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शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान की ओर ले जाता है गुरु : डॉ. कृष्णकांत
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से वीरवार को फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित किया गया। सायंकालीन सत्र में कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने संबोधित किया। कार्यक्रम का आयोजन यूजीसी-एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. मुनीष गर्ग के मार्गदर्शन और उपनिदेशक डॉ. माधुरी हुड्डा की देखरेख में किया गया।
कुलसचिव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु केवल विषय पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं होता बल्कि वह ऐसा मार्गदर्शक होता है जो शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का समग्र विकास करना भी है।
इससे पहले सुबह सत्र में चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के व्यवसाय प्रशासन विभाग की प्रोफेसर प्रो. आरती गौड़ ने इंडेक्सिंग, साइटेशन डाटाबेस और शोध प्रभाव मैट्रिक्स विषय पर व्याख्यान दिया। इस सत्र का संचालन बीकानेर के राजकीय कन्या महाविद्यालय की सहायक प्रोफेसर सुनीता सियाग ने किया। सायंकालीन सत्र का संचालन चंचल ने किया और डॉ. निधि कक्कड़ और प्रीति दहिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से वीरवार को फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित किया गया। सायंकालीन सत्र में कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने संबोधित किया। कार्यक्रम का आयोजन यूजीसी-एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. मुनीष गर्ग के मार्गदर्शन और उपनिदेशक डॉ. माधुरी हुड्डा की देखरेख में किया गया।
कुलसचिव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु केवल विषय पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं होता बल्कि वह ऐसा मार्गदर्शक होता है जो शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का समग्र विकास करना भी है।
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इससे पहले सुबह सत्र में चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के व्यवसाय प्रशासन विभाग की प्रोफेसर प्रो. आरती गौड़ ने इंडेक्सिंग, साइटेशन डाटाबेस और शोध प्रभाव मैट्रिक्स विषय पर व्याख्यान दिया। इस सत्र का संचालन बीकानेर के राजकीय कन्या महाविद्यालय की सहायक प्रोफेसर सुनीता सियाग ने किया। सायंकालीन सत्र का संचालन चंचल ने किया और डॉ. निधि कक्कड़ और प्रीति दहिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।