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Rewari News: अब लैब रिपोर्ट से होगी संक्रमण की पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 19 May 2026 11:55 PM IST
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रेवाड़ी। संक्रमण के बढ़ते मरीजों की लैब जांच रिपोर्ट का विशेष अध्ययन किया जा रहा है। संक्रमण की पहचान के लिए ऐसा किया जा रहा है ताकि सही इलाज उपलब्ध कराने के साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल भविष्य में खतरनाक संक्रमणों से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। माइक्रोबायोलॉजिस्ट डाॅ. रेणू बंसल के अनुसार कुछ ऐसे बैक्टीरिया सामने आ रहे हैं जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो जाता है।
ऐसे जीवाणुओं को सुपरबग कहा जाता है। जरूरत से ज्यादा और बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से यह समस्या बढ़ रही है। यही कारण है कि अब अस्पताल में संक्रमणों के बदलते स्वरूप पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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अस्पताल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में हर सप्ताह जांच रिपोर्ट का विश्लेषण किया जा रहा है। इसमें यह पता लगाया जाता है कि जिले में कौन-कौन से बैक्टीरिया अधिक पाए जा रहे हैं और कौन-सी दवाएं उन पर असर कर रही हैं। इसके आधार पर साप्ताहिक ट्रेंड रिपोर्ट तैयार की जा रही है ताकि डॉक्टरों को संक्रमण की स्थिति समझने में आसानी हो सके।
डॉक्टरों को इलाज में मिल रही मदद
इस पहल से डॉक्टरों को मरीजों के इलाज में काफी मदद मिल रही है। रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक यह तय कर पा रहे हैं कि कौन-सी एंटीबायोटिक दवा मरीज के लिए अधिक प्रभावी रहेगी। इससे गलत दवा देने की संभावना कम होगी और मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकेंगे। डाॅ. रेणू बंसल ने बताया कि केवल आंकड़े जुटाने का काम नहीं किया जा रहा बल्कि संक्रमणों के बदलते पैटर्न का अध्ययन किया जा रहा है। भविष्य में सुपरबग बनने वाले जीवाणुओं पर विशेष नजर रखी जा रही है।
अन्य अस्पतालों के साथ साझा की जा रही जानकारी
संक्रमण की जांच की जानकारी केवल नागरिक अस्पताल तक सीमित नहीं रखी जा रही है बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के डॉक्टरों के साथ भी रिपोर्ट साझा की जा रही है। इससे जिलेभर में संक्रमण की स्थिति पर नजर रखना आसान हो गया है।
वर्जन
यह पहल एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग पर रोक लगाने में मदद करेगी। इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा और आम लोगों में भी दवाओं के सही इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। रेवाड़ी में शुरू की गई यह व्यवस्था आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।-डॉ. सुरेंद्र यादव, पीएमओ, नागरिक अस्पताल।
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल भविष्य में खतरनाक संक्रमणों से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। माइक्रोबायोलॉजिस्ट डाॅ. रेणू बंसल के अनुसार कुछ ऐसे बैक्टीरिया सामने आ रहे हैं जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो जाता है।
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ऐसे जीवाणुओं को सुपरबग कहा जाता है। जरूरत से ज्यादा और बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से यह समस्या बढ़ रही है। यही कारण है कि अब अस्पताल में संक्रमणों के बदलते स्वरूप पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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डॉक्टरों को इलाज में मिल रही मदद
इस पहल से डॉक्टरों को मरीजों के इलाज में काफी मदद मिल रही है। रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक यह तय कर पा रहे हैं कि कौन-सी एंटीबायोटिक दवा मरीज के लिए अधिक प्रभावी रहेगी। इससे गलत दवा देने की संभावना कम होगी और मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकेंगे। डाॅ. रेणू बंसल ने बताया कि केवल आंकड़े जुटाने का काम नहीं किया जा रहा बल्कि संक्रमणों के बदलते पैटर्न का अध्ययन किया जा रहा है। भविष्य में सुपरबग बनने वाले जीवाणुओं पर विशेष नजर रखी जा रही है।
अन्य अस्पतालों के साथ साझा की जा रही जानकारी
संक्रमण की जांच की जानकारी केवल नागरिक अस्पताल तक सीमित नहीं रखी जा रही है बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के डॉक्टरों के साथ भी रिपोर्ट साझा की जा रही है। इससे जिलेभर में संक्रमण की स्थिति पर नजर रखना आसान हो गया है।
वर्जन
यह पहल एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग पर रोक लगाने में मदद करेगी। इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा और आम लोगों में भी दवाओं के सही इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। रेवाड़ी में शुरू की गई यह व्यवस्था आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।-डॉ. सुरेंद्र यादव, पीएमओ, नागरिक अस्पताल।