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Rewari News: एसी मशरूम फार्मिंग से आत्मनिर्भर बनीं देवरानी-जेठानी, दूसरों को भी दे रहीं रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 07 Mar 2026 10:39 PM IST
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दीपिका यादव
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रेवाड़ी। महिलाओं को जब भी मौका मिला हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का परिचय दिया है। गांव घासेड़ा की दो महिलाओं ने मशरूम की आधुनिक खेती कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। दीपिका यादव (39) और अनामिका यादव (44) ने मिलकर फार्म स्थापित किया है। दोनों रिश्ते में देवरानी-जेठानी हैं। अपनी मेहनत के दम पर इस व्यवसाय को निरंतर आगे बढ़ा रही हैं। इससे न केवल परिवार की आय में बढ़ोतरी हुई है बल्कि कई दूसरी महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
करीब पांच साल पहले दीपिका यादव ने सबसे पहले एसी मशरूम फार्म की शुरूआत की थी। उस समय फार्म को शुरू करने में करीब 30 लाख रुपये का निवेश किया गया था। बाद में काम बढ़ने और अच्छी मांग मिलने के कारण फार्म का विस्तार किया गया और एक और यूनिट शुरू कर दी गई।
अब इस व्यवसाय में अनामिका यादव भी साझेदार बन चुकी हैं। दोनों ने मिलकर निवेश को 50-50 प्रतिशत में साझा कर लिया है। वर्तमान में दोनों महिलाएं मिलकर फार्म का संचालन कर रही हैं। लगभग 50 प्रतिशत उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बिक जाता है जबकि शेष मशरूम दिल्ली की आजादपुर मंडी में भेजा जाता है। इसके अलावा गुरुग्राम में भी आपूर्ति की जाती है। दीपिका यादव ने बताया कि फार्म में 10 से 12 महिलाएं काम करती हैं। इनको प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक की आय हो जाती है।
अनामिका यादव ने बताया कि कुछ साल पहले ही व्यवसाय में कदम रखा और अब दोनों मिलकर आगे बढ़ा रही हैं। अनामिका के पति धर्मवीर यादव प्रॉपर्टी डीलर हैं और उनके दो बच्चे हैं। अनामिका का कहना है कि यदि सही योजना और मेहनत के साथ खेती या कृषि आधारित व्यवसाय किया जाए तो इससे अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को लेकर उनका कहना है कि महिलाएं यदि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें तो वे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।
दीपिका यादव एमटेक की पढ़ाई की हैं। पति ओमपाल यादव जीएसटी एवं कस्टम विभाग में इंस्पेक्टर हैं। ओमपाल यादव ने बताया कि कुछ साल पहले वह ऑफिस के काम से नासिक गए थे। वहां उन्होंने पहली बार एसी मशरूम फार्म देखा। उस समय दक्षिणी हरियाणा में इस प्रकार का फार्म नहीं था। उसी से प्रेरित होकर उन्होंने यहां विचार कर एसी मशरूम फार्म शुरू करने का विचार किया और परिवार के सहयोग से इसे स्थापित किया। दीपिका यादव ने बताया कि एसी मशरूम फार्म होने के कारण यहां पूरे वर्ष मशरूम का उत्पादन किया जाता है। सामान्य तौर पर मशरूम की खेती मौसम पर निर्भर होती है लेकिन एसी तकनीक के उपयोग से तापमान और नमी को नियंत्रित किया जाता है जिससे सालभर उत्पादन संभव हो पाता है। इस फार्म में प्रतिवर्ष लगभग 100 टन मशरूम का उत्पादन किया जाता है। सालाना 25 से 30 लाख की बचत होती है।
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करीब पांच साल पहले दीपिका यादव ने सबसे पहले एसी मशरूम फार्म की शुरूआत की थी। उस समय फार्म को शुरू करने में करीब 30 लाख रुपये का निवेश किया गया था। बाद में काम बढ़ने और अच्छी मांग मिलने के कारण फार्म का विस्तार किया गया और एक और यूनिट शुरू कर दी गई।
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अब इस व्यवसाय में अनामिका यादव भी साझेदार बन चुकी हैं। दोनों ने मिलकर निवेश को 50-50 प्रतिशत में साझा कर लिया है। वर्तमान में दोनों महिलाएं मिलकर फार्म का संचालन कर रही हैं। लगभग 50 प्रतिशत उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बिक जाता है जबकि शेष मशरूम दिल्ली की आजादपुर मंडी में भेजा जाता है। इसके अलावा गुरुग्राम में भी आपूर्ति की जाती है। दीपिका यादव ने बताया कि फार्म में 10 से 12 महिलाएं काम करती हैं। इनको प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक की आय हो जाती है।
अनामिका यादव ने बताया कि कुछ साल पहले ही व्यवसाय में कदम रखा और अब दोनों मिलकर आगे बढ़ा रही हैं। अनामिका के पति धर्मवीर यादव प्रॉपर्टी डीलर हैं और उनके दो बच्चे हैं। अनामिका का कहना है कि यदि सही योजना और मेहनत के साथ खेती या कृषि आधारित व्यवसाय किया जाए तो इससे अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को लेकर उनका कहना है कि महिलाएं यदि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें तो वे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।
दीपिका यादव एमटेक की पढ़ाई की हैं। पति ओमपाल यादव जीएसटी एवं कस्टम विभाग में इंस्पेक्टर हैं। ओमपाल यादव ने बताया कि कुछ साल पहले वह ऑफिस के काम से नासिक गए थे। वहां उन्होंने पहली बार एसी मशरूम फार्म देखा। उस समय दक्षिणी हरियाणा में इस प्रकार का फार्म नहीं था। उसी से प्रेरित होकर उन्होंने यहां विचार कर एसी मशरूम फार्म शुरू करने का विचार किया और परिवार के सहयोग से इसे स्थापित किया। दीपिका यादव ने बताया कि एसी मशरूम फार्म होने के कारण यहां पूरे वर्ष मशरूम का उत्पादन किया जाता है। सामान्य तौर पर मशरूम की खेती मौसम पर निर्भर होती है लेकिन एसी तकनीक के उपयोग से तापमान और नमी को नियंत्रित किया जाता है जिससे सालभर उत्पादन संभव हो पाता है। इस फार्म में प्रतिवर्ष लगभग 100 टन मशरूम का उत्पादन किया जाता है। सालाना 25 से 30 लाख की बचत होती है।

दीपिका यादव

दीपिका यादव