{"_id":"6a861cb37697920820033cd1","slug":"folk-art-and-culture-depicted-in-murals-panipat-news-c-244-1-sknl1016-162632-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: भित्ति चित्रों में सजी लोक कला और संस्कृतिो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: भित्ति चित्रों में सजी लोक कला और संस्कृतिो
विज्ञापन
राजकीय वमा विद्यालय बड़ौली में भित्ति चित्रकारी करते विद्यार्थी। - संस्थान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली में कक्षा गतिविधि के तहत विद्यार्थियों को भित्ति चित्रण के माध्यम से भारतीय लोक कला और संस्कृति से परिचित कराया गया। कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों ने ललित कला कक्ष में सहभागिता कार्य पद्धति के माध्यम से वर्ली और मधुबनी लोक कला पर आधारित आकर्षक चित्र तैयार किए।
गतिविधि के आयोजक ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक ने बताया कि लोक कला किसी भी क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और लोक जीवन की पहचान होती है। इसके माध्यम से जीवनशैली, रीति-रिवाज, मान्यताओं और भावनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जाता है।
गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी लोक कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा। विद्यार्थियों ने विभिन्न समूहों में भारतीय लोक परंपराओं, ग्रामीण जीवन, मंदिर स्थापत्य, लोक नृत्य, विवाह और सांस्कृतिक विरासत को चित्रों के माध्यम से जीवंत किया। छात्राओं राधिका, सपना, शिल्पा और सपना ने भारतीय लोक परंपराओं को चित्रों में उकेरा।
विज्ञापन
वहीं राखी, कशिश और प्रीति ने ग्रामीण जीवन पर आधारित पेंटिंग तैयार की। वंशिका, लक्ष्मी, खुशी, संजना, पायल और मनीष ने मंदिर स्थापत्य और लोक नृत्य को चित्रित किया। खुशी, सोनिया, शिवानी और नेहा ने विवाह, लोक नृत्य और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।
विद्यालय इंचार्ज एवं हिंदी प्राध्यापक रविंद्र सिंह ने कहा कि लोक कला नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ कलाकारों को पहचान और रोजगार के अवसर भी प्रदान करती है। इससे देश की सांस्कृतिक विविधता समृद्ध होती है तथा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है।
विज्ञापन
पानीपत। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली में कक्षा गतिविधि के तहत विद्यार्थियों को भित्ति चित्रण के माध्यम से भारतीय लोक कला और संस्कृति से परिचित कराया गया। कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों ने ललित कला कक्ष में सहभागिता कार्य पद्धति के माध्यम से वर्ली और मधुबनी लोक कला पर आधारित आकर्षक चित्र तैयार किए।
गतिविधि के आयोजक ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक ने बताया कि लोक कला किसी भी क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और लोक जीवन की पहचान होती है। इसके माध्यम से जीवनशैली, रीति-रिवाज, मान्यताओं और भावनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जाता है।
विज्ञापन
गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी लोक कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा। विद्यार्थियों ने विभिन्न समूहों में भारतीय लोक परंपराओं, ग्रामीण जीवन, मंदिर स्थापत्य, लोक नृत्य, विवाह और सांस्कृतिक विरासत को चित्रों के माध्यम से जीवंत किया। छात्राओं राधिका, सपना, शिल्पा और सपना ने भारतीय लोक परंपराओं को चित्रों में उकेरा।
विज्ञापन
वहीं राखी, कशिश और प्रीति ने ग्रामीण जीवन पर आधारित पेंटिंग तैयार की। वंशिका, लक्ष्मी, खुशी, संजना, पायल और मनीष ने मंदिर स्थापत्य और लोक नृत्य को चित्रित किया। खुशी, सोनिया, शिवानी और नेहा ने विवाह, लोक नृत्य और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।
विद्यालय इंचार्ज एवं हिंदी प्राध्यापक रविंद्र सिंह ने कहा कि लोक कला नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ कलाकारों को पहचान और रोजगार के अवसर भी प्रदान करती है। इससे देश की सांस्कृतिक विविधता समृद्ध होती है तथा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है।