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Rewari News: 22 हजार रुपये देने का लालच दे श्रमिकों को लाता था मैनेजर, आकर पता चलता था पटाखा फैक्टरी है
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 17 Feb 2026 11:43 PM IST
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सिकंदर मिंटू के पिता।
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भिवाड़ी। खुशखेड़ा-कारौली औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को अवैध पटाखा फैक्टरी में हुई धमाके में 7 लोगों ने मौत हो गई थी। हादसे का शिकार होने वालों में 6 मजदूर बिहार के मोतिहारी और चंपारण जिले के निवासी थे। फैक्टरी का मैनेजर अभिनंदन भी बिहार के मोतिहारी का निवासी था। वह 22 हजार रुपये दिलाने का लालच देकर श्रमिकों को लाता था। पुलिस ने मैनेजर को हिरासत में लिया है।
पटाखे की अवैध फैक्टरी में हुए विस्फोट मामले में पुलिस ने फैक्टरी मालिक सहित 4 के खिलाफ की एफआईआर दर्ज की है।घटना की जांच के लिए मंगलवार को आईजी राघवेंद्र सुहासा फैक्टरी पहुंचे।
मृत श्रमिक मिंटू के छोटे भाई राजकिशोर ने बताया कि हमें काम की आवश्यकता थी। बिहार के मोतिहारी निवासी मैनेजर अभिनंदन ने कहा था कि भिवाड़ी में काम दिलवाऊंगा। 22 हजार सेलरी मिलेगी। ज्यादा पैसे मिल रहे थे, इसलिए काम के लिए हां कर दी।
बताया कि मैनेजर ने यह नहीं बताया कि क्या काम करना होगा। मैनेजर सभी को ज्यादा पैसों का लालच देकर गुमराह करता था। मिंटू और दूसरे साथियों को यहां आकर पता चला कि पटाखे की फैक्टरी में काम करना है। सेलरी अच्छी होने की वजह से सभी कार्य करते थे।
फैक्टरी में काम करने के लिए ये मजदूर डेढ़ महीने पहले बिहार से भिवाड़ी आए थे। 15 फरवरी को इन लोगों ने शिवरात्रि मनाई थी। महिलाओं ने मेहंदी लगाई थी।
16 फरवरी की सुबह घरों से पुरुष मजदूरी के लिए निकले थे। घर से निकले एक-दो घंटे ही हुए थे कि परिजनों को फैक्टरी में धमाके और आग की सूचना मिली। फैक्टरी खुले अभी डेढ़ माह ही हुए थे।
राजकिशोर ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि फैक्ट्री मालिक राजेंद्र, हेमंत कुमार शर्मा, कंपनी मैनेजर अभिनंदन तिवारी, ठेकेदार अजीत की जानकारी में था कि मजदूरों से बिना किसी सेफ्टी उपकरण के काम कराया जा रहा है। ऐसे में कोई बड़ी दुर्घटना होने और मजदूरों की जान जाने की आशंका जताई जा रही थी। इसके बाद भी फैक्टरी मालिक, सुपरवाइजर, ठेकेदार ने मेरे भाई व अन्य मजदूरों से यह काम करवाया।
फैक्टरी मालिक राजेंद्र कुमार गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), हेमंत कुमार शर्मा शाहजहांपुर जिला कोटपूतली बहरोड़ (राजस्थान), मैनेजर अभिनंदन तिवारी निवासी मटियरिया, थाना हरसौली, मोतिहारी (बिहार), ठेकेदार अजीत निवासी खुशखेड़ा, जिला खैरथल-तिजारा (राजस्थान) के रहने वाले हैं। पुलिस ने फैक्टरी मालिक सहित 4 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
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बेटे की मौत से बेखबर थे सिकंदर
अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके की घटना में बिहार के मोतिहारी जिले के झरोखर कस्बे के निवासी सिकंदर का बेटा मिंटू भी काम करता था। हादसे में मिंटू की जान चली गई। विस्फोट की सूचना मिलने पर सिकंदर फैक्टरी की ओर दौड़े। मौके पर आग का मंजर देख वह सन्न रह गए। बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला और लोगों से अपने बेटे मिंटू के बारे में पूछा लेकिन कुछ पता नहीं चला। सोमवार देर शाम बाद मृतकों की पुष्टि हुई। मृतकों की सूची में मिंटू का भी नाम था लेकिन पिता इससे बेखबर थे। उनको नहीं पता था कि बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। यह कहानी अकेले सिकंदर की नहीं बल्कि हादसे में मारे गए अन्य श्रमिकों के परिजनों की भी है। किसी का जवान बेटा चला गया तो किसी के घर का इकलौता सहारा। कई बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
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फैक्टरी का गेट बंद नहीं होता तो बच सकती थी जान
