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लंबित जांच के नाम ओल्ड एज अलाउंस और ट्रैवल कंसेशन रोकना गलत: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रिटायर कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसके तहत लंबित विभागीय या न्यायिक मामलों वाले पेंशनरों को ओल्ड एज अलाउंस और ट्रैवल कंसेशन देने से रोका गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना किसी वैधानिक प्रावधान के ऐसे लाभ रोके नहीं जा सकते।
याचिका पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के रिटायर कर्मचारियों ने दायर की थी। सरकार ने जिन कर्मचारियों के खिलाफ जांच लंबित थी 22 दिसंबर 2022 के आदेश के जरिये उनके ओल्ड एज अलाउंस व ट्रैवल कंसेशन रोक दिए थे। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि प्रशासनिक आदेश कानून का स्थान नहीं ले सकते। ओल्ड एज अलाउंस पेंशन का हिस्सा है, इसे रोका नहीं जा सकता।
पंजाब सिविल सर्विस नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। बिना कानून के रिटायर लाभ रोकना संविधान के अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन है।सरकार ने कहा कि याची कर्मचारियों पर राज्य के नियम लागू होते हैं लेकिन कोर्ट ने माना कि आदेश केवल प्रशासनिक निर्देश था और नियमों में कोई संशोधन नहीं किया गया था।
हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर 2022 का आदेश रद्द करते हुए सभी बकाया लाभ 6 सप्ताह में जारी करने के निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला सभी समान स्थिति वाले कर्मचारियों पर लागू होगा, चाहे उन्होंने कोर्ट में याचिका लगाई हो या नहीं। अदालत ने दोहराया कि पेंशन केवल सुविधा नहीं, बल्कि सांविधानिक अधिकार है। जांच लंबित होने पर भी कर्मचारी को 100 प्रतिशत पेंशन मिलनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सरकार के पास विकल्प मौजूद हैं जिनमें ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट रोकना शामिल है।
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याचिका पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के रिटायर कर्मचारियों ने दायर की थी। सरकार ने जिन कर्मचारियों के खिलाफ जांच लंबित थी 22 दिसंबर 2022 के आदेश के जरिये उनके ओल्ड एज अलाउंस व ट्रैवल कंसेशन रोक दिए थे। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि प्रशासनिक आदेश कानून का स्थान नहीं ले सकते। ओल्ड एज अलाउंस पेंशन का हिस्सा है, इसे रोका नहीं जा सकता।
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पंजाब सिविल सर्विस नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। बिना कानून के रिटायर लाभ रोकना संविधान के अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन है।सरकार ने कहा कि याची कर्मचारियों पर राज्य के नियम लागू होते हैं लेकिन कोर्ट ने माना कि आदेश केवल प्रशासनिक निर्देश था और नियमों में कोई संशोधन नहीं किया गया था।
हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर 2022 का आदेश रद्द करते हुए सभी बकाया लाभ 6 सप्ताह में जारी करने के निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला सभी समान स्थिति वाले कर्मचारियों पर लागू होगा, चाहे उन्होंने कोर्ट में याचिका लगाई हो या नहीं। अदालत ने दोहराया कि पेंशन केवल सुविधा नहीं, बल्कि सांविधानिक अधिकार है। जांच लंबित होने पर भी कर्मचारी को 100 प्रतिशत पेंशन मिलनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सरकार के पास विकल्प मौजूद हैं जिनमें ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट रोकना शामिल है।