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Panipat News: कोचिंग सेंटरों को नोटिस देने तक सिमटी कार्रवाई
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। दिल्ली और लखनऊ कोचिंग सेंटर पर आग लगने के बाद जागा नगर निगम फिर से सुस्ता गया है। निगम प्रशासन ने आनन-फानन शहर के 115 कोचिंग सेंटरों, अस्पतालों और होटलों को नोटिस जारी किए थे। इनमें से चार कोचिंग सेंटरों और एक होटल को सील भी किया गया था।
28 जुलाई के बाद से नगर निगम की पूरी कार्रवाई महज कागजी नोटिस जारी करने तक ही सिमट कर रह गई है। शुरुआती दिखावे की कार्रवाई के बाद निगम अधिकारियों ने न तो किसी कोचिंग सेंटर की पुनः पड़ताल की और न ही यह जांचा कि दिए गए निर्देशों का पालन हुआ या नहीं। इसी लापरवाही का फायदा उठाते हुए कई कोचिंग सेंटर संचालकों ने सीलिंग व जांच से बचने के लिए पिछले या पिछले रास्तों का इस्तेमाल (चोर रास्ते) करना शुरू कर दिया है।
बेसमेंट में अब भी सैकड़ों बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर कोचिंग पढ़ने को मजबूर हैं। बिशनस्वरूप कॉलोनी के लोगों का झलका दर्द : स्थानीय निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि गर निगम की कार्रवाई केवल दो-चार दिन का दिखावा साबित हुई। 28 जुलाई के बाद अधिकारियों ने मुड़कर भी नहीं देखा।
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कॉलोनी में चलने वाले कोचिंग सेंटरों के बेसमेंट में अब भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में कोई भी हादसा हो सकता है। अमित शर्मा ने कहा कि कई संचालकों ने अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए पीछे से चोर रास्ते बना लिए हैं। मुख्य रास्तों पर अब भी अतिक्रमण और तंग जगह है। निगम को केवल नोटिस देकर खानापूर्ति करने के बजाय धरातल पर जाकर सख्त और स्थायी सीलिंगकी कार्रवाई करनी चाहिए।
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पानीपत। दिल्ली और लखनऊ कोचिंग सेंटर पर आग लगने के बाद जागा नगर निगम फिर से सुस्ता गया है। निगम प्रशासन ने आनन-फानन शहर के 115 कोचिंग सेंटरों, अस्पतालों और होटलों को नोटिस जारी किए थे। इनमें से चार कोचिंग सेंटरों और एक होटल को सील भी किया गया था।
28 जुलाई के बाद से नगर निगम की पूरी कार्रवाई महज कागजी नोटिस जारी करने तक ही सिमट कर रह गई है। शुरुआती दिखावे की कार्रवाई के बाद निगम अधिकारियों ने न तो किसी कोचिंग सेंटर की पुनः पड़ताल की और न ही यह जांचा कि दिए गए निर्देशों का पालन हुआ या नहीं। इसी लापरवाही का फायदा उठाते हुए कई कोचिंग सेंटर संचालकों ने सीलिंग व जांच से बचने के लिए पिछले या पिछले रास्तों का इस्तेमाल (चोर रास्ते) करना शुरू कर दिया है।
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बेसमेंट में अब भी सैकड़ों बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर कोचिंग पढ़ने को मजबूर हैं। बिशनस्वरूप कॉलोनी के लोगों का झलका दर्द : स्थानीय निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि गर निगम की कार्रवाई केवल दो-चार दिन का दिखावा साबित हुई। 28 जुलाई के बाद अधिकारियों ने मुड़कर भी नहीं देखा।
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कॉलोनी में चलने वाले कोचिंग सेंटरों के बेसमेंट में अब भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में कोई भी हादसा हो सकता है। अमित शर्मा ने कहा कि कई संचालकों ने अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए पीछे से चोर रास्ते बना लिए हैं। मुख्य रास्तों पर अब भी अतिक्रमण और तंग जगह है। निगम को केवल नोटिस देकर खानापूर्ति करने के बजाय धरातल पर जाकर सख्त और स्थायी सीलिंगकी कार्रवाई करनी चाहिए।