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Rohtak News: सम्मान पाकर मेधावी बोले-अब संपनों को भरेंगे उड़ान
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छात्राओं को पैर छूने से मना करते मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। जिले के टॉपरों की सफलता को जब सम्मान मिला तो चेहरे खुशी से चमक उठे। रोहतक की माटी के लाल अपनी ही सरजमीं पर मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होने पर चहक उठे।
वीरवार को महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के डॉ. राधाकृष्णन सभागार में अमर उजाला मेधावी सम्मान समारोह में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा के टॉपर्स को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सम्मानित किया। इस मौके पर रोहतक जिले के टॉपरों को भी सम्मानित किया गया।
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10वीं में आए थे सिर्फ 75% अंक, 12वीं में अंजलि बनी जिला टॉपर
खेड़ी सांपला निवासी अंजलि ने 12वीं कक्षा में 98% अंक हासिल किए हैं। दो वर्ष पहले 10वीं कक्षा में अंजलि सिर्फ 75% अंक हासिल किए थे। ऐसा इसलिए है क्योंकि उस समय उनका ध्यान खेल पर अधिक केंद्रित था। अंजलि राष्ट्रीय स्तर की धावक हैं। 2023 में पानीपत में नेशनल चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता था।
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अंजलि के पिता छत्र सिंह का कहना है कि पहले वह अंजलि को खेल के क्षेत्र में ही आगे बढ़ाना चाहते थे लेकिन बाद में उन्होंने बेटी को पढ़ाई के बूते आगे जाने के लिए कहा। उसने कोई ट्यूशन नहीं ली। सिर्फ घर पर रहकर खुद पढ़ाई की है। उन्होंने 12वीं में आर्ट्स वर्ग में पढ़ाई की है। उन्होंने 10वीं की परीक्षा गांव के ही मॉडल संस्कृति स्कूल से पास की थी जबकि 12वीं कक्षा बाबा हरिदास सीनियर सेकंडरी स्कूल से की है। अंजलि की उम्र 17 वर्ष है।
अंजलि अभी वायुसेना के वाई ग्रुप की परीक्षा के लिए तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कॉलेज में बीए में दाखिला लेने के लिए आवेदन भी किया है। उनके पिता एक निजी कंपनी में सुपरवाइजर हैं और माता सीमा गृहिणी हैं।
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यूपी की उदिता बनी रोहतक जिले की टॉपर, हरियाणा में दूसरे नंबर पर
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की बेटी उदिता रोहतक के रुड़की गांव में संचालित विश्वकारा कन्या गुरुकुल की छात्रा रही हैं। उन्होंने 99.6% अंकों के साथ जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। वह प्रदेश में भी दूसरे नंबर पर आई हैं। उदिता ने बताया कि इतिहास और राजनीतिक शास्त्र में उनका एक-एक नंबर कम आया है। इसी कारण उनके 0.4 प्रतिशत अंक काम आए हैं। वह शुरू से ही पढ़ाई में होशियार रही हैं। उन्होंने 10वीं की परीक्षा में 97.5 हासिल किए थे। उदिता अभी दिल्ली के मुखर्जी नगर में एनडीए परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। उनके घर में माता-पिता और दादा-दादी हैं। उनका परिवार बागपत में रहता है जबकि वह पांचवीं कक्षा से ही गुरुकुल में पढ़ रही थीं। वह रोहतक में भी सिर्फ गुरुकुल की वजह से आई है। उदिता का कहना है कि उनके घर में खुशी का माहौल है क्योंकि वह यूपी से होने के बावजूद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सम्मानित हुई हैं। उनके पिता नीरज कुमार खेतीबाड़ी कर परिवार का गुजारा चलाते हैं। माता नीलम गृहिणी हैं।
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ऑनलाइन माध्यम से ही पढ़ाई कर गीता बनी जिले की टॉपर, राज्य में तीसरा स्थान
जिले के सुंडाना गांव की रहने वाली गीता ने 10वीं की परीक्षा में 99.4% अंक प्राप्त कर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया। वह प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही हैं। गीता ने घर पर रहकर ऑनलाइन माध्यम से ही पढ़ाई की थी। वह रोजाना 8-10 घंटे पढ़ती थीं। गीता ने कुल 497 अंक हासिल किए थे। उन्होंने बताया कि सामाजिक शिक्षा, अंग्रेजी और विज्ञान में उनके एक-एक अंक कम आए हैं। सत्र की शुरुआत में गीता रोजाना 2 से 3 घंटे सोशल मीडिया चलाती थीं लेकिