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Panipat News: जैन मुनियों ने दिया सादगी का संदेश
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। चातुर्मास में बुधवार को शहर समेत पांच स्थानों पर जैन मुनियों के दिव्य प्रवचनों का आयोजन किया गया। विभिन्न जैन स्थानकों और सभाओं में आए श्रद्धालुओं को जैन संतों ने मानव जीवन में धर्म, सादगी, संयम और आत्म-चिंतन के महत्व पर प्रकाश डाला।
संतों ने बताया कि चातुर्मास आत्म-शुद्धि और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर होने का सर्वोत्तम अवसर है। राजाखेड़ी में आयोजित चातुर्मास के दौरान साध्वी रमण गुरनीजी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का समय सांसारिक भागदौड़ से हटकर प्रभु भक्ति और साधना में मन लगाने का होता है।
मनुष्य को अपने भीतर छिपे विकारों को दूर कर सत्य, अहिंसा और करुणा के मार्ग पर चलना चाहिए। जब तक इंसान आत्म-निरीक्षण नहीं करता, तब तक उसे सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति नहीं हो सकती। गांधी मंडी स्थित जैन स्थानक में डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज और राजेश मुनि महाराज ने अपने सारगर्भित प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अनमोल है और इसे केवल भौतिक साधनों को जुटाने में व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए। इंसान को अपने विचारों और आचरण में शुद्धता लानी चाहिए। दूसरों के प्रति दया और सेवा भाव रखना ही सच्चा धर्म है।
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पानीपत। चातुर्मास में बुधवार को शहर समेत पांच स्थानों पर जैन मुनियों के दिव्य प्रवचनों का आयोजन किया गया। विभिन्न जैन स्थानकों और सभाओं में आए श्रद्धालुओं को जैन संतों ने मानव जीवन में धर्म, सादगी, संयम और आत्म-चिंतन के महत्व पर प्रकाश डाला।
संतों ने बताया कि चातुर्मास आत्म-शुद्धि और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर होने का सर्वोत्तम अवसर है। राजाखेड़ी में आयोजित चातुर्मास के दौरान साध्वी रमण गुरनीजी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का समय सांसारिक भागदौड़ से हटकर प्रभु भक्ति और साधना में मन लगाने का होता है।
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मनुष्य को अपने भीतर छिपे विकारों को दूर कर सत्य, अहिंसा और करुणा के मार्ग पर चलना चाहिए। जब तक इंसान आत्म-निरीक्षण नहीं करता, तब तक उसे सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति नहीं हो सकती। गांधी मंडी स्थित जैन स्थानक में डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज और राजेश मुनि महाराज ने अपने सारगर्भित प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अनमोल है और इसे केवल भौतिक साधनों को जुटाने में व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए। इंसान को अपने विचारों और आचरण में शुद्धता लानी चाहिए। दूसरों के प्रति दया और सेवा भाव रखना ही सच्चा धर्म है।
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