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Rohtak MDU: कार्यकारी परिषद की बैठक के दौरान नारेबाजी से गूंजा परिसर, पदोन्नति को लेकर शिक्षक-कर्मचारी दो फाड़

माई सिटी रिपोर्टर, रोहतक (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 18 Feb 2026 12:58 PM IST
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सार

समर्थक पक्ष का कहना है कि विश्वविद्यालय के करीब 100 शिक्षकों की पदोन्नति कई वर्षों से लंबित है। यदि यह बैठक नहीं हुई तो पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी तरह रुक सकती है, इसलिए बैठक का आयोजन जरूरी था।

Slogans raised against the Vice Chancellor at Rohtak MDU
विरोध करते शिक्षक - फोटो : संवाद
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विस्तार

रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय परिसर बुधवार को विरोध के नारों से गूंज उठा। शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की, जिसमें 'कर्मचारी एकता जिंदाबाद' जैसे नारे लगाए गए। कुलपति की अध्यक्षता वाली इस बैठक के दौरान परिसर में हंगामा मचा रहा, क्योंकि यूनिवर्सिटी के शिक्षक और गैर-शिक्षक संघ पदोन्नति के मुद्दे पर दो धड़ों में बंट गए थे।

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एक पक्ष ईसी बैठक के समर्थन में खड़ा था, जबकि दूसरा विरोध में उतर आया। समर्थक पक्ष का कहना है कि विश्वविद्यालय के करीब 100 शिक्षकों की पदोन्नति कई वर्षों से लंबित है। यदि यह बैठक नहीं हुई तो पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी तरह रुक सकती है, इसलिए बैठक का आयोजन जरूरी था। वहीं, विरोध करने वाले पक्ष ने बैठक के तरीके या अन्य मुद्दों पर असहमति जताई, जिससे नारेबाजी और आमने-सामने की स्थिति बन गई।
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इस हंगामे के बीच ईसी की बैठक शुरू हुई, जिसमें कुलपति ने अध्यक्षता की। प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठन भी शामिल हो गए और उन्होंने भी विरोध जताया। परिसर में तनाव का माहौल रहा, लेकिन बैठक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चली। पदोन्नति का मुद्दा एमडीयू में लंबे समय से विवादास्पद रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से अटकी हुई यह प्रक्रिया उनके करियर और वेतन वृद्धि को प्रभावित कर रही है। 

राज्यपाल ने रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णा कांत को बहाल किया, कुलपति के निलंबन आदेश पर लगाई रोक

कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच तनाव का नया मोड़ आया है। बुधवार को कुलपति ने रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णा कांत को निलंबित कर दिया था, लेकिन हरियाणा के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए रजिस्ट्रार को बहाल कर दिया है।

राज्यपाल के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि डॉ. कृष्णा कांत को उनकी मूल जिम्मेदारियां सौंपी जाएं और निलंबन आदेश को प्रभावी नहीं माना जाए।इसके साथ ही राज्यपाल ने कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक पर भी रोक लगा दी है।

कुलपति और राज्यपाल के निर्देशानुसार ईसी की बैठक को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। यह फैसला पदोन्नति और अन्य विवादास्पद मुद्दों पर चल रही ईसी बैठक के संदर्भ में आया है, जिसके दौरान परिसर में नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन हो रहा था।

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