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Panchkula News: डॉ. नीरू मित्तल के साहित्य पर होगा पीएचडी शोध
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बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय ने शोध विषय को दी मंजूरी, साहित्य में सामाजिक सरोकारों और विसंगतियों का होगा अध्ययन
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं समाजसेवी डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ के साहित्यिक योगदान पर अब विश्वविद्यालय स्तर पर शोध होगा। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, अस्थल बोहर (रोहतक) के हिंदी विभाग की डॉक्टोरल रिसर्च कमेटी (डीआरसी) ने उनके साहित्य पर पीएचडी शोध विषय को मंजूरी प्रदान कर दी है। शोध के माध्यम से उनके साहित्य में चित्रित सामाजिक विसंगतियों और विभिन्न सरोकारों का अकादमिक अध्ययन किया जाएगा।
शोधार्थी प्रीति ‘डॉ. नीरू के साहित्य में चित्रित विसंगतियां’ विषय पर शोध करेंगी। यह शोध कार्य हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमन के निर्देशन में होगा। डीआरसी की अनुशंसा और कुलपति की स्वीकृति के बाद शोध विषय को औपचारिक मंजूरी दी गई है।
शोध के दौरान डॉ. नीरू मित्तल के साहित्य में सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक चेतना, नारी विमर्श, मानवीय मूल्य और समकालीन जीवन की विसंगतियों का गहन अध्ययन किया जाएगा। हिंदी विभागाध्यक्ष एवं प्रख्यात विद्वान प्रो. डॉ. बाबूराम ने उन्हें शोध स्वीकृति पत्र प्रदान कर बधाई दी। उन्होंने डॉ. नीरू की पुस्तकों के विभिन्न भाषाओं में हुए अनुवाद को उनकी साहित्यिक उपलब्धि बताया।
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प्रज्ञा साहित्यिक मंच, हरियाणा के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. मधुकांत ने कहा कि डॉ. नीरू मित्तल ने साहित्य की अनेक विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है और अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इस अवसर पर लघुकथाकार डॉ. अंजना रानी गर्ग, वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज तथा भंडारी अदबी ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक भंडारी भी उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि डॉ. नीरू मित्तल की अब तक विभिन्न विधाओं में 14 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाओं का मराठी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में अनुवाद भी किया गया है। 60 से अधिक साझा संकलनों में उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि साहित्य के क्षेत्र में उन्हें देश-विदेश में 50 से अधिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वर्तमान में वह कला एवं साहित्य मंच की अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय साहित्य परिषद की पंचकूला इकाई की उपाध्यक्ष हैं।
साहित्यकारों का मानना है कि उनके साहित्य पर होने वाला यह शोध हिंदी साहित्य के गंभीर अध्ययन और शोध परंपरा को नई दिशा प्रदान करेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं समाजसेवी डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ के साहित्यिक योगदान पर अब विश्वविद्यालय स्तर पर शोध होगा। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, अस्थल बोहर (रोहतक) के हिंदी विभाग की डॉक्टोरल रिसर्च कमेटी (डीआरसी) ने उनके साहित्य पर पीएचडी शोध विषय को मंजूरी प्रदान कर दी है। शोध के माध्यम से उनके साहित्य में चित्रित सामाजिक विसंगतियों और विभिन्न सरोकारों का अकादमिक अध्ययन किया जाएगा।
शोधार्थी प्रीति ‘डॉ. नीरू के साहित्य में चित्रित विसंगतियां’ विषय पर शोध करेंगी। यह शोध कार्य हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमन के निर्देशन में होगा। डीआरसी की अनुशंसा और कुलपति की स्वीकृति के बाद शोध विषय को औपचारिक मंजूरी दी गई है।
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शोध के दौरान डॉ. नीरू मित्तल के साहित्य में सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक चेतना, नारी विमर्श, मानवीय मूल्य और समकालीन जीवन की विसंगतियों का गहन अध्ययन किया जाएगा। हिंदी विभागाध्यक्ष एवं प्रख्यात विद्वान प्रो. डॉ. बाबूराम ने उन्हें शोध स्वीकृति पत्र प्रदान कर बधाई दी। उन्होंने डॉ. नीरू की पुस्तकों के विभिन्न भाषाओं में हुए अनुवाद को उनकी साहित्यिक उपलब्धि बताया।
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प्रज्ञा साहित्यिक मंच, हरियाणा के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. मधुकांत ने कहा कि डॉ. नीरू मित्तल ने साहित्य की अनेक विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है और अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इस अवसर पर लघुकथाकार डॉ. अंजना रानी गर्ग, वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज तथा भंडारी अदबी ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक भंडारी भी उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि डॉ. नीरू मित्तल की अब तक विभिन्न विधाओं में 14 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाओं का मराठी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में अनुवाद भी किया गया है। 60 से अधिक साझा संकलनों में उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि साहित्य के क्षेत्र में उन्हें देश-विदेश में 50 से अधिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वर्तमान में वह कला एवं साहित्य मंच की अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय साहित्य परिषद की पंचकूला इकाई की उपाध्यक्ष हैं।
साहित्यकारों का मानना है कि उनके साहित्य पर होने वाला यह शोध हिंदी साहित्य के गंभीर अध्ययन और शोध परंपरा को नई दिशा प्रदान करेगा।