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चातुर्मास आत्मचिंतन और आत्मसुधार का पर्व : रमण मुनि

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 02:45 AM IST
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Chaturmas is a festival of self-reflection and self-improvement: Raman MuniChaturmas is a festival of self-reflection and self-improvement: Raman Muni
चातुर्मास में प्रवचन सुनते साधक। स्रोत : सभा - फोटो : Archive
संवाद न्यूज एजेंसी
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पानीपत। चातुर्मास के छठे दिन सोमवार को जिले के विभिन्न जैन स्थानकों में आयोजित प्रवचनों में जैन मुनियों ने आत्मचिंतन, आत्मसुधार और नैतिक जीवन का संदेश दिया।
उन्होंने श्रद्धालुओं से नशे और मोबाइल की लत से दूर रहकर संयमित एवं सदाचारपूर्ण जीवन अपनाने का आह्वान किया। अग्रवाल मंडी, गांधी मंडी, राजाखेड़ी, समालखा और मतलौडा सहित विभिन्न स्थानों पर प्रतिदिन सुबह आठ से नौ बजे तक प्रवचन हो रहे हैं।
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अहंकार छोड़कर अपनाएं सरल जीवन : जैन स्थानक गांधी मंडी में डॉ. राजेंद्र मुनि और राजेश मुनि ने अहंकार त्यागने, नशे से दूर रहने और सरल जीवन अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अहंकार विवेक को कमजोर करता है, जबकि संयमित जीवन सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है। जीवदया को धर्म का मूल आधार बताते हुए सभी जीवों के प्रति करुणा रखने की सीख दी।
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धर्म आचरण में दिखना चाहिए : मनोज मुनि : एसएम जैन सभा, अग्रवाल मंडी में मनोज मुनि, विशाल मुनि, पवित्र मुनि, नरेंद्र मुनि और आनंद मुनि ने प्रवचन दिए। मनोज मुनि महाराज ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर व्यवहार, आचरण और विचारों में भी दिखाई देना चाहिए। चातुर्मास आत्मा की ओर लौटने और मोक्ष मार्ग का बोध कराने का अवसर है।
एसएस जैन सभा, राजाखेड़ी में रमण मुनि महाराज ने कहा कि चातुर्मास के चार महीने आत्मचिंतन और आत्मसुधार के लिए सबसे उपयुक्त हैं। प्रभु भक्ति से व्यक्ति अपने व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि सफलता का मार्ग आत्मसुधार से होकर गुजरता है और इसकी शुरुआत स्वयं को बदलने से होती है।


चातुर्मास का उद्देश्य धर्म चेतना जागृत करना
मतलौडा। जैन स्थानक में चल रहे चातुर्मास के दौरान जैन मुनि नरेंद्र महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और सदाचार का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र के लोगों के पुण्य प्रबल होने पर ही वहां वर्षाकालीन चातुर्मास का पावन संयोग बनता है। धर्म ही इहलोक और परलोक का सच्चा साथी है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म चेतना जागृत करना, सदाचार का प्रचार करना और धर्मरूपी धन का संचय कराना है। प्रवचन के अंत में श्रद्धालुओं से धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया। संवाद
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