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Rohtak News: सात दिन में दोगुनी हो गई इंडक्शन चूल्हों की मांग
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10-रोहतक स्थित गांधी कैंप की मार्केट में दुकान पर इंडक्शन चूल्हा खरीदतीं महिलाएं। संवाद
- फोटो : बंदी के कगार पर साइंस और ग्लासवेयर उद्योग, गैस का सिर्फ दो दिन का स्टॉक
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रतन चंदेल
रोहतक। गैस सिलिंडर संकट के बीच इंडक्शन चूल्हा लोगों के लिए विकल्प बन रहा है। सात दिन के अंदर ही इंडक्शन चूल्हों की मांग दोगुनी हो गई। पिछले सप्ताह तक जहां प्रत्येक दुकान से दो इंडक्शन चूल्हों की ही बिक्री होती थी, वहीं अब इनकी संख्या प्रतिदिन पांच तक पहुंच गई है।
घरों के लिए एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग अवधि 25 दिन बाद किए जाने और कॉमर्शियल सिलिंडरों पर रोक लगाने के चलते लोगों का रुख अब इंडक्शन चूल्हे की ओर होने लगा है। शहर में 125 से अधिक दुकानों पर इंडक्शन चूल्हे उपलब्ध हैं। यहां रोज 500 से अधिक इंडक्शन चूल्हों की बिक्री होने का अनुमान है।
गांधी कैंप के कारोबारी राजन अरोड़ा बताते हैं कि एलपीजी संकट होने से इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ गई है। सप्ताह पहले तक जहां एक-दो लोग ही इंडक्शन चूल्हे खरीदने के लिए आ रहे थे, वहीं अब तीन-चार लोग रोजाना दुकान पर पहुंच रहे हैं। संवाद
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लकड़ी के चूल्हे का जमाना नहीं
इंडक्शन चूल्हा खरीदने आई गृहिणी आशू ने बताया कि लकड़ी के चूल्हे का जमाना अब नहीं रहा है। एलपीजी का संकट बढ़ रहा है। ऐसे में समय पर खाना बनाने के लिए गृहिणियों को चिंता होने लगी है। इसका विकल्प अब इंडक्शन चूल्हा बनने लगा है। इससे बिजली खपत बढ़ेगी लेकिन खाना जल्दी पकाया जा सकता है। बाजार में डबल इंडक्शन चूल्हे भी उपलब्ध हैं।
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देश में ही निर्मित हो रहे इंडक्शन चूल्हे : संवेग
मॉडल टाउन निवासी कारोबारी संवेग
ने बताया कि ज्यादातर इंडक्शन चूल्हे देश में ही निर्मित हो रहे हैं। ऐसे में स्वदेशी की खरीद भी बढ़ेगी। एक इंडक्शन चूल्हे की कीमत 1000-4000 रुपये तक है। ये ऑटोमेटिक भी आ रहे हैं जिससे अनावश्यक बिजली खर्च नहीं होगी। प्रीत विहार कॉलोनी निवासी ग्राहक परमिंद्र ने बताया कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार विकल्प चुन लेना ही ठीक है।
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रोहतक। गैस सिलिंडर संकट के बीच इंडक्शन चूल्हा लोगों के लिए विकल्प बन रहा है। सात दिन के अंदर ही इंडक्शन चूल्हों की मांग दोगुनी हो गई। पिछले सप्ताह तक जहां प्रत्येक दुकान से दो इंडक्शन चूल्हों की ही बिक्री होती थी, वहीं अब इनकी संख्या प्रतिदिन पांच तक पहुंच गई है।
घरों के लिए एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग अवधि 25 दिन बाद किए जाने और कॉमर्शियल सिलिंडरों पर रोक लगाने के चलते लोगों का रुख अब इंडक्शन चूल्हे की ओर होने लगा है। शहर में 125 से अधिक दुकानों पर इंडक्शन चूल्हे उपलब्ध हैं। यहां रोज 500 से अधिक इंडक्शन चूल्हों की बिक्री होने का अनुमान है।
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गांधी कैंप के कारोबारी राजन अरोड़ा बताते हैं कि एलपीजी संकट होने से इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ गई है। सप्ताह पहले तक जहां एक-दो लोग ही इंडक्शन चूल्हे खरीदने के लिए आ रहे थे, वहीं अब तीन-चार लोग रोजाना दुकान पर पहुंच रहे हैं। संवाद
लकड़ी के चूल्हे का जमाना नहीं
इंडक्शन चूल्हा खरीदने आई गृहिणी आशू ने बताया कि लकड़ी के चूल्हे का जमाना अब नहीं रहा है। एलपीजी का संकट बढ़ रहा है। ऐसे में समय पर खाना बनाने के लिए गृहिणियों को चिंता होने लगी है। इसका विकल्प अब इंडक्शन चूल्हा बनने लगा है। इससे बिजली खपत बढ़ेगी लेकिन खाना जल्दी पकाया जा सकता है। बाजार में डबल इंडक्शन चूल्हे भी उपलब्ध हैं।
देश में ही निर्मित हो रहे इंडक्शन चूल्हे : संवेग
मॉडल टाउन निवासी कारोबारी संवेग
ने बताया कि ज्यादातर इंडक्शन चूल्हे देश में ही निर्मित हो रहे हैं। ऐसे में स्वदेशी की खरीद भी बढ़ेगी। एक इंडक्शन चूल्हे की कीमत 1000-4000 रुपये तक है। ये ऑटोमेटिक भी आ रहे हैं जिससे अनावश्यक बिजली खर्च नहीं होगी। प्रीत विहार कॉलोनी निवासी ग्राहक परमिंद्र ने बताया कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार विकल्प चुन लेना ही ठीक है।

कुरुक्षेत्र। किसानों को सम्मानित करते हुए भाकियू जिलाध्यक्ष संजीव आलमपुर व महासचिव दिलबाग सिंह - फोटो : बंदी के कगार पर साइंस और ग्लासवेयर उद्योग, गैस का सिर्फ दो दिन का स्टॉक