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Panipat News: गैस की कमी, केमिकल के बढ़ते रेट और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की छापेमारी से उद्योग चलाना मुश्किल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2026 03:46 AM IST
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Pollution Control Board raids make running industries difficult
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फोटो-37
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-औद्योगिक एसोसिएन की बैठक उद्यमियों ने लगातार की जा रही कार्रवाई पर जताया रोष
-उद्यमी बोले ओसीईएमएस डिवाइस पर डेटा भेजने के बाद भी कार्रवाई की जा रही
-सीपीसीबी की अधिकृत कंपनियों से ही उपकरण खरीदना चुनौतीपूर्ण बना
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। उद्यमी पश्चिमी एशिया में तनाव के बाद गैस की कमी और केमिकल के बढ़ते रेट के साथ सीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) और एचएसपीसीबी (हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की लगातार की जा रही कार्रवाई के विरोध में लामबंद हो गए हैं। शहर की औद्योगिक इकाइयों ने मंगलवार को बैठक कर इस समय लगातार की जा रही कार्रवाई को गलत ठहराया।
उद्यमियों ने साफ का कि वे ओसीईएमएस डिवाइस पर हर रोज डेटा भेजते हैं। इसमें उद्याेगों के प्रदूषण व अन्य विषयों की रिपोर्ट होती है। इसके बाद भी लगातार छापा मारा जा रहा है। बैठक निर्णय लिया कि वे एक बार फिर सभी विधायक और मंत्रियों से मिलकर अपनी समस्या रखेंगे। इनमें समाधान नहीं हुआ तो वे ठोस फैसले लेंगे।
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इंडस्ट्रियल एसोसिएशनों की एक महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार शाम को एक होटल में की गई। बैठक में हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेशाध्यक्ष विनोद खंडेलवाल, जिला प्रधान विनोद धमीजा, एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान ललित गोयल, पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा और हरियाणा एनवायरमेंटल मैनेजमेंट सोसाइटी के प्रदेशाध्यक्ष भीम राणा विशेष रूप से पहुंचे। उद्यमियों ने पश्चिमी एशिया में तनाव के बाद उद्योगों की स्थिति और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उद्यमियों ने कहा कि उद्योगों की प्रतिदिन जांच की जा रही है। गैस की कमी के चलते 300 से अधिक उद्योग बंद पड़े हैं। केमिकल के दाम लगातार बढ़ रही है।
सीपीसीबी द्वारा बार-बार की जा रही छापेमारी पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि जबकि ओसीईएमएस डिवाइस के माध्यम से डेटा सीधे सीपीसीबी और एचएसपीसीबी पंचकूला को भेजा जा रहा है। बावजूद इसके उद्योगों का बार-बार निरीक्षण और कार्रवाई की जा रही है। उद्यमियों पर अनावश्यक दबाव बनया जा रहा है। सीपीसीबी केवल अधिकृत कंपनियों से ही उपकरण (जैसे ओसीईएमएस, बैग फिल्टर, जनरेटर किट) खरीदने की अनिवार्यता भी उद्योगों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण बन रही है जबकि इनसे पुरानी और बड़ी कंपनियों के नाम नहीं हैं। उद्योग प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि डाइंग इंडस्ट्री के बिना निर्यात और घरेलू बाजार की जरूरत पूरी नहीं हो सकती। इस मौके पर ओल्ड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन से वीरभान सिंगला, अलीपुर एसोसिएशन से विनीत गुप्ता, सेक्टर 29 पार्ट-2 जनरल एसोसिएशन से विनीत शर्मा, मतलौडा जोन से पंकज बंसल, कुराड़ एसोसिएशन के प्रधान भारत बांगा, राजीव अग्रवाल, पुनीत जैन, अजय मलिक, शिव मल्होत्रा, राम प्रताप, राजपाल सहरावत, अंकुर गुप्ता व नरेंद्र नरूला मौजूद रहे।

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एसपीएम की नई शर्त को पूरा करना व्यावहारिक नहीं
उद्यमियों ने एसपीएम (सस्पेंड पार्टिकल मैटर) की सीमा को कम करने को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि पहले एसपीएम 800 था। इसे 80 कर दिया गया। उद्यमी इसे भी पूरा नहीं कर पा रहे थे। अब इसे घटाकर 50 कर दिया है। इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। वर्तमान परिस्थितियों में इसे लागू करना व्यावहारिक नहीं है।

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उद्यमियों ने बैठक में ये लिए फैसले
-प्रत्येक इंडस्ट्रियल जोन में कॉमन बॉयलर स्थापित किया जाए।
-लघु एवं अति लघु उद्योगों को कुछ मानकों में छूट दी जाए।
-पूरे देश में प्रदूषण के पैरामीटर (एयर एंड वाटर नॉर्म्स ) एक समान किए जाएं।
-पर्यावरण मानकों को कम से कम अगले पांच वर्षों के लिए स्थिर रखा जाए, ताकि उद्योग उन्हें प्रभावी रूप से लागू कर सकें।
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