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Panipat News: यश की मां बोलीं- एशियाई खेलों में पदक की उम्मीद
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अपने परिवार के साथ यश घनघस। परिजन
- फोटो : Archive
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो प्रतियोगिता में जिले के खिलाड़ी यश घनघस पदक जीतने से भले ही चूक गए हों, लेकिन उनके संघर्ष, आत्मविश्वास और शानदार प्रदर्शन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के बीच यश ने हर मुकाबले में पूरी ताकत और जज्बे के साथ चुनौती पेश की।
प्रतियोगिता में कोई पदक भले उनके हाथ नहीं आया, लेकिन उनके प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि वह आने वाले समय में देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की क्षमता रखते हैं। अब परिवार की उम्मीदें आगामी एशियाई खेलों पर टिकी हैं।
यश घनघस मूल रूप से पानीपत जिले के बांध गांव के रहने वाले हैं, जबकि उनका परिवार पिछले कई वर्षों से विकास नगर में रह रहा है। उनके पिता आनंद कुमार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 58वीं बटालियन में टू-स्टार अधिकारी हैं और वर्तमान में मणिपुर में तैनात हैं। उनके छोटे भाई लक्ष्य बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार के सभी सदस्यों ने यश के खेल सफर में हमेशा उनका साथ दिया है।
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यश ने सातवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान जूडो खेलना शुरू किया था। शुरुआती प्रशिक्षण उन्होंने पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में लिया, जहां उनके खेल की मजबूत नींव तैयार हुई। इसके बाद बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्होंने खरखौदा में अभ्यास जारी रखा।
लगातार मेहनत, अनुशासन और बेहतरीन प्रदर्शन के चलते वर्ष 2018 में उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) में हुआ। यहां उन्हें राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण मिला। इसके बाद उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा साबित की।
चोट के बाद भी नहीं मानी हार
यश की मां बिमला देवी ने बताया कि उनके बेटे का खेल सफर आसान नहीं रहा। अभ्यास के दौरान एक बार यश के कंधे में गंभीर चोट लग गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें कुछ समय आराम करने की सलाह दी थी, जिससे प्रशिक्षण प्रभावित हुआ। हालांकि यश ने हार नहीं मानी और उपचार के बाद अभ्यास शुरू किया। उन्होंने पहले से अधिक मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ तैयारी जारी रखी।
बिमला देवी ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में यश ने हर मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया। वह पदक जीतने से जरूर चूक गए, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और क्षमता का पूरा परिचय दिया है। उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। उन्हें पूरा विश्वास है कि यश आगामी एशियाई खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर भारत के लिए पदक जीतेंगे और प्रदेश व देश का नाम रोशन करेंगे।
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पानीपत। राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो प्रतियोगिता में जिले के खिलाड़ी यश घनघस पदक जीतने से भले ही चूक गए हों, लेकिन उनके संघर्ष, आत्मविश्वास और शानदार प्रदर्शन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के बीच यश ने हर मुकाबले में पूरी ताकत और जज्बे के साथ चुनौती पेश की।
प्रतियोगिता में कोई पदक भले उनके हाथ नहीं आया, लेकिन उनके प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि वह आने वाले समय में देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की क्षमता रखते हैं। अब परिवार की उम्मीदें आगामी एशियाई खेलों पर टिकी हैं।
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यश घनघस मूल रूप से पानीपत जिले के बांध गांव के रहने वाले हैं, जबकि उनका परिवार पिछले कई वर्षों से विकास नगर में रह रहा है। उनके पिता आनंद कुमार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 58वीं बटालियन में टू-स्टार अधिकारी हैं और वर्तमान में मणिपुर में तैनात हैं। उनके छोटे भाई लक्ष्य बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार के सभी सदस्यों ने यश के खेल सफर में हमेशा उनका साथ दिया है।
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यश ने सातवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान जूडो खेलना शुरू किया था। शुरुआती प्रशिक्षण उन्होंने पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में लिया, जहां उनके खेल की मजबूत नींव तैयार हुई। इसके बाद बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्होंने खरखौदा में अभ्यास जारी रखा।
लगातार मेहनत, अनुशासन और बेहतरीन प्रदर्शन के चलते वर्ष 2018 में उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) में हुआ। यहां उन्हें राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण मिला। इसके बाद उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा साबित की।
चोट के बाद भी नहीं मानी हार
यश की मां बिमला देवी ने बताया कि उनके बेटे का खेल सफर आसान नहीं रहा। अभ्यास के दौरान एक बार यश के कंधे में गंभीर चोट लग गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें कुछ समय आराम करने की सलाह दी थी, जिससे प्रशिक्षण प्रभावित हुआ। हालांकि यश ने हार नहीं मानी और उपचार के बाद अभ्यास शुरू किया। उन्होंने पहले से अधिक मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ तैयारी जारी रखी।
बिमला देवी ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में यश ने हर मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया। वह पदक जीतने से जरूर चूक गए, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और क्षमता का पूरा परिचय दिया है। उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। उन्हें पूरा विश्वास है कि यश आगामी एशियाई खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर भारत के लिए पदक जीतेंगे और प्रदेश व देश का नाम रोशन करेंगे।