{"_id":"6a70e0ed0d3d1a25e50987c4","slug":"students-at-igu-showing-interest-in-vocational-courses-and-moving-away-from-hindi-rewari-news-c-198-1-rew1001-243018-2026-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: आईजीयू में हिंदी से दूरी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी दिखा रहे रुचि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: आईजीयू में हिंदी से दूरी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी दिखा रहे रुचि
Tue, 04 Aug 2026 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 04 Aug 2026 12:11 AM IST
विज्ञापन
मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) में प्रवेश के लिए अभी भी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं। विश्वविद्यालय द्वारा जारी श्रेणीवार रिक्त सीटों के आंकड़ों के अनुसार 21 से अधिक पीजी पाठ्यक्रमों में 550 सीटें रिक्त हैं। कुल 1014 सीटें हैं।
रिक्त सीटों के मामले में एमए हिंदी सबसे आगे है। इसमें 48 सीटें खाली हैं। इसके बाद एमए संस्कृत में 47, एमए अंग्रेजी और एमए इतिहास में 41-41, एमकॉम में 41 और एमए योग में 36 सीटें रिक्त हैं। वहीं एमसीए में 32, एमएससी भौतिक विज्ञान में 32 और एमए अर्थशास्त्र में 29 सीटों पर प्रवेश का अवसर है।
विज्ञान वर्ग के पाठ्यक्रमों में भी विद्यार्थियों के लिए मौके हैं। एमएससी रसायन विज्ञान में 19, एमएससी भूगोल में 19, एमएससी गणित में 22, एमएससी वनस्पति विज्ञान में 14 और एमएससी मनोविज्ञान में 11 सीटें खाली हैं। एमएससी पर्यावरण विज्ञान में 16 तथा एमएससी जैव प्रौद्योगिकी में चार सीटें रिक्त हैं।
विज्ञापन
वहीं कुछ पाठ्यक्रमों में सीटें काफी कम बची हैं। मास्टर ऑफ सोशल वर्क में केवल दो सीटें, एलएलबी (तीन वर्षीय) में दो और एमफार्म में तीन सीटें खाली हैं। होटल मैनेजमेंट एवं कैटरिंग टेक्नोलॉजी में 10 सीटों पर प्रवेश होना है।
आईजीयू के डॉ. ईश्वर ने बताया कि बीए के बाद अधिकतर विद्यार्थी नौकरी की तैयारी या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में जुट जाते हैं, जिसके कारण वे एमए की पढ़ाई की ओर कम ध्यान दे पाते हैं। विद्यार्थियों में यह धारणा बनी हुई है कि एमए केवल उन्हीं के लिए जरूरी है, जिन्हें शिक्षण क्षेत्र में जाना है। जो विद्यार्थी अध्यापन क्षेत्र में कॅरिअर नहीं बनाना चाहते, वे अक्सर एमए करने से दूरी बना लेते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में विद्यार्थी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि इनमें रोजगार के अवसर अधिक दिखाई देते हैं। इसका असर पारंपरिक पाठ्यक्रमों में दाखिलों पर पड़ रहा है। वहीं एलएलबी जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों की अच्छी रुचि बनी हुई है।
इंसेटएलएलबी की ओर बढ़ा विद्यार्थियों का रुझान:
आईजीयू के विधि विभाग के प्रोफेसर डॉ. हेमंत ने बताया कि एलएलबी पाठ्यक्रम के प्रति विद्यार्थियों में लगातार रुचि बढ़ रही है। वर्तमान में एलएलबी की कुल 120 सीटों में से केवल दो सीटें ही रिक्त हैं, जबकि प्रवेश के लिए वेटिंग भी चल रही है। पिछले वर्ष भी इस पाठ्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों में काफी उत्साह देखने को मिला था। उन्होंने बताया कि एलएलबी करने के बाद विद्यार्थियों के पास अधिवक्ता के रूप में करियर बनाने का अवसर होता है। रोजगार और करियर की स्पष्ट दिशा मिलने के कारण विद्यार्थी इस व्यावसायिक पाठ्यक्रम को अधिक पसंद कर रहे हैं।
विज्ञापन
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) में प्रवेश के लिए अभी भी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं। विश्वविद्यालय द्वारा जारी श्रेणीवार रिक्त सीटों के आंकड़ों के अनुसार 21 से अधिक पीजी पाठ्यक्रमों में 550 सीटें रिक्त हैं। कुल 1014 सीटें हैं।
रिक्त सीटों के मामले में एमए हिंदी सबसे आगे है। इसमें 48 सीटें खाली हैं। इसके बाद एमए संस्कृत में 47, एमए अंग्रेजी और एमए इतिहास में 41-41, एमकॉम में 41 और एमए योग में 36 सीटें रिक्त हैं। वहीं एमसीए में 32, एमएससी भौतिक विज्ञान में 32 और एमए अर्थशास्त्र में 29 सीटों पर प्रवेश का अवसर है।
विज्ञापन
विज्ञान वर्ग के पाठ्यक्रमों में भी विद्यार्थियों के लिए मौके हैं। एमएससी रसायन विज्ञान में 19, एमएससी भूगोल में 19, एमएससी गणित में 22, एमएससी वनस्पति विज्ञान में 14 और एमएससी मनोविज्ञान में 11 सीटें खाली हैं। एमएससी पर्यावरण विज्ञान में 16 तथा एमएससी जैव प्रौद्योगिकी में चार सीटें रिक्त हैं।
विज्ञापन
वहीं कुछ पाठ्यक्रमों में सीटें काफी कम बची हैं। मास्टर ऑफ सोशल वर्क में केवल दो सीटें, एलएलबी (तीन वर्षीय) में दो और एमफार्म में तीन सीटें खाली हैं। होटल मैनेजमेंट एवं कैटरिंग टेक्नोलॉजी में 10 सीटों पर प्रवेश होना है।
आईजीयू के डॉ. ईश्वर ने बताया कि बीए के बाद अधिकतर विद्यार्थी नौकरी की तैयारी या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में जुट जाते हैं, जिसके कारण वे एमए की पढ़ाई की ओर कम ध्यान दे पाते हैं। विद्यार्थियों में यह धारणा बनी हुई है कि एमए केवल उन्हीं के लिए जरूरी है, जिन्हें शिक्षण क्षेत्र में जाना है। जो विद्यार्थी अध्यापन क्षेत्र में कॅरिअर नहीं बनाना चाहते, वे अक्सर एमए करने से दूरी बना लेते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में विद्यार्थी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि इनमें रोजगार के अवसर अधिक दिखाई देते हैं। इसका असर पारंपरिक पाठ्यक्रमों में दाखिलों पर पड़ रहा है। वहीं एलएलबी जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों की अच्छी रुचि बनी हुई है।
इंसेटएलएलबी की ओर बढ़ा विद्यार्थियों का रुझान:
आईजीयू के विधि विभाग के प्रोफेसर डॉ. हेमंत ने बताया कि एलएलबी पाठ्यक्रम के प्रति विद्यार्थियों में लगातार रुचि बढ़ रही है। वर्तमान में एलएलबी की कुल 120 सीटों में से केवल दो सीटें ही रिक्त हैं, जबकि प्रवेश के लिए वेटिंग भी चल रही है। पिछले वर्ष भी इस पाठ्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों में काफी उत्साह देखने को मिला था। उन्होंने बताया कि एलएलबी करने के बाद विद्यार्थियों के पास अधिवक्ता के रूप में करियर बनाने का अवसर होता है। रोजगार और करियर की स्पष्ट दिशा मिलने के कारण विद्यार्थी इस व्यावसायिक पाठ्यक्रम को अधिक पसंद कर रहे हैं।