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जिस समाज का साहित्य जीवित रहता है, उसकी संस्कृति समाप्त नहीं होती : सीएम
Thu, 23 Jul 2026 11:58 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 23 Jul 2026 11:58 PM IST
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108-डीएलसी सुपवा में महिला साहित्यकार को सम्मानित करते मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी। स्रोत : सुपव
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रोहतक। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद केवल एक कवि नहीं बल्कि हरियाणा की आत्मा व लोक संस्कृति के सशक्त प्रहरी थे। उनकी स्मृति में आयोजित समारोह में उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके लिए गौरव का विषय है। साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि जिस समाज का साहित्य जीवित रहता है, उसकी संस्कृति कभी समाप्त नहीं होती। सांस्कृतिक जड़ों को जितना मजबूत रखा जाएगा, समाज उतना ही सशक्त व सुरक्षित रहेगा। आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों से जुड़ना भी जरूरी है।
सुपवा में साहित्यकारों के सम्मान समारोह में सीएम ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों या आर्थिक प्रगति से नहीं होती बल्कि उसकी वास्तविक पहचान उसकी भाषा, साहित्य, संस्कृति व कलाकारों से होती है। सत्ता समय के साथ बदल सकती है लेकिन संस्कृति पीढ़ियों को जोड़ने का कार्य करती है।
मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी में दादा लख्मीचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी व पौधरोपण किया। इसके बाद उन्होंने फैकल्टी ऑफ डिजाइन बिल्डिंग में डिजाइन व विजुअल आर्ट्स डिपार्टमेंट के छात्रों की लगाई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कलाकृतियों के बारे में जानकारी ली व छात्रों की रचनात्मकता को सराहा।
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सूर्य कवि के प्रपौत्र चेतन कौशिक ने सुनाई रागनी
सूर्य कवि दादा लख्मीचंद के प्रपौत्र चेतन कौशिक व छात्र योगेश वत्स ने रागनी प्रस्तुत की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विभिन्न 40 श्रेणियों में कुल 81 साहित्यकारों को सम्मानित किया। साहित्यकारों को प्रमाणपत्र, स्मृति चिह्न एवं पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया। महेंद्रगढ़ के रोहित यादव को वर्ष 2021 व विनोद बब्बर को आजीवन साहित्य साधना पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं, साल 2021 के लिए वीएम बेचैन व साल 2022 के लिए डॉ. राजकला देशवाल को पंडित लख्मीचंद सम्मान प्रदान किया गया। कुलपति डॉ. अमित आर्य ने मुख्यमंत्री को यूनिवर्सिटी के छात्रों की ओर से तैयार किया गया उनका पोर्ट्रेट भेंट किया।
दादा लख्मीचंद के नाम से यूनिवर्सिटी होना गर्व की बात : डॉ. अरविंद शर्मा
सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने मंच से पंडित लख्मीचंद की रागिनी गाकर उन्हें याद किया। उन्होंने ''''''''''''''''सुन ले मेरा ठिकाना रे, इस भारत के म्ह हरियाणा रे'''''''''''''''' रागिनी की कुछ पंक्तियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि दादा लख्मीचंद की जयंती पर प्रदेश में राजपत्रित अवकाश घोषित करने पर विचार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी को उसकी आत्मा से मिलाया : प्रो. अग्निहोत्री
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि अकादमी दादा लख्मीचंद के नाम से प्रदेश का प्रतिष्ठित साहित्य सम्मान प्रदान करती है इसलिए इस वर्ष यह निर्णय लिया गया कि सम्मान समारोह का आयोजन उनके नाम से संचालित यूनिवर्सिटी में किया जाए।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, सीएम के ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा, सीताराम व्यास, मेयर रामअवतार वाल्मीकि, प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल, जिला अध्यक्ष रणबीर ढाका, सुभाष आहूजा, रविंद्र सक्सेना, उद्यमी राजेश जैन, जींद यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो रामपाल सैनी, पूर्व सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी, भिवानी यूनिवर्सिटी की कुलपति दीप्ति धर्माणी, गायक गगन हरियाणवी, रागिनी गायक प्रेम देहाती आदि मौजूद रहे।
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पांच भाषाओं के साहित्यकारों को किया गया सम्मानित
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की साहित्यकार अभिनंदन योजना के तहत साहित्यकारों व विद्वानों को सम्मानित किया गया। अलग-अलग साल के लिए विभिन्न श्रेणियों में हिंदी, हरियाणवी, संस्कृत, पंजाबी व उर्दू भाषा के साहित्यकार और विद्वान ने सम्मान प्राप्त किया। हिंदी व हरियाणवी भाषा में कुल 32 साहित्यकारों को साल 2021 व 2022 के लिए सम्मान दिया गया। साल 2021 में 13 श्रेणियों में 19 साहित्यकार और साल 2022 में 11 श्रेणियों में 13 साहित्यकारों को सीएम ने पुरस्कृत किया। संस्कृत भाषा में साल 2021 के लिए 11 विद्वानों को 11 श्रेणियों में सम्मानित किया गया। पंजाबी भाषा में साल 2017 से 2022 तक के 31 साहित्यकारों को अलग-अलग नौ श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें साल 2017 के लिए पांच, साल 2018 के लिए सात, साल 2019 के लिए पांच, साल 2020 के लिए छह, साल 2021 के लिए चार व साल 2022 के लिए चार साहित्यकारों को पुरस्कार दिया गया। वहीं, उर्दू भाषा में साल 2017 के लिए सात श्रेणियों में सात साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
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सुपवा में साहित्यकारों के सम्मान समारोह में सीएम ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों या आर्थिक प्रगति से नहीं होती बल्कि उसकी वास्तविक पहचान उसकी भाषा, साहित्य, संस्कृति व कलाकारों से होती है। सत्ता समय के साथ बदल सकती है लेकिन संस्कृति पीढ़ियों को जोड़ने का कार्य करती है।
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मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी में दादा लख्मीचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी व पौधरोपण किया। इसके बाद उन्होंने फैकल्टी ऑफ डिजाइन बिल्डिंग में डिजाइन व विजुअल आर्ट्स डिपार्टमेंट के छात्रों की लगाई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कलाकृतियों के बारे में जानकारी ली व छात्रों की रचनात्मकता को सराहा।
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सूर्य कवि के प्रपौत्र चेतन कौशिक ने सुनाई रागनी
सूर्य कवि दादा लख्मीचंद के प्रपौत्र चेतन कौशिक व छात्र योगेश वत्स ने रागनी प्रस्तुत की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विभिन्न 40 श्रेणियों में कुल 81 साहित्यकारों को सम्मानित किया। साहित्यकारों को प्रमाणपत्र, स्मृति चिह्न एवं पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया। महेंद्रगढ़ के रोहित यादव को वर्ष 2021 व विनोद बब्बर को आजीवन साहित्य साधना पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं, साल 2021 के लिए वीएम बेचैन व साल 2022 के लिए डॉ. राजकला देशवाल को पंडित लख्मीचंद सम्मान प्रदान किया गया। कुलपति डॉ. अमित आर्य ने मुख्यमंत्री को यूनिवर्सिटी के छात्रों की ओर से तैयार किया गया उनका पोर्ट्रेट भेंट किया।
दादा लख्मीचंद के नाम से यूनिवर्सिटी होना गर्व की बात : डॉ. अरविंद शर्मा
सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने मंच से पंडित लख्मीचंद की रागिनी गाकर उन्हें याद किया। उन्होंने ''''''''''''''''सुन ले मेरा ठिकाना रे, इस भारत के म्ह हरियाणा रे'''''''''''''''' रागिनी की कुछ पंक्तियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि दादा लख्मीचंद की जयंती पर प्रदेश में राजपत्रित अवकाश घोषित करने पर विचार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी को उसकी आत्मा से मिलाया : प्रो. अग्निहोत्री
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि अकादमी दादा लख्मीचंद के नाम से प्रदेश का प्रतिष्ठित साहित्य सम्मान प्रदान करती है इसलिए इस वर्ष यह निर्णय लिया गया कि सम्मान समारोह का आयोजन उनके नाम से संचालित यूनिवर्सिटी में किया जाए।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, सीएम के ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा, सीताराम व्यास, मेयर रामअवतार वाल्मीकि, प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल, जिला अध्यक्ष रणबीर ढाका, सुभाष आहूजा, रविंद्र सक्सेना, उद्यमी राजेश जैन, जींद यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो रामपाल सैनी, पूर्व सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी, भिवानी यूनिवर्सिटी की कुलपति दीप्ति धर्माणी, गायक गगन हरियाणवी, रागिनी गायक प्रेम देहाती आदि मौजूद रहे।
पांच भाषाओं के साहित्यकारों को किया गया सम्मानित
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की साहित्यकार अभिनंदन योजना के तहत साहित्यकारों व विद्वानों को सम्मानित किया गया। अलग-अलग साल के लिए विभिन्न श्रेणियों में हिंदी, हरियाणवी, संस्कृत, पंजाबी व उर्दू भाषा के साहित्यकार और विद्वान ने सम्मान प्राप्त किया। हिंदी व हरियाणवी भाषा में कुल 32 साहित्यकारों को साल 2021 व 2022 के लिए सम्मान दिया गया। साल 2021 में 13 श्रेणियों में 19 साहित्यकार और साल 2022 में 11 श्रेणियों में 13 साहित्यकारों को सीएम ने पुरस्कृत किया। संस्कृत भाषा में साल 2021 के लिए 11 विद्वानों को 11 श्रेणियों में सम्मानित किया गया। पंजाबी भाषा में साल 2017 से 2022 तक के 31 साहित्यकारों को अलग-अलग नौ श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें साल 2017 के लिए पांच, साल 2018 के लिए सात, साल 2019 के लिए पांच, साल 2020 के लिए छह, साल 2021 के लिए चार व साल 2022 के लिए चार साहित्यकारों को पुरस्कार दिया गया। वहीं, उर्दू भाषा में साल 2017 के लिए सात श्रेणियों में सात साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।