घटना में घायल मोतिहारी जिले के रितेश कुमार ने बताया कि सभी श्रमिक 8 बजे सुबह फैक्टरी में कार्य करते थे। इसके बाद फैक्टरी गेट बंद कर दिया जाता था। अगर गेट बंद नहीं होता तो लोग बच सकते थे। घटना के समय भयावह मंजर था। झुलसे सभी श्रमिक छटपटा रहे थे। कई लोग शीशा फोड़कर भाग रहे थे। जिन 7 श्रमिकों की मौत हुई है, वे बारूद भरने का कार्य करते थे। 2 टेबल पर 5-5 किलो बारूद रखा था। श्रमिक बिना सुरक्षा उपकरण के सांचे में बारूद भरते थे। आग लगी तो कुछ पता ही नहीं चला। उन्होंने बताया कि अधिकतर श्रमिक फैक्टरी में ही रहते थे। वहीं पर खाना बनाते थे। पता नहीं चला कि फैक्टरी में आग कैसे लगी। फैक्टरी में फोन इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं थी। फोन रखवा दिया जाता था।
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पटाखे की अवैध फैक्टरी में हुए विस्फोट मामले में पुलिस ने फैक्टरी मालिक सहित 4 के खिलाफ की एफआईआर दर्ज की है।घटना की जांच के लिए मंगलवार को आईजी राघवेंद्र सुहासा फैक्टरी पहुंचे।
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मृत श्रमिक मिंटू के छोटे भाई राजकिशोर ने बताया कि हमें काम की आवश्यकता थी। बिहार के मोतिहारी निवासी मैनेजर अभिनंदन ने कहा था कि भिवाड़ी में काम दिलवाऊंगा। 22 हजार सेलरी मिलेगी। ज्यादा पैसे मिल रहे थे, इसलिए काम के लिए हां कर दी।
बताया कि मैनेजर ने यह नहीं बताया कि क्या काम करना होगा। मैनेजर सभी को ज्यादा पैसों का लालच देकर गुमराह करता था। मिंटू और दूसरे साथियों को यहां आकर पता चला कि पटाखे की फैक्टरी में काम करना है। सेलरी अच्छी होने की वजह से सभी कार्य करते थे।
फैक्टरी में काम करने के लिए ये मजदूर डेढ़ महीने पहले बिहार से भिवाड़ी आए थे। 15 फरवरी को इन लोगों ने शिवरात्रि मनाई थी। महिलाओं ने मेहंदी लगाई थी।
16 फरवरी की सुबह घरों से पुरुष मजदूरी के लिए निकले थे। घर से निकले एक-दो घंटे ही हुए थे कि परिजनों को फैक्टरी में धमाके और आग की सूचना मिली। फैक्टरी खुले अभी डेढ़ माह ही हुए थे।
राजकिशोर ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि फैक्ट्री मालिक राजेंद्र, हेमंत कुमार शर्मा, कंपनी मैनेजर अभिनंदन तिवारी, ठेकेदार अजीत की जानकारी में था कि मजदूरों से बिना किसी सेफ्टी उपकरण के काम कराया जा रहा है। ऐसे में कोई बड़ी दुर्घटना होने और मजदूरों की जान जाने की आशंका जताई जा रही थी। इसके बाद भी फैक्टरी मालिक, सुपरवाइजर, ठेकेदार ने मेरे भाई व अन्य मजदूरों से यह काम करवाया।
फैक्टरी मालिक राजेंद्र कुमार गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), हेमंत कुमार शर्मा शाहजहांपुर जिला कोटपूतली बहरोड़ (राजस्थान), मैनेजर अभिनंदन तिवारी निवासी मटियरिया, थाना हरसौली, मोतिहारी (बिहार), ठेकेदार अजीत निवासी खुशखेड़ा, जिला खैरथल-तिजारा (राजस्थान) के रहने वाले हैं। पुलिस ने फैक्टरी मालिक सहित 4 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
बेटे की मौत से बेखबर थे सिकंदर
अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके की घटना में बिहार के मोतिहारी जिले के झरोखर कस्बे के निवासी सिकंदर का बेटा मिंटू भी काम करता था। हादसे में मिंटू की जान चली गई। विस्फोट की सूचना मिलने पर सिकंदर फैक्टरी की ओर दौड़े। मौके पर आग का मंजर देख वह सन्न रह गए। बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला और लोगों से अपने बेटे मिंटू के बारे में पूछा लेकिन कुछ पता नहीं चला। सोमवार देर शाम बाद मृतकों की पुष्टि हुई। मृतकों की सूची में मिंटू का भी नाम था लेकिन पिता इससे बेखबर थे। उनको नहीं पता था कि बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। यह कहानी अकेले सिकंदर की नहीं बल्कि हादसे में मारे गए अन्य श्रमिकों के परिजनों की भी है। किसी का जवान बेटा चला गया तो किसी के घर का इकलौता सहारा। कई बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
फैक्टरी का गेट बंद नहीं होता तो बच सकती थी जान
घटना में घायल मोतिहारी जिले के रितेश कुमार ने बताया कि सभी श्रमिक 8 बजे सुबह फैक्टरी में कार्य करते थे। इसके बाद फैक्टरी गेट बंद कर दिया जाता था। अगर गेट बंद नहीं होता तो लोग बच सकते थे। घटना के समय भयावह मंजर था। झुलसे सभी श्रमिक छटपटा रहे थे। कई लोग शीशा फोड़कर भाग रहे थे। जिन 7 श्रमिकों की मौत हुई है, वे बारूद भरने का कार्य करते थे। 2 टेबल पर 5-5 किलो बारूद रखा था। श्रमिक बिना सुरक्षा उपकरण के सांचे में बारूद भरते थे। आग लगी तो कुछ पता ही नहीं चला। उन्होंने बताया कि अधिकतर श्रमिक फैक्टरी में ही रहते थे। वहीं पर खाना बनाते थे। पता नहीं चला कि फैक्टरी में आग कैसे लगी। फैक्टरी में फोन इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं थी। फोन रखवा दिया जाता था।

सिकंदर मिंटू के पिता।

सिकंदर मिंटू के पिता।