{"_id":"6a440baaabee1880990266a3","slug":"progressive-farmers-honored-by-the-union-agriculture-minister-and-the-chief-minister-rewari-news-c-17-1-roh1012-880703-2026-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: केंद्रीय कृषि मंत्री और सीएम के हाथों प्रगतिशील किसान सम्मानित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: केंद्रीय कृषि मंत्री और सीएम के हाथों प्रगतिशील किसान सम्मानित
Wed, 01 Jul 2026 12:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 01 Jul 2026 12:02 AM IST
विज्ञापन
खेत बचाओ अभियान समापन समारोह में सम्मान मिलने के बाद खुशी जाहिर करते किसान। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बावल। स्थानीय कृषि महाविद्यालय में आयोजित खेत बचाओ अभियान के समापन समारोह में मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले छह प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहे। किसानों को प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान देकर उनके उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की गई।
सम्मानित किसानों में महेंद्रगढ़ जिले के बेवल गांव के कर्ण सिंह (प्राकृतिक खेती), रेवाड़ी के ढाणी सुनरोज के वेद प्रकाश (प्राकृतिक खेती एवं बागवानी), महेंद्रगढ़ के बवानियां गांव की बनारसी देवी (श्रीअन्न उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन), रेवाड़ी के बैरमपुर के सुनील कुमार उर्फ विक्की यादव (प्राकृतिक खेती उत्पादों का विपणन), रेवाड़ी के पाली गांव के राज कुमार (मधुमक्खी पालन) और झज्जर जिले के अहरी गांव निवासी संदीप कुमार (प्राकृतिक खेती) शामिल रहे।
सम्मान प्राप्त करने वाले किसानों ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक विकल्प नहीं बल्कि समय की जरूरत है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वर क्षमता घट रही है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और पर्यावरण संरक्षण भी होता है।
विज्ञापन
किसानों ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री से सम्मान मिलना उनके लिए गर्व का विषय है और इससे उन्हें प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने अन्य किसानों से भी रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की।
प्राकृतिक तरीके से उगा रहे गेहूं, सरसों, बाजरे की फसल : सुनील
रेवाड़ी के बैरमपुर निवासी सुनील कुमार उर्फ विक्की यादव ने कहा कि सम्मानित होने पर उन्हें बेहद खुशी हुई है। वह वर्ष 2006 से करीब आठ एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। गेहूं, सरसों, बाजरा सहित अन्य फसलें प्राकृतिक तरीके से उगाते हैं। प्राकृतिक खेती के लिए इससे पहले भी उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों स्तर पर लाभ मिलता है।
परिवार की सेहत के लिए अपनाई ऑर्गेनिक खेती : बनारसी देवी
महेंद्रगढ़ जिले के बवानियां गांव की बनारसी देवी ने बताया कि वह पिछले नौ वर्षों से करीब दो एकड़ भूमि पर ऑर्गेनिक खेती कर रही हैं। वह बाजरा, गेहूं और जौ की खेती करती हैं। उन्होंने ऑर्गेनिक खेती परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए शुरू की। उन्होंने किसानों से भी प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने सम्मान मिलने पर खुशी व्यक्त की।
हर किसान को करनी चाहिए प्राकृतिक खेती : कर्ण सिंह
महेंद्रगढ़ जिले के बेवल गांव के कर्ण सिंह ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने घीया, तोरी, बैंगन सहित विभिन्न सब्जियों की खेती की है। उन्हें पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती से जुड़ने की अपील की।
आने वाली पीढ़ियों को बचाने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाएं : संदीप
झज्जर जिले के अहरी गांव के संदीप कुमार ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से सात एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वह फलदार पौधों और श्रीअन्न (मोटे अनाज) की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को स्वयं और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती की ओर रुख करना चाहिए। इसके लिए किसानों को अपनी सोच और समझ विकसित करनी होगी।
विज्ञापन
सम्मानित किसानों में महेंद्रगढ़ जिले के बेवल गांव के कर्ण सिंह (प्राकृतिक खेती), रेवाड़ी के ढाणी सुनरोज के वेद प्रकाश (प्राकृतिक खेती एवं बागवानी), महेंद्रगढ़ के बवानियां गांव की बनारसी देवी (श्रीअन्न उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन), रेवाड़ी के बैरमपुर के सुनील कुमार उर्फ विक्की यादव (प्राकृतिक खेती उत्पादों का विपणन), रेवाड़ी के पाली गांव के राज कुमार (मधुमक्खी पालन) और झज्जर जिले के अहरी गांव निवासी संदीप कुमार (प्राकृतिक खेती) शामिल रहे।
विज्ञापन
सम्मान प्राप्त करने वाले किसानों ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक विकल्प नहीं बल्कि समय की जरूरत है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वर क्षमता घट रही है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और पर्यावरण संरक्षण भी होता है।
विज्ञापन
किसानों ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री से सम्मान मिलना उनके लिए गर्व का विषय है और इससे उन्हें प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने अन्य किसानों से भी रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की।
प्राकृतिक तरीके से उगा रहे गेहूं, सरसों, बाजरे की फसल : सुनील
रेवाड़ी के बैरमपुर निवासी सुनील कुमार उर्फ विक्की यादव ने कहा कि सम्मानित होने पर उन्हें बेहद खुशी हुई है। वह वर्ष 2006 से करीब आठ एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। गेहूं, सरसों, बाजरा सहित अन्य फसलें प्राकृतिक तरीके से उगाते हैं। प्राकृतिक खेती के लिए इससे पहले भी उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों स्तर पर लाभ मिलता है।
परिवार की सेहत के लिए अपनाई ऑर्गेनिक खेती : बनारसी देवी
महेंद्रगढ़ जिले के बवानियां गांव की बनारसी देवी ने बताया कि वह पिछले नौ वर्षों से करीब दो एकड़ भूमि पर ऑर्गेनिक खेती कर रही हैं। वह बाजरा, गेहूं और जौ की खेती करती हैं। उन्होंने ऑर्गेनिक खेती परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए शुरू की। उन्होंने किसानों से भी प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने सम्मान मिलने पर खुशी व्यक्त की।
हर किसान को करनी चाहिए प्राकृतिक खेती : कर्ण सिंह
महेंद्रगढ़ जिले के बेवल गांव के कर्ण सिंह ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने घीया, तोरी, बैंगन सहित विभिन्न सब्जियों की खेती की है। उन्हें पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती से जुड़ने की अपील की।
आने वाली पीढ़ियों को बचाने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाएं : संदीप
झज्जर जिले के अहरी गांव के संदीप कुमार ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से सात एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वह फलदार पौधों और श्रीअन्न (मोटे अनाज) की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को स्वयं और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती की ओर रुख करना चाहिए। इसके लिए किसानों को अपनी सोच और समझ विकसित करनी होगी।