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Panipat News: थर्मल पावर प्लांटों पर पर्यावरणीय मुआवजे के आदेश पर रोक बरकरार, एनजीटी ने छह अक्तूबर तक बढ़ाई अंतरिम राहत
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित पानीपत थर्मल पावर स्टेशन समेत छह ताप विद्युत संयंत्रों पर लगाए गए पर्यावरणीय मुआवजे के आदेश पर अंतरिम रोक को बरकरार रखा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने इन संयंत्रों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप में कुल करीब 61.85 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था। एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई छह अक्तूबर निर्धारित की है।
अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सुनवाई के दौरान पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की अपील पर भी विचार किया। पीठ को बताया गया कि सीएक्यूएम के एक अप्रैल के आदेश के खिलाफ पानीपत थर्मल पावर स्टेशन, दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट, राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट, तलवंडी साबो और हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन को पहले ही अंतरिम राहत मिल चुकी है।
पीएसपीसीएल की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि निगम ने पर्यावरणीय मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा करा दी है। इस पर एनजीटी ने समानता के सिद्धांत के आधार पर पीएसपीसीएल को भी शर्तों के साथ अंतरिम राहत प्रदान करते हुए आयोग के आदेश पर रोक जारी रखी।
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सीपीसीबी समेत अन्य पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान सीएक्यूएम ने सभी अपीलों में अपना जवाब दाखिल कर दिया। इसके बाद एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और अन्य प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। साथ ही अपीलकर्ता थर्मल पावर प्लांटों को प्रति-जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह की मोहलत प्रदान की गई है।
मामला
सीएक्यूएम ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह ताप विद्युत संयंत्रों पर कोयले के साथ धान के भूसे से बने बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट्स के अनिवार्य पांच प्रतिशत मिश्रण का उपयोग नहीं करने के आरोप में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था। इसके खिलाफ सभी संयंत्रों ने एनजीटी में अपील दायर की।
ट्रिब्यूनल ने पहले ही स्पष्ट किया था कि यदि संबंधित संयंत्र छह सप्ताह के भीतर मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा कर देंगे तो आयोग के आदेश पर अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी।
इन संयंत्रों पर लगाया गया था पर्यावरणीय मुआवजा
तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (वेदांता), मनसा (पंजाब) : लगभग 33.02 करोड़ रुपये
पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (एचपीजीसीएल) : लगभग 8.98 करोड़ रुपये
दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट (एचपीजीसीएल) : लगभग 6.69 करोड़ रुपये
राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट (एचपीजीसीएल) : लगभग 5.55 करोड़ रुपये
गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर प्लांट (पीएसपीसीएल) : लगभग 4.87 करोड़ रुपये
हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन (यूपीआरवीयूएनएल) : लगभग 2.74 करोड़ रुपये
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पानीपत। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित पानीपत थर्मल पावर स्टेशन समेत छह ताप विद्युत संयंत्रों पर लगाए गए पर्यावरणीय मुआवजे के आदेश पर अंतरिम रोक को बरकरार रखा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने इन संयंत्रों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप में कुल करीब 61.85 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था। एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई छह अक्तूबर निर्धारित की है।
अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सुनवाई के दौरान पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की अपील पर भी विचार किया। पीठ को बताया गया कि सीएक्यूएम के एक अप्रैल के आदेश के खिलाफ पानीपत थर्मल पावर स्टेशन, दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट, राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट, तलवंडी साबो और हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन को पहले ही अंतरिम राहत मिल चुकी है।
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पीएसपीसीएल की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि निगम ने पर्यावरणीय मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा करा दी है। इस पर एनजीटी ने समानता के सिद्धांत के आधार पर पीएसपीसीएल को भी शर्तों के साथ अंतरिम राहत प्रदान करते हुए आयोग के आदेश पर रोक जारी रखी।
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सीपीसीबी समेत अन्य पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान सीएक्यूएम ने सभी अपीलों में अपना जवाब दाखिल कर दिया। इसके बाद एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और अन्य प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। साथ ही अपीलकर्ता थर्मल पावर प्लांटों को प्रति-जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह की मोहलत प्रदान की गई है।
मामला
सीएक्यूएम ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह ताप विद्युत संयंत्रों पर कोयले के साथ धान के भूसे से बने बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट्स के अनिवार्य पांच प्रतिशत मिश्रण का उपयोग नहीं करने के आरोप में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था। इसके खिलाफ सभी संयंत्रों ने एनजीटी में अपील दायर की।
ट्रिब्यूनल ने पहले ही स्पष्ट किया था कि यदि संबंधित संयंत्र छह सप्ताह के भीतर मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा कर देंगे तो आयोग के आदेश पर अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी।
इन संयंत्रों पर लगाया गया था पर्यावरणीय मुआवजा
तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (वेदांता), मनसा (पंजाब) : लगभग 33.02 करोड़ रुपये
पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (एचपीजीसीएल) : लगभग 8.98 करोड़ रुपये
दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट (एचपीजीसीएल) : लगभग 6.69 करोड़ रुपये
राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट (एचपीजीसीएल) : लगभग 5.55 करोड़ रुपये
गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर प्लांट (पीएसपीसीएल) : लगभग 4.87 करोड़ रुपये
हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन (यूपीआरवीयूएनएल) : लगभग 2.74 करोड़ रुपये