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Rewari News: नगर परिषद... हर वर्ष आय बढ़ाने पर जोर, वसूली में कमजोर
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 11 Jan 2026 01:30 AM IST
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रेवाड़ी। नगर परिषद हर वर्ष आय बढ़ाने पर जोर तो देती है लेकिन वसूली में कमजोर पड़ जाती है। करों समेत अन्य मदों में वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारण विकास कार्यों के लिए सरकार से मिलने वाले बजट पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर विभिन्न मदों में निर्धारित लक्ष्य के तहत पूरी वसूली हो जाए तो शहर में विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
नगर परिषद ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट तैयार किया है। यह बजट न केवल पिछले वर्ष की वास्तविक आय से अधिक है, बल्कि परिषद की उस महत्वाकांक्षा को भी दर्शाता है, जिसमें शहर के विकास, स्वच्छता और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का दावा किया गया है।
वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक नगर परिषद की कुल वास्तविक आय मात्र 42.79 करोड़ रुपये रही है जबकि पूरे वर्ष के लिए स्वीकृत बजट 91.19 करोड़ रुपये था। परिषद अपने निर्धारित लक्ष्यों का आधा वसूली नहीं कर पाई। ऐसे में 2026-27 के लिए 100 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य तय करना कहीं न कहीं अति-आशावादी प्रतीत होता है।
आय के प्रमुख स्रोतों की बात करें तो डेवलपमेंट चार्ज को सबसे अहम माना गया है। परिषद ने पिछले वर्ष 7 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था जबकि अब तक 4.78 करोड़ रुपये ही प्राप्त हो सके हैं।
इसी तरह प्रॉपर्टी टैक्स से 4.50 करोड़ रुपये की उम्मीद जताई गई थी लेकिन 2025-26 में दिसंबर तक यह आंकड़ा 2.10 करोड़ रुपये पर ही अटका हुआ है। इससे साफ है कि कर वसूली की मौजूदा व्यवस्था में अभी भी खामियां मौजूद हैं। संवाद
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अवैध होर्डिंग के खिलाफ नहीं होती ठोस कार्रवाई
शहर में अवैध होर्डिंग की भरमार है लेकिन परिषद ने इन पर कभी भी ठोस कार्रवाई नहीं की है। नतीजा ये है कि नगर परिषद विज्ञापन से भी शुल्क नहीं वसूल पाया है। उल्टा अवैध विज्ञापन नगर परिषद को ही चूना लगाने का काम कर रहे हैं। साल 2025-26 के लिए 1.60 करोड़ रुपये विज्ञापन चार्ज वसूल का लक्ष्य रखा गया था, मगर अभी तक 7.87 लाख रुपये ही वसूले गए हैं, इस बार 2 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य रखा गया है।
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स्टांप ड्यूटी का लक्ष्य 7 करोड़, आय नहीं हुई
स्टांप ड्यूटी को भी आय बढ़ाने का मजबूत जरिया माना गया है। पिछले वर्ष 7 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया था, जबकि अभी तक इस मद से कोई आय दर्ज नहीं की गई। यह अंतर इस बात की ओर इशारा करता है कि बजट अनुमान और वास्तविक स्थिति के बीच तालमेल कमजोर है। इससे यह सवाल भी उठता है कि नगर परिषद अपनी स्वयं की आय बढ़ाने में कितनी सक्षम हो पाई है।
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अन्य योजनाओं से भी है उम्मीदें
स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में बजट में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर दिखाई देते हैं। लीगेसी वेस्ट प्रबंधन के लिए 10 करोड़ रुपये और आकांक्षी शौचालय योजना के लिए 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। यदि इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया, तो शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार संभव है। हालांकि, अतीत में कई योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।
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आय के कई स्रोत वर्षों से निष्क्रिय पड़े
चिंताजनक पहलू यह भी है कि आय के कई स्रोत वर्षों से निष्क्रिय पड़े हैं। वाहन पंजीकरण शुल्क, स्लॉटर हाउस, मोबाइल टाॅवर फीस और लाइसेंस संबंधी कई मदों में आय लगातार शून्य आय दर्ज की जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो इन मदों को लागू ही नहीं किया जा रहा या फिर प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी है। कुल मिलाकर नगर परिषद रेवाड़ी का बजट 2026-27 आंकड़ों में मजबूत लेकिन क्रियान्वयन के स्तर पर कमजोर नजर आता है। यदि परिषद को इस बजट को सफल बनाना है, तो उसे कर वसूली व्यवस्था में सुधार, निष्क्रिय आय स्रोतों को सक्रिय करने और योजनाओं की निगरानी को प्राथमिकता देनी होगी। अन्यथा यह बजट भी पिछले वर्षों की तरह केवल फाइलों तक सीमित रह जाने का खतरा बना रहेगा।
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पिछले 3 वर्ष का बजट का ब्यौरा
माध्यम-- -- 2024-25 (बजट)-- आय -- 2025-26 (बजट)-- -आय (दिसंबर 25)-- 2026-27 बजट ( लाख में)
विकास शुल्क 700-- -- -511 -- -- -- 700-- -- 478-- -- 800
किराया 400-- -- 127-- -- 470-- -- 132-- -- 500
स्टंप ड्यूटी 600-- -- 550-- -- 700-- -- 0-- -- -900
प्रॉपर्टी टैक्स 350-- -- 364-- -- 450-- -- 210-- -460
फायर सेफ्टी टैक्स 50-- -6.90-- -50-- -11.31-- -50--
रोड कट चार्ज 75-- -4.49-- -75-- -19.98-- -75
बिल्डिंग फीस 150-- -23.10 -- -150-- -73.45-- -150
मिसक अनक्लासिफाइड 150-- -724-- -150-- 29.24-- -100
विज्ञापन चार्ज 150-- -32.03-- -160-- -7.87-- -200
ब्याज 80-- -218-- -- 200-- -- 186.23-- -- 275
एडवांस डिपोजिट 300-- -244-- -- 300-- -142-- -300
एसएफजीसी ग्रांट फॉर सैलेरी 2763-- -2695-- -3040-- -2304-- -3380
सीएफसी ग्रांट 667-- -179-- -- 733-- -- 630-- -- 925
डोर टू डोर सैनिटेशन यूजर चार्ज 400-- -261-- -- -425-- -- 44-- -- 425
वर्जन
वर्ष 2026-27 के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट तैयार किया गया है। पिछले वर्ष जो बजट तय किया गया था, उम्मीद है कि इसे समय रहता पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए हमारी टीमें जोर दे रही हैं। जितने विकास कार्य मेरे कार्यकाल में हुए हैं, उतने कार्य पहले कभी नहीं हुए हैं।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।
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नगर परिषद ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट तैयार किया है। यह बजट न केवल पिछले वर्ष की वास्तविक आय से अधिक है, बल्कि परिषद की उस महत्वाकांक्षा को भी दर्शाता है, जिसमें शहर के विकास, स्वच्छता और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का दावा किया गया है।
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वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक नगर परिषद की कुल वास्तविक आय मात्र 42.79 करोड़ रुपये रही है जबकि पूरे वर्ष के लिए स्वीकृत बजट 91.19 करोड़ रुपये था। परिषद अपने निर्धारित लक्ष्यों का आधा वसूली नहीं कर पाई। ऐसे में 2026-27 के लिए 100 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य तय करना कहीं न कहीं अति-आशावादी प्रतीत होता है।
आय के प्रमुख स्रोतों की बात करें तो डेवलपमेंट चार्ज को सबसे अहम माना गया है। परिषद ने पिछले वर्ष 7 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था जबकि अब तक 4.78 करोड़ रुपये ही प्राप्त हो सके हैं।
इसी तरह प्रॉपर्टी टैक्स से 4.50 करोड़ रुपये की उम्मीद जताई गई थी लेकिन 2025-26 में दिसंबर तक यह आंकड़ा 2.10 करोड़ रुपये पर ही अटका हुआ है। इससे साफ है कि कर वसूली की मौजूदा व्यवस्था में अभी भी खामियां मौजूद हैं। संवाद
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अवैध होर्डिंग के खिलाफ नहीं होती ठोस कार्रवाई
शहर में अवैध होर्डिंग की भरमार है लेकिन परिषद ने इन पर कभी भी ठोस कार्रवाई नहीं की है। नतीजा ये है कि नगर परिषद विज्ञापन से भी शुल्क नहीं वसूल पाया है। उल्टा अवैध विज्ञापन नगर परिषद को ही चूना लगाने का काम कर रहे हैं। साल 2025-26 के लिए 1.60 करोड़ रुपये विज्ञापन चार्ज वसूल का लक्ष्य रखा गया था, मगर अभी तक 7.87 लाख रुपये ही वसूले गए हैं, इस बार 2 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य रखा गया है।
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स्टांप ड्यूटी का लक्ष्य 7 करोड़, आय नहीं हुई
स्टांप ड्यूटी को भी आय बढ़ाने का मजबूत जरिया माना गया है। पिछले वर्ष 7 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया था, जबकि अभी तक इस मद से कोई आय दर्ज नहीं की गई। यह अंतर इस बात की ओर इशारा करता है कि बजट अनुमान और वास्तविक स्थिति के बीच तालमेल कमजोर है। इससे यह सवाल भी उठता है कि नगर परिषद अपनी स्वयं की आय बढ़ाने में कितनी सक्षम हो पाई है।
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अन्य योजनाओं से भी है उम्मीदें
स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में बजट में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर दिखाई देते हैं। लीगेसी वेस्ट प्रबंधन के लिए 10 करोड़ रुपये और आकांक्षी शौचालय योजना के लिए 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। यदि इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया, तो शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार संभव है। हालांकि, अतीत में कई योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।
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आय के कई स्रोत वर्षों से निष्क्रिय पड़े
चिंताजनक पहलू यह भी है कि आय के कई स्रोत वर्षों से निष्क्रिय पड़े हैं। वाहन पंजीकरण शुल्क, स्लॉटर हाउस, मोबाइल टाॅवर फीस और लाइसेंस संबंधी कई मदों में आय लगातार शून्य आय दर्ज की जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो इन मदों को लागू ही नहीं किया जा रहा या फिर प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी है। कुल मिलाकर नगर परिषद रेवाड़ी का बजट 2026-27 आंकड़ों में मजबूत लेकिन क्रियान्वयन के स्तर पर कमजोर नजर आता है। यदि परिषद को इस बजट को सफल बनाना है, तो उसे कर वसूली व्यवस्था में सुधार, निष्क्रिय आय स्रोतों को सक्रिय करने और योजनाओं की निगरानी को प्राथमिकता देनी होगी। अन्यथा यह बजट भी पिछले वर्षों की तरह केवल फाइलों तक सीमित रह जाने का खतरा बना रहेगा।
पिछले 3 वर्ष का बजट का ब्यौरा
माध्यम
विकास शुल्क 700
किराया 400
स्टंप ड्यूटी 600
प्रॉपर्टी टैक्स 350
फायर सेफ्टी टैक्स 50
रोड कट चार्ज 75
बिल्डिंग फीस 150
मिसक अनक्लासिफाइड 150
विज्ञापन चार्ज 150
ब्याज 80
एडवांस डिपोजिट 300
एसएफजीसी ग्रांट फॉर सैलेरी 2763
सीएफसी ग्रांट 667
डोर टू डोर सैनिटेशन यूजर चार्ज 400
वर्जन
वर्ष 2026-27 के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट तैयार किया गया है। पिछले वर्ष जो बजट तय किया गया था, उम्मीद है कि इसे समय रहता पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए हमारी टीमें जोर दे रही हैं। जितने विकास कार्य मेरे कार्यकाल में हुए हैं, उतने कार्य पहले कभी नहीं हुए हैं।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।