{"_id":"6a38582d38fb22aa2302169c","slug":"exchequer-defrauded-using-forged-seals-signatures-and-marriage-certificates-panipat-news-c-244-1-pnp1001-159330-2026-06-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: फर्जी मुहरों, हस्ताक्षरों और वैवाहिक प्रमाणपत्रों से खजाने में लगाई सेंध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: फर्जी मुहरों, हस्ताक्षरों और वैवाहिक प्रमाणपत्रों से खजाने में लगाई सेंध
विज्ञापन
आरोपी एनके सिंघल।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत में हरियाणा भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (एचबीओसीडब्ल्यूडब्ल्यूबी) से जुड़े करीब 10 करोड़ रुपये के बहुचर्चित श्रमिक कार्ड घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों ने संगठित तरीके से फर्जी मुहरों, नकली हस्ताक्षरों और फर्जी विवाह प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाया।
मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल तत्कालीन अनुबंधित सहायक कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंघल ने राज्य अपराध शाखा (स्टेट क्राइम ब्रांच) की एसआईटी के एक दिन के रिमांड के दौरान घोटाले से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में सह-आरोपी तत्कालीन सहायक निदेशक हरेंद्र मान समेत कई अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। इसके बाद एसआईटी की जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
राज्य अपराध शाखा ने नरेंद्र कुमार सिंघल को पानीपत के यमुना एन्क्लेव क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। एक दिन का पुलिस रिमांड पूरा होने के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। एसआईटी ने रिमांड के दौरान जुटाई गई जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की है।
विज्ञापन
अपात्र लोगों के बने श्रमिक कार्ड, योजनाओं की राशि में घोटाला
एसआईटी के डीएसपी नायब सिंह के अनुसार, आरोपी ने विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों के साथ मिलकर वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया। एक जनवरी से 31 मार्च 2020 के बीच सैकड़ों अपात्र लोगों के श्रमिक कार्ड बनाए गए। इनमें कई ऐसे लोग शामिल थे, जो वास्तव में निर्माण श्रमिक नहीं थे।
इन फर्जी श्रमिक कार्डों के आधार पर कन्यादान, विवाह सहायता, शिक्षा सहायता और मृत्यु सहायता सहित 22 विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर करोड़ों रुपये की सरकारी राशि हड़प ली गई। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने ग्राम सचिवों, पटवारियों, डॉक्टरों और ठेकेदारों के नाम की फर्जी मुहरें बनवाईं तथा स्कैन किए गए नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर दस्तावेज तैयार किए।
फर्जी कार्य पर्चियों के साथ-साथ विवाह, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र भी तैयार किए गए। जांच के दौरान मतलौडा नायब तहसीलदार कार्यालय के रिकॉर्ड से कई विवाह प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं।
दिल्ली में छिपाए दस्तावेज, लाखों रुपये की रिकवरी बाकी
पूछताछ के दौरान नरेंद्र कुमार सिंघल ने स्वीकार किया कि घोटाले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज दिल्ली के विकासपुरी क्षेत्र में छिपाकर रखे गए हैं। एसआईटी अब इन दस्तावेजों की बरामदगी की कार्रवाई करेगी।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में करीब 12.40 लाख रुपये की रिकवरी अभी बाकी है। इसके अलावा आरोपी के बेटे के कब्जे से एक सफेद रंग की वैगनआर कार भी बरामद की जानी है, जिसे जांच का हिस्सा माना जा रहा है।
यह है मामला
हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ था केस
इस मामले की शिकायत एडवोकेट सुभाष चंद्र ने की थी। श्रम विभाग की विशेष समितियों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद मामला गंभीर हुआ। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद थाना शहर पानीपत में धोखाधड़ी, गबन, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में मामले की जांच राज्य अपराध शाखा को सौंप दी गई।
पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत में हरियाणा भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (एचबीओसीडब्ल्यूडब्ल्यूबी) से जुड़े करीब 10 करोड़ रुपये के बहुचर्चित श्रमिक कार्ड घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों ने संगठित तरीके से फर्जी मुहरों, नकली हस्ताक्षरों और फर्जी विवाह प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाया।
मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल तत्कालीन अनुबंधित सहायक कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंघल ने राज्य अपराध शाखा (स्टेट क्राइम ब्रांच) की एसआईटी के एक दिन के रिमांड के दौरान घोटाले से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में सह-आरोपी तत्कालीन सहायक निदेशक हरेंद्र मान समेत कई अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। इसके बाद एसआईटी की जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्य अपराध शाखा ने नरेंद्र कुमार सिंघल को पानीपत के यमुना एन्क्लेव क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। एक दिन का पुलिस रिमांड पूरा होने के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। एसआईटी ने रिमांड के दौरान जुटाई गई जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की है।
अपात्र लोगों के बने श्रमिक कार्ड, योजनाओं की राशि में घोटाला
एसआईटी के डीएसपी नायब सिंह के अनुसार, आरोपी ने विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों के साथ मिलकर वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया। एक जनवरी से 31 मार्च 2020 के बीच सैकड़ों अपात्र लोगों के श्रमिक कार्ड बनाए गए। इनमें कई ऐसे लोग शामिल थे, जो वास्तव में निर्माण श्रमिक नहीं थे।
इन फर्जी श्रमिक कार्डों के आधार पर कन्यादान, विवाह सहायता, शिक्षा सहायता और मृत्यु सहायता सहित 22 विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर करोड़ों रुपये की सरकारी राशि हड़प ली गई। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने ग्राम सचिवों, पटवारियों, डॉक्टरों और ठेकेदारों के नाम की फर्जी मुहरें बनवाईं तथा स्कैन किए गए नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर दस्तावेज तैयार किए।
फर्जी कार्य पर्चियों के साथ-साथ विवाह, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र भी तैयार किए गए। जांच के दौरान मतलौडा नायब तहसीलदार कार्यालय के रिकॉर्ड से कई विवाह प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं।
दिल्ली में छिपाए दस्तावेज, लाखों रुपये की रिकवरी बाकी
पूछताछ के दौरान नरेंद्र कुमार सिंघल ने स्वीकार किया कि घोटाले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज दिल्ली के विकासपुरी क्षेत्र में छिपाकर रखे गए हैं। एसआईटी अब इन दस्तावेजों की बरामदगी की कार्रवाई करेगी।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में करीब 12.40 लाख रुपये की रिकवरी अभी बाकी है। इसके अलावा आरोपी के बेटे के कब्जे से एक सफेद रंग की वैगनआर कार भी बरामद की जानी है, जिसे जांच का हिस्सा माना जा रहा है।
यह है मामला
हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ था केस
इस मामले की शिकायत एडवोकेट सुभाष चंद्र ने की थी। श्रम विभाग की विशेष समितियों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद मामला गंभीर हुआ। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद थाना शहर पानीपत में धोखाधड़ी, गबन, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में मामले की जांच राज्य अपराध शाखा को सौंप दी गई।