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Panipat News: महिलाओं में बढ़ रही पीसीओडी की समस्या, मां बनने में बन रही बाधा
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डॉ. स्मृति गुप्ता। संवाद
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पानीपत। खराब जीवनशैली से महिलाओं में हाॅर्मोंस बदलने और तनाव के कारण पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) की समस्या आ रही है। इससे महिलाओं को मां बनने में बाधा उत्पन्न होने लगी है। जिला नागरिक अस्पताल में इसके लिए हर रोज करीब 10 महिलाएं पहुंच रही हैं। पहले सामान्य रूप से पांच महिलाएं मुश्किल से आती थी। चिकित्सक महिलाओं को तनाव मुक्त, वजन कम करने और खाने का विशेष ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मृति गुप्ता ने बताया कि पीसीओडी में अंडाशय में छोटी-छोटी गांठ बन जाती है। ये गर्भधारण करने में बाधा बनती हैं। हार्मोंस बदलने से अनियमित पीरियड की परेशानी आ जाती है। इसके साथ हर समय तनाव, ज्यादा तला और मसालेदार खाना भी महिलाओं को पीसीओडी का शिकार बना रहा है। यह कई बार पीढ़ी दर पीढ़ी भी हो सकती है। कई बार लड़कियों में शादी से पहले भी हो जाती है और कई को शादी के बाद भी हो जाती है। ऐसे में महिलाओं को शुरुआत में ही पीरियड में समस्या होते ही चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। इसमें नियमित और पूरा इलाज लेना जरूरी है।
पीसीओडी में खाने का विशेष ध्यान रखना जरूरी
जिला नागरिक अस्पताल में आहार विशेषज्ञ नेहा सिंह ने बताया कि बदलता खान-पान भी लोगों को बीमार बना रहा है। पीसीओडी में खाने का विशेष ध्यान रखना चाहिए और वजन ज्यादा नहीं बढ़ने देना चाहिए। चूंकि वजन बढ़ने से अनेक बीमारी पैदा होती हैं। ऐसे में बाहर का खाना खाने से टलना चाहिए। सुबह-शाम हल्की सैर करनी चाहिए। योग काे अपनी दिनचर्या में शामिल करें। खाने में फल अवश्य शामिल करें। इसके साथ महिला को चुकंदर, अनानास व पपीता खाना चाहिए। ज्यादा ठंडी चीजें खाने से परहेज करना चाहिए।
वर्जन :
महिलाओं में पीसीओडी की दिक्कत बढ़ रही है। यह गलत खानपान और दिनचर्या ठीक न होने से हो रहा है। शुरुआती लक्षणों में ही चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। इसके साथ पूरा इलाज लें। इससे महिलाएं समय पर स्वस्थ होंगी।
- डॉ. स्मृति गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल।
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जिला नागरिक अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मृति गुप्ता ने बताया कि पीसीओडी में अंडाशय में छोटी-छोटी गांठ बन जाती है। ये गर्भधारण करने में बाधा बनती हैं। हार्मोंस बदलने से अनियमित पीरियड की परेशानी आ जाती है। इसके साथ हर समय तनाव, ज्यादा तला और मसालेदार खाना भी महिलाओं को पीसीओडी का शिकार बना रहा है। यह कई बार पीढ़ी दर पीढ़ी भी हो सकती है। कई बार लड़कियों में शादी से पहले भी हो जाती है और कई को शादी के बाद भी हो जाती है। ऐसे में महिलाओं को शुरुआत में ही पीरियड में समस्या होते ही चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। इसमें नियमित और पूरा इलाज लेना जरूरी है।
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पीसीओडी में खाने का विशेष ध्यान रखना जरूरी
जिला नागरिक अस्पताल में आहार विशेषज्ञ नेहा सिंह ने बताया कि बदलता खान-पान भी लोगों को बीमार बना रहा है। पीसीओडी में खाने का विशेष ध्यान रखना चाहिए और वजन ज्यादा नहीं बढ़ने देना चाहिए। चूंकि वजन बढ़ने से अनेक बीमारी पैदा होती हैं। ऐसे में बाहर का खाना खाने से टलना चाहिए। सुबह-शाम हल्की सैर करनी चाहिए। योग काे अपनी दिनचर्या में शामिल करें। खाने में फल अवश्य शामिल करें। इसके साथ महिला को चुकंदर, अनानास व पपीता खाना चाहिए। ज्यादा ठंडी चीजें खाने से परहेज करना चाहिए।
वर्जन :
महिलाओं में पीसीओडी की दिक्कत बढ़ रही है। यह गलत खानपान और दिनचर्या ठीक न होने से हो रहा है। शुरुआती लक्षणों में ही चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। इसके साथ पूरा इलाज लें। इससे महिलाएं समय पर स्वस्थ होंगी।
- डॉ. स्मृति गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल।