगौर का विसर्जन करने के लिए जाती महिलाएं। संवाद
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नारनौल। क्षेत्र में गत सोलह दिनों तक चला गणगौर पूजन का कार्यक्रम शनिवार को विसर्जन के साथ संपन्न हो गया है। इसमें प्रमुख रूप से स्थानीय मोहल्ला फलसा स्थित ख्वाजा वाले कुएं पर गणगौर विसर्जन की विशेष रौनक रही।
फाल्गुन मास में गणगौर पूजन का कार्यक्रम शुरू होकर लगातार 16 दिनों तक चलता है। गणगौर और ईशर को मिठाई, हलवा-पूरी खिलाकर व पानी पिलाकर विसर्जन किया जाता है। राजस्थान में यह त्योहार विशेष रूप से मनाया जाता है।
इसलिए राजस्थान की सीमा से लगे होने के कारण नारनौल व आसपास के क्षेत्र में भी गणगौर पूजन की प्रथा का प्रचलन है। गणगौर व ईशर को पार्वती व भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है।
इसी कारण नई सुहागिनें अपने सुखमय जीवन के लिए व कुंवारी लड़कियां अच्छे वर के लिए गणगौर का पूजन मिलकर करती हैं। शास्त्रों के अनुसार मां पार्वती ने भी अखंड सौभाग्य की कामना से कठोर तपस्या की थी और उसी तप के प्रताप से भगवान शिव को पाया।इस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को व पार्वती ने समस्त स्त्री जाति को सौभाग्य का वरदान दिया था। इसके चलते महिलाओं ने बर्तन में जल लेकर और हरी दूब व फल सजाकर
गणगौर के गीत पर नाचते गाते विसर्जन करने वाले स्थान तक पहुंची। इसके बाद शिव-गौरी को सुंदर वस्त्र पहनाकर सिंदूर, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, दूब व पुष्प से उनकी पूजा-अर्चना की। क्षेत्र में 16 दिनों तक चले गणगौर कार्यक्रम का विसर्जन किया गया। विसर्जन के बाद महिलाओं ने एक दूसरे को बधाई भी दी।
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फाल्गुन मास में गणगौर पूजन का कार्यक्रम शुरू होकर लगातार 16 दिनों तक चलता है। गणगौर और ईशर को मिठाई, हलवा-पूरी खिलाकर व पानी पिलाकर विसर्जन किया जाता है। राजस्थान में यह त्योहार विशेष रूप से मनाया जाता है।
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इसलिए राजस्थान की सीमा से लगे होने के कारण नारनौल व आसपास के क्षेत्र में भी गणगौर पूजन की प्रथा का प्रचलन है। गणगौर व ईशर को पार्वती व भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है।
इसी कारण नई सुहागिनें अपने सुखमय जीवन के लिए व कुंवारी लड़कियां अच्छे वर के लिए गणगौर का पूजन मिलकर करती हैं। शास्त्रों के अनुसार मां पार्वती ने भी अखंड सौभाग्य की कामना से कठोर तपस्या की थी और उसी तप के प्रताप से भगवान शिव को पाया।इस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को व पार्वती ने समस्त स्त्री जाति को सौभाग्य का वरदान दिया था। इसके चलते महिलाओं ने बर्तन में जल लेकर और हरी दूब व फल सजाकर
गणगौर के गीत पर नाचते गाते विसर्जन करने वाले स्थान तक पहुंची। इसके बाद शिव-गौरी को सुंदर वस्त्र पहनाकर सिंदूर, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, दूब व पुष्प से उनकी पूजा-अर्चना की। क्षेत्र में 16 दिनों तक चले गणगौर कार्यक्रम का विसर्जन किया गया। विसर्जन के बाद महिलाओं ने एक दूसरे को बधाई भी दी।