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Rewari News: फुर्ती से 83 की बेला में भी हरीश चंद्र ने लक्ष्य काे भेद दिया
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:06 AM IST
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फोटो : दिल्ली मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद हरीश चंद्र।स्रोत :महाविद्यालय
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रेवाड़ी। दिल्ली मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप 2025-26 में मसीत निवासी और सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त जवान हरीश चंद्र ने 83 वर्ष की आयु में फुर्ती का प्रदर्शन कर सभी को प्रेरित किया। उन्होंने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में 200 मीटर और 500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जबकि 100 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता।
हरीश चंद्र की इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया कि उम्र कभी भी लक्ष्य पानी की राह में बाधा नहीं बन सकती। समर्पण, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से किसी भी आयु में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उनकी सक्रिय और स्वस्थ जीवनशैली आज की पीढ़ी के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी है।
इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय नाहड़ के सहायक प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान) डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि हरीश चंद्र की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि समाज को यह संदेश देती है कि फिटनेस और मजबूत इच्छाशक्ति से जीवन को ऊर्जावान और उद्देश्यपूर्ण बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि हरीश चंद्र एक अनुशासित जीवन जीने वाले सेवानिवृत्त सीआरपीएफ जवान हैं जिनकी दिनचर्या आज भी युवाओं के लिए आदर्श है। फिट और सक्रिय जीवनशैली अपनाने से व्यक्ति शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी मजबूत बनता है।
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हरीश चंद्र की इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया कि उम्र कभी भी लक्ष्य पानी की राह में बाधा नहीं बन सकती। समर्पण, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से किसी भी आयु में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उनकी सक्रिय और स्वस्थ जीवनशैली आज की पीढ़ी के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी है।
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इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय नाहड़ के सहायक प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान) डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि हरीश चंद्र की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि समाज को यह संदेश देती है कि फिटनेस और मजबूत इच्छाशक्ति से जीवन को ऊर्जावान और उद्देश्यपूर्ण बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि हरीश चंद्र एक अनुशासित जीवन जीने वाले सेवानिवृत्त सीआरपीएफ जवान हैं जिनकी दिनचर्या आज भी युवाओं के लिए आदर्श है। फिट और सक्रिय जीवनशैली अपनाने से व्यक्ति शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी मजबूत बनता है।