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Panipat News: निक्षय मित्र नहीं बन रहे माननीय, संस्थाओं का सहारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2026 03:06 AM IST
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Honorable people are not becoming Nishchay Mitra, support of institutions is required.
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पानीपत। औद्योगिक नगरी में टीबी लगातार बढ़ रही है। इस साल अब तक एक हजार मरीज सामने आ चुके हैं। पिछले साल करीब 5413 टीबी मरीज मिले थे। इनमें 819 बिगड़ी टीबी के मरीज शामिल हैं। माननीय के निक्षय मित्र भी नहीं बन रहे हैं। इसमें मरीजों को प्रत्येक महीने आहार किट देनी होती है। माननीय इसमें भी केवल आश्वासन तक ही सीमित हैं।
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मंगलवार को विश्व तपेदिक (टीबी) दिवस है। पानीपत के औद्योगिक शहर होने के चलते ग्रामीण अंचल में भी टीबी बढ़ रही है। इनमें पुरुष और महिलाओं के साथ बच्चे भी सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में मरीजाें के खाने-पीने में सहयोग के लिए निक्षय मित्र योजना है। इसका उद्देश्य भी टीबी से ग्रस्त व्यक्ति को पूरी डाइट देना है। विभागीय अधिकारी इसके लिए जनप्रतिनिधियों और नेताओं से संपर्क कर रही हैं। इसमें पार्षद से लेकर मेयर, विधायक और मंत्री तक मिल चुके हैं। इनको हर बार आश्वासन मिलता है लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि निक्षय मित्र नहीं बन रहा है। हाल ही में दिल्ली की जीव्या फाउंडेशन ने 231 मरीजों को गोद लिया है। संस्था ने उनको किट वितरित की है।
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56 ग्राम पंचायत जल्द टीबी मुक्त
जिले में 56 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुई हैं। इनको जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। पहले सम्मान समारोह जिला सचिवालय में विश्व टीबी दिवस पर मंगलवार को किया जाना था। अब इसे टाल दिया गया है। इनमें छह ग्राम पंचायत खलीला माजरा, कैथ, दीवाना, भैंसवाल, निजामपुर व मोहाली तीसरी बार सम्मानित की जाएंगी। दस ग्राम पंचायत ताहरपुर, पलड़ी, पूठर, अलुपूर, बेगमपुर, औसरी, न्यू बोहली, छजिया, नवादा-पार, रामड़ा-आर को दूसरी बार सम्मानित किया जाएगा। पहली बार 40 ग्राम पंचायत सम्मानित की जाएंगी।
किट में यह होता है
डॉ. लाभ सिंह ने बताया कि प्रत्येक मरीज को हर महीने किट दी जाती है। इसें दाल, सोयाबीन, पाउडर या कोई प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल होता है। इस डाइट के साथ दवा लेने पर टीबी जल्दी ठीक होती है।



वर्जन :

निक्षय मित्र बनाने के लिए लगातार जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया जा रहा है। उनको आश्वासन भी मिल रहा हैं। अब तक किसी को निक्षय मित्र नहीं बनाया जा सका है। मरीजों को संस्थाओं के सहयोग से किट दी जाती हैं। किट में पोषण युक्त खाद्य पदार्थ होते हैं।
डॉ. लाभ सिंह, नोडल अधिकारी टीबी उन्मूलन कार्यक्रम।
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