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Panipat News: अमेरिका टैरिफ के बाद उद्योगों पर गैस का संकट, डाइंग के रेट बढ़ाने से दूसरे उद्योगों पर भी असर

संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Thu, 19 Mar 2026 01:21 AM IST
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US tariffs have led to a gas crisis in the industry, with dyeing rate hikes also impacting other industries.
फैक्टरी की बंद चिमनी। संवाद
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जगमहेंद्र सरोहा
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पानीपत। अमेरिकी टैरिफ के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पानीपत के उद्योग की चाल अब गैस संकट के चलते और बिगड़ गई है। एलपीजी आपूर्ति न होने से करीब 300 उद्योग बंद हो गए हैं। वहीं पश्चिमी एशिया में केमिकल, रंग व अन्य रसायनों की कीमतों के बढ़ने पर स्थानीय रंगाई उद्योग ने रेट 25 प्रतिशत बढ़ा दिए हैं। इससे दूसरे उद्योगों पर भी विपरीत असर पड़ेगा। रंगाई उद्योगों के रेट बढ़ाने पर निर्यातक और घरेलू उद्यमी भी अपने उत्पादों के रेट बढ़ाने की तैयारी में लगे हुए हैं।
पानीपत से करीब 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात और करीब 80 हजार करोड़ रुपये का घरेलू बाजार है। अमेरिका ने पिछले साल उत्पादों पर टैरिफ आठ से बढ़ाकर सीधे 50 कर दिया था। अमेरिका ने नए व्यापारिक समझौते में टैरिफ 18 प्रतिशत करने का फैसला लिया था। इसी बीच पश्चिमी एशिया में तनाव की स्थिति पैदा हो गई, इससे एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है, इसके अलावा केमिकल, रंग और अन्य रसायन की कीमत भी बढ़ गई है। टेक्सटाइल उद्योग की रीढ़ रंगाई उद्योग ने इसके चलते करीब 25 प्रतिशत रेट बढ़ा दिए हैं। पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने बताया कि केमिकल व रंग के रेट बढ़ने पर हर काम के रेट बढ़ गए हैं। एलपीजी की आपूर्ति बंद कर दी है। इससे पानीपत के करीब 300 उद्योग बंद हो गए हैं। पीएनजी के प्रयोग की 600 यूनिट तय कर दी है। उद्यमी कोयला या दूसरे विकल्प नहीं अपना सकते हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई करने को तैयार रहता है।
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पश्चिमी एशिया में करीब 500 करोड़ का व्यापार
पानीपत से पश्चिमी एशिया में करीब 500 करोड़ रुपये का व्यापार होता है। पानीपत से प्रमुख रूप से कंबल और मिंक कंबल जाते हैं। अब इन देशों में मांग एक साथ घट गई हैं। बंदरगाहों पर भी सामान रुका हुआ है। उद्यमी इससे आगे नहीं ले जा पा रहे हैं। हैंडलूम एक्सपोर्टर मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव की स्थिति में व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है। पहले अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से व्यापार नीचे आया था। अब पश्चिमी एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है, ऐसे में इन देशों में भी माल नहीं जा पा रहा है। रंगाई उद्योग के रेट बढ़ाने पर दूसरे उद्योगों की भी रेट बढ़ाने की मजबूरी बन गई है।
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