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Rohtak News: शीतला माता मंदिर सरोवर पर कब्जा, सुंदरीकरण का काम अटका
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22-प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर के पास बने सरोवर में सफाई करते कर्मचारी व तालाब में डाला मलबा।
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रोहतक। शहर ही नहीं दूसरे जिलों व प्रदेश भर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर सरोवर पर अमृत सरोवर योजना के तहत सुंदरीकरण का काम अटका हुआ है। कभी दूर तक फैले इस सरोवर पर अब कब्जे हो गए हैं और तालाब भी सूखा हुआ है।
इसकी चहारदीवारी कई जगह से क्षतिग्रस्त है और कुछ लोग इसमें मलबा डालकर गाड़ियां भी पार्क करने लगे हैं। धार्मिक आस्था से जुड़ा हाेने के चलते इस प्राचीन तालाब का श्रद्धालुओं में बहुत महत्व है। अब चैत्र में शीतला माता मंदिर में मेला भी लगेगा लेकिन नगर निगम इस तालाब की न तो उचित देखरेख निगम कर रहा है और न ही इसमें श्रद्धालुओं की आस्था के मुताबिक व्यवस्थाएं अभी तक हुई हैं।
वीरवार को भी निगम कर्मी सफाई करने के लिए ही यहां पहुंचे। उधर, इस संबंध में नगर निगम आयुक्त डॉ. आनंद शर्मा का कहना है कि इस मामला का मामला पोंड अथॉरिटी के पास चंडीगढ़ भेजा है। वहां से मंजूरी के बाद सुंदरीकरण का कार्य होगा।
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हरियाणा के अलावा दिल्ली, राजस्थान से भी आते हैं श्रद्धालु
प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर करीब 400 साल पुराना है। इस मंदिर में रोहतक, सोनीपत, झज्जर, जींद सहित हरियाणा के अन्य जिलों के अलावा दिल्ली व राजस्थान आदि प्रदेशों से भी काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। अनेक परिवारों में यहां छोटे बच्चों के मुंडन संस्कार भी परंपरा भी है। चैत्र और आषाढ़ में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। शारदीय नवरात्र में भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर पूजा करते हैं।
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इस प्राचीन की चहारदीवारी वर्षों पहले की हुई है जो अब कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है और मलबा दूर तक पड़ा हुआ है। इसको ठीक कराया जाएगा। इसका सुंदरीकरण किया जाना है। इसके तहत इसमें ट्रैक बनाने के साथ ही साइडों में पौधे भी लगाए जाएंगे।
- रिंकू नागर, वार्ड-4 से नगर निगम पार्षद
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इस सरोवर के सुंदरीकरण के लिए हमने वर्ष 2016 में आंदोलन भी शुरू किया था जिसके बाद उस समय मुख्यमंत्री घोषणा में इसे शामिल किया गया। इस पर कुछ काम तो हुआ लेकिन अब अधर में लटका है। इससे कब्जे हटाकर सुंदरीकरण कराए जाने का इंतजार है।
- नौरातामल भटनागर, पूर्व पार्षद
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प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर के निकट बना यह तालाब श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। पूर्वज बताते थे कि कभी इस तालाब का पानी इतना साफ होता था कि उसी का प्रयोग दैनिक कार्यों में होता था लेकिन इस तालाब पर अभी कब्जा है। इसकी चहारदीवारी और सुंदरीकरण किया जाए।
- थानेश्वरदास महंत, प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर
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इसकी चहारदीवारी कई जगह से क्षतिग्रस्त है और कुछ लोग इसमें मलबा डालकर गाड़ियां भी पार्क करने लगे हैं। धार्मिक आस्था से जुड़ा हाेने के चलते इस प्राचीन तालाब का श्रद्धालुओं में बहुत महत्व है। अब चैत्र में शीतला माता मंदिर में मेला भी लगेगा लेकिन नगर निगम इस तालाब की न तो उचित देखरेख निगम कर रहा है और न ही इसमें श्रद्धालुओं की आस्था के मुताबिक व्यवस्थाएं अभी तक हुई हैं।
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वीरवार को भी निगम कर्मी सफाई करने के लिए ही यहां पहुंचे। उधर, इस संबंध में नगर निगम आयुक्त डॉ. आनंद शर्मा का कहना है कि इस मामला का मामला पोंड अथॉरिटी के पास चंडीगढ़ भेजा है। वहां से मंजूरी के बाद सुंदरीकरण का कार्य होगा।
हरियाणा के अलावा दिल्ली, राजस्थान से भी आते हैं श्रद्धालु
प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर करीब 400 साल पुराना है। इस मंदिर में रोहतक, सोनीपत, झज्जर, जींद सहित हरियाणा के अन्य जिलों के अलावा दिल्ली व राजस्थान आदि प्रदेशों से भी काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। अनेक परिवारों में यहां छोटे बच्चों के मुंडन संस्कार भी परंपरा भी है। चैत्र और आषाढ़ में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। शारदीय नवरात्र में भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर पूजा करते हैं।
इस प्राचीन की चहारदीवारी वर्षों पहले की हुई है जो अब कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है और मलबा दूर तक पड़ा हुआ है। इसको ठीक कराया जाएगा। इसका सुंदरीकरण किया जाना है। इसके तहत इसमें ट्रैक बनाने के साथ ही साइडों में पौधे भी लगाए जाएंगे।
- रिंकू नागर, वार्ड-4 से नगर निगम पार्षद
इस सरोवर के सुंदरीकरण के लिए हमने वर्ष 2016 में आंदोलन भी शुरू किया था जिसके बाद उस समय मुख्यमंत्री घोषणा में इसे शामिल किया गया। इस पर कुछ काम तो हुआ लेकिन अब अधर में लटका है। इससे कब्जे हटाकर सुंदरीकरण कराए जाने का इंतजार है।
- नौरातामल भटनागर, पूर्व पार्षद
प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर के निकट बना यह तालाब श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। पूर्वज बताते थे कि कभी इस तालाब का पानी इतना साफ होता था कि उसी का प्रयोग दैनिक कार्यों में होता था लेकिन इस तालाब पर अभी कब्जा है। इसकी चहारदीवारी और सुंदरीकरण किया जाए।
- थानेश्वरदास महंत, प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर