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Rewari News: रेवाड़ी में फिर गिरा लिंगानुपात, 1017 से गिरकर 863 पर पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 17 Feb 2026 11:31 PM IST
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रेवाड़ी। प्रदेश में लिंगानुपात सुधार के प्रयासों के बीच रेवाड़ी में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। जनवरी में जिले में लिंगानुपात 1017 से गिरकर 863 पर पहुंच गया है जिनमें 512 लड़के और 442 लड़कियां शामिल हैं। पिछले माह दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 1017 था जो प्रदेश के औसत 923 से काफी बेहतर था। एक माह में आई इस गिरावट ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
जिले में लिंगानुपात में आई इस गिरावट को स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के लिए भी झटका माना जा रहा है, क्योंकि रेवाड़ी उनका गृह जिला है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह मासिक आंकड़ा है और वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए कम से कम तीन माह के आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी है।
जिले में खोल सीएचसी के अधीन आने वाले गांवों में स्थिति संतोषजनक रही। यहां जनवरी में 89 लड़कों और 89 लड़कियों का जन्म हुआ। मीरपुर सीएचसी में 143 लड़कों के मुकाबले 130 लड़कियों ने जन्म लिया। नाहड़ सीएचसी में भी स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जहां 80 लड़कों के मुकाबले 75 लड़कियों का जन्म हुआ। सबसे खराब स्थिति गुरावड़ा सीएचसी में देखने को मिली, जहां 73 लड़कों के मुकाबले केवल 49 लड़कियों ने जन्म लिया। बावल सीएचसी में भी 127 लड़कों के मुकाबले मात्र 99 लड़कियों का जन्म हुआ। यह अंतर जिले के औसत को नीचे खींचने का मुख्य कारण बना। संवाद
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बाहरी राज्यों से हो रही अवैध गतिविधियां चुनौती
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सक्रिय अवैध लिंग जांच गिरोह इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। बावल क्षेत्र से सटे राजस्थान के इलाकों में अब भी अवैध लिंग जांच की गतिविधियां होने की आशंका है, जिससे विभाग की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
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जागरूकता अभियान तेज करने की तैयारी
पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. विद्यासागर ने बताया कि लिंगानुपात सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएनडीटी कमेटी को प्रभावी बनाने के लिए जल्द ही कार्यशाला आयोजित की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक माह के आंकड़ों से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है, लेकिन स्थिति पर गंभीरता से नजर रखी जा रही है।
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जिले में खोल सीएचसी के अधीन आने वाले गांवों में स्थिति संतोषजनक रही। यहां जनवरी में 89 लड़कों और 89 लड़कियों का जन्म हुआ। मीरपुर सीएचसी में 143 लड़कों के मुकाबले 130 लड़कियों ने जन्म लिया। नाहड़ सीएचसी में भी स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जहां 80 लड़कों के मुकाबले 75 लड़कियों का जन्म हुआ। सबसे खराब स्थिति गुरावड़ा सीएचसी में देखने को मिली, जहां 73 लड़कों के मुकाबले केवल 49 लड़कियों ने जन्म लिया। बावल सीएचसी में भी 127 लड़कों के मुकाबले मात्र 99 लड़कियों का जन्म हुआ। यह अंतर जिले के औसत को नीचे खींचने का मुख्य कारण बना। संवाद
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बाहरी राज्यों से हो रही अवैध गतिविधियां चुनौती
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सक्रिय अवैध लिंग जांच गिरोह इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। बावल क्षेत्र से सटे राजस्थान के इलाकों में अब भी अवैध लिंग जांच की गतिविधियां होने की आशंका है, जिससे विभाग की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
जागरूकता अभियान तेज करने की तैयारी
पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. विद्यासागर ने बताया कि लिंगानुपात सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएनडीटी कमेटी को प्रभावी बनाने के लिए जल्द ही कार्यशाला आयोजित की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक माह के आंकड़ों से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है, लेकिन स्थिति पर गंभीरता से नजर रखी जा रही है।