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Rohtak News: पीजी में प्रवेश से पहले ही खत्म हुई प्रतिस्पर्धा
Thu, 23 Jul 2026 07:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 23 Jul 2026 07:33 AM IST
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19-विपुल शर्मा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में 2026-27 की पीजी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कई विभागों की वास्तविक स्थिति सामने आई है। विश्वविद्यालय ने सभी पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की। कई ऐसे कोर्स रहे जिनमें कुल आवेदन ही सीटों के बराबर नहीं आए।
प्रवेश प्रक्रिया में भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे। इसका सीधा मतलब है कि मेरिट सूची और काउंसिलिंग के बाद भी इन विभागों को काफी सीटें खाली रह सकती हैं। विश्वविद्यालय के लिए यह केवल प्रवेश प्रक्रिया का नहीं बल्कि इन पाठ्यक्रमों की घटती मांग का भी संकेत है। दूसरी ओर एलएलबी, एमबीए, अंग्रेजी, कंप्यूटर साइंस और लाइफ साइंस जैसे लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में अच्छी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।
सीटें कम, परीक्षा में पहुंचे उससे भी कम अभ्यर्थी
कई विभागों में सीटों के मुकाबले उपस्थिति काफी कम रही। एमए फाइन आर्ट्स की 15 सीटों के लिए केवल 12 अभ्यर्थी परीक्षा में पहुंचे। संगीत विभाग की 30 सीटों के मुकाबले 16, संस्कृत में 75 सीटों के मुकाबले 33, एमएससी स्टैटिस्टिक्स में 50 सीटों पर 39, एमए हिंदू स्टडीज की 30 सीटों पर 47, एमए एजुकेशन की 30 सीटों पर 57, योग विज्ञान की 50 सीटों पर 57, एमएड की 50 सीटों पर 69, एमए डिफेंस एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज की 50 सीटों पर 79 और एमकॉम की 60 सीटों पर 85 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए।
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कई कोर्स में पहले ही खत्म हो गई प्रतिस्पर्धा
विश्वविद्यालय की आवेदन सूची से स्पष्ट है कि कई विभागों में आवेदन संख्या ही सीमित रही। ऐसे में प्रवेश परीक्षा के बाद अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों ने प्रतिस्पर्धा को और कमजोर कर दिया। जिन पाठ्यक्रमों में सीटों के बराबर या उससे कम आवेदन आए वहां प्रवेश परीक्षा केवल औपचारिकता जैसी नजर आई। वहीं एमबीए, एलएलबी, कंप्यूटर साइंस, अंग्रेजी और लाइफ साइंस जैसे पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे। इससे साफ है कि विद्यार्थियों का रुझान रोजगार आधारित और लोकप्रिय पाठ्यक्रमों की ओर अधिक है।
रोजगार से जुड़ाव बढ़ाने और सीटों की समीक्षा की जरूरत
कॅरिअर काउंसलर विपुल शर्मा ने कहा कि कुछ छात्र एक से ज्यादा विभागों में एडमिशन लेते हैं। यह सबसे बड़ा कारण है कि सीटें खाली रह जाती हैं। लगातार कम मांग वाले पाठ्यक्रमों में सीटों का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए। जिन विभागों में हर वर्ष पर्याप्त आवेदन नहीं आते वहां सीटों की संख्या वास्तविक मांग के अनुरूप तय की जा सकती है। पाठ्यक्रमों को उद्योग और रोजगार की जरूरतों के अनुसार अपडेट करने, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट को मजबूत करने और व्यापक प्रचार-प्रसार की भी आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों की रुचि बढ़ेगी और विश्वविद्यालय को बार-बार खाली सीटों तथा कमजोर प्रवेश प्रक्रिया जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में 2026-27 की पीजी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कई विभागों की वास्तविक स्थिति सामने आई है। विश्वविद्यालय ने सभी पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की। कई ऐसे कोर्स रहे जिनमें कुल आवेदन ही सीटों के बराबर नहीं आए।
प्रवेश प्रक्रिया में भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे। इसका सीधा मतलब है कि मेरिट सूची और काउंसिलिंग के बाद भी इन विभागों को काफी सीटें खाली रह सकती हैं। विश्वविद्यालय के लिए यह केवल प्रवेश प्रक्रिया का नहीं बल्कि इन पाठ्यक्रमों की घटती मांग का भी संकेत है। दूसरी ओर एलएलबी, एमबीए, अंग्रेजी, कंप्यूटर साइंस और लाइफ साइंस जैसे लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में अच्छी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।
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सीटें कम, परीक्षा में पहुंचे उससे भी कम अभ्यर्थी
कई विभागों में सीटों के मुकाबले उपस्थिति काफी कम रही। एमए फाइन आर्ट्स की 15 सीटों के लिए केवल 12 अभ्यर्थी परीक्षा में पहुंचे। संगीत विभाग की 30 सीटों के मुकाबले 16, संस्कृत में 75 सीटों के मुकाबले 33, एमएससी स्टैटिस्टिक्स में 50 सीटों पर 39, एमए हिंदू स्टडीज की 30 सीटों पर 47, एमए एजुकेशन की 30 सीटों पर 57, योग विज्ञान की 50 सीटों पर 57, एमएड की 50 सीटों पर 69, एमए डिफेंस एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज की 50 सीटों पर 79 और एमकॉम की 60 सीटों पर 85 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए।
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कई कोर्स में पहले ही खत्म हो गई प्रतिस्पर्धा
विश्वविद्यालय की आवेदन सूची से स्पष्ट है कि कई विभागों में आवेदन संख्या ही सीमित रही। ऐसे में प्रवेश परीक्षा के बाद अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों ने प्रतिस्पर्धा को और कमजोर कर दिया। जिन पाठ्यक्रमों में सीटों के बराबर या उससे कम आवेदन आए वहां प्रवेश परीक्षा केवल औपचारिकता जैसी नजर आई। वहीं एमबीए, एलएलबी, कंप्यूटर साइंस, अंग्रेजी और लाइफ साइंस जैसे पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे। इससे साफ है कि विद्यार्थियों का रुझान रोजगार आधारित और लोकप्रिय पाठ्यक्रमों की ओर अधिक है।
रोजगार से जुड़ाव बढ़ाने और सीटों की समीक्षा की जरूरत
कॅरिअर काउंसलर विपुल शर्मा ने कहा कि कुछ छात्र एक से ज्यादा विभागों में एडमिशन लेते हैं। यह सबसे बड़ा कारण है कि सीटें खाली रह जाती हैं। लगातार कम मांग वाले पाठ्यक्रमों में सीटों का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए। जिन विभागों में हर वर्ष पर्याप्त आवेदन नहीं आते वहां सीटों की संख्या वास्तविक मांग के अनुरूप तय की जा सकती है। पाठ्यक्रमों को उद्योग और रोजगार की जरूरतों के अनुसार अपडेट करने, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट को मजबूत करने और व्यापक प्रचार-प्रसार की भी आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों की रुचि बढ़ेगी और विश्वविद्यालय को बार-बार खाली सीटों तथा कमजोर प्रवेश प्रक्रिया जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।