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Panipat News: भुगतान विवाद से थमा उठान, दो दिन में 700 टन तक कचरा जमा
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माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। नगर निगम और डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का कार्य करने वाली एजेंसी जेबीएम के बीच भुगतान विवाद का खामियाजा एक बार फिर शहरवासियों को भुगतना पड़ा। निगम की ओर से करीब 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने के बाद जेबीएम ने स्थानीय ठेकेदार एजेंसी का भुगतान रोक दिया। इससे नाराज कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। बुधवार को लगातार दूसरे दिन हड़ताल के चलते पूरे शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान ठप रहा।
दो दिनों में घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में करीब 500 से 700 टन कचरा जमा हो गया। शहर के कई इलाकों में पिछले पांच दिनों से कूड़ा उठाने वाली गाड़ी नहीं पहुंची। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। घरों के डस्टबिन ओवरफ्लो हो चुके हैं और लोग मजबूरी में कचरे को पॉलिथीन में भरकर रखने को विवश हैं।
गांधी मंडी निवासी मीना ने बताया कि उनके क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से कूड़ा नहीं उठाया गया है। बारिश के मौसम में गीले कचरे से दुर्गंध फैल रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि नियमित शुल्क देने के बावजूद हर दो-तीन महीने में ऐसी स्थिति बन जाती है। वहीं, मॉडल टाउन निवासी हरीश ने कहा कि डोर-टू-डोर कूड़ा उठान व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है और घरों में कचरा सड़ने लगा है।
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डीएमसी अरुण भार्गव ने बताया कि भुगतान विवाद का फिलहाल समाधान कर लिया गया है और वीरवार से कूड़ा उठान व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।
निगम की मध्यस्थता के बाद शुरू हुआ कूड़ा उठान
बुधवार को नगर निगम के डीएमसी अरुण भार्गव और अन्य अधिकारियों ने जेबीएम कंपनी व स्थानीय ठेकेदार एजेंसी के बीच मध्यस्थता कराई। जेबीएम के स्थानीय अधिकारी हिमांशु ने बताया कि एजेंसी को बकाया राशि का कुछ भुगतान जारी कर दिया गया है। इसके बाद बुधवार दोपहर से शहर के कुछ हिस्सों में कूड़ा उठाने का कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया।
पेनल्टी के बाद बढ़ा विवाद : नगर निगम ने जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच कार्य में लापरवाही और असंतोषजनक प्रदर्शन को लेकर जेबीएम कंपनी पर अलग-अलग समय में करीब 10 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई थी। इसके विरोध में कंपनी ने स्थानीय ठेकेदार एजेंसी का भुगतान रोक दिया, जिसके बाद कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। हालांकि, नगर निगम का कहना है कि कार्य में सुधार के बाद कंपनी को जून 2026 तक का भुगतान जारी किया जा चुका है।
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दो दिनों में घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में करीब 500 से 700 टन कचरा जमा हो गया। शहर के कई इलाकों में पिछले पांच दिनों से कूड़ा उठाने वाली गाड़ी नहीं पहुंची। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। घरों के डस्टबिन ओवरफ्लो हो चुके हैं और लोग मजबूरी में कचरे को पॉलिथीन में भरकर रखने को विवश हैं।
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गांधी मंडी निवासी मीना ने बताया कि उनके क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से कूड़ा नहीं उठाया गया है। बारिश के मौसम में गीले कचरे से दुर्गंध फैल रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि नियमित शुल्क देने के बावजूद हर दो-तीन महीने में ऐसी स्थिति बन जाती है। वहीं, मॉडल टाउन निवासी हरीश ने कहा कि डोर-टू-डोर कूड़ा उठान व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है और घरों में कचरा सड़ने लगा है।
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डीएमसी अरुण भार्गव ने बताया कि भुगतान विवाद का फिलहाल समाधान कर लिया गया है और वीरवार से कूड़ा उठान व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।
निगम की मध्यस्थता के बाद शुरू हुआ कूड़ा उठान
बुधवार को नगर निगम के डीएमसी अरुण भार्गव और अन्य अधिकारियों ने जेबीएम कंपनी व स्थानीय ठेकेदार एजेंसी के बीच मध्यस्थता कराई। जेबीएम के स्थानीय अधिकारी हिमांशु ने बताया कि एजेंसी को बकाया राशि का कुछ भुगतान जारी कर दिया गया है। इसके बाद बुधवार दोपहर से शहर के कुछ हिस्सों में कूड़ा उठाने का कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया।
पेनल्टी के बाद बढ़ा विवाद : नगर निगम ने जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच कार्य में लापरवाही और असंतोषजनक प्रदर्शन को लेकर जेबीएम कंपनी पर अलग-अलग समय में करीब 10 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई थी। इसके विरोध में कंपनी ने स्थानीय ठेकेदार एजेंसी का भुगतान रोक दिया, जिसके बाद कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। हालांकि, नगर निगम का कहना है कि कार्य में सुधार के बाद कंपनी को जून 2026 तक का भुगतान जारी किया जा चुका है।