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Rewari News: युद्धविराम से कारोबारियों को राहत की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 17 Jun 2026 12:06 AM IST
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फैक्ट्री में नमकीन पैकिंग कार्य में जुटे कर्मचारी। संवाद
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रेवाड़ी। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने और युद्धविराम की स्थिति बनने के बाद जिले के कारोबारियों को राहत की उम्मीद जगी है। व्यापारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव घटने से कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में स्थिरता आ सकती है जिसका सकारात्मक प्रभाव उद्योगों और कारोबार पर भी पड़ेगा।
कहा कि विशेष रूप से खाद्य उत्पाद और पैकेजिंग से जुड़े व्यवसायों को इससे राहत मिलने की संभावना है। व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर स्थानीय बाजारों पर भी पड़ता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से परिवहन, पैकेजिंग और उत्पादन लागत प्रभावित होती है। ऐसे में युद्धविराम से सकारात्मक स्थिति का लाभ आने वाले दिनों में उद्योग और व्यापार क्षेत्र को मिल सकता है।
कारोबारियों को उम्मीद है कि बाजार में स्थिरता आने से बिक्री में सुधार होगा और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। कुछ समय में खाद्य तेल, एलपीजी गैस, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई थी। इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ा। कच्चे माल की बढ़ी कीमतों और परिवहन खर्च में इजाफे के कारण नमकीन तैयार करने की लागत बढ़ गई।
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खाद्य तेल, गैस और डीजल महंगा होने से बढ़ी लागत
तिजारा नमकीन के संचालक रमेश सचदेवा ने बताया कि खाद्य तेल, एलपीजी गैस, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उत्पादन लागत में काफी इजाफा हुआ। बढ़ती लागत के चलते उन्हें अपने उत्पादों के दाम करीब पांच रुपये प्रति किलो तक बढ़ाने पड़े। उन्होंने कहा कि महंगाई का असर ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर भी पड़ा है।
पहले जहां उपभोक्ता अधिक मात्रा में खरीदारी करते थे वहीं अब कई लोग सीमित सामान खरीद रहे हैं। इसका सीधा असर बिक्री पर देखने को मिला है। बढ़ती लागत और घटती मांग के कारण कारोबारियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि हालिया युद्धविराम के बाद बाजार में राहत की उम्मीद बनी है। उनका मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें स्थिर रहती हैं तो उत्पादन लागत पर दबाव कम होगा और कारोबार को राहत मिल सकेगी।
कहा कि विशेष रूप से खाद्य उत्पाद और पैकेजिंग से जुड़े व्यवसायों को इससे राहत मिलने की संभावना है। व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर स्थानीय बाजारों पर भी पड़ता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से परिवहन, पैकेजिंग और उत्पादन लागत प्रभावित होती है। ऐसे में युद्धविराम से सकारात्मक स्थिति का लाभ आने वाले दिनों में उद्योग और व्यापार क्षेत्र को मिल सकता है।
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कारोबारियों को उम्मीद है कि बाजार में स्थिरता आने से बिक्री में सुधार होगा और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। कुछ समय में खाद्य तेल, एलपीजी गैस, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई थी। इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ा। कच्चे माल की बढ़ी कीमतों और परिवहन खर्च में इजाफे के कारण नमकीन तैयार करने की लागत बढ़ गई।
खाद्य तेल, गैस और डीजल महंगा होने से बढ़ी लागत
तिजारा नमकीन के संचालक रमेश सचदेवा ने बताया कि खाद्य तेल, एलपीजी गैस, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उत्पादन लागत में काफी इजाफा हुआ। बढ़ती लागत के चलते उन्हें अपने उत्पादों के दाम करीब पांच रुपये प्रति किलो तक बढ़ाने पड़े। उन्होंने कहा कि महंगाई का असर ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर भी पड़ा है।
पहले जहां उपभोक्ता अधिक मात्रा में खरीदारी करते थे वहीं अब कई लोग सीमित सामान खरीद रहे हैं। इसका सीधा असर बिक्री पर देखने को मिला है। बढ़ती लागत और घटती मांग के कारण कारोबारियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि हालिया युद्धविराम के बाद बाजार में राहत की उम्मीद बनी है। उनका मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें स्थिर रहती हैं तो उत्पादन लागत पर दबाव कम होगा और कारोबार को राहत मिल सकेगी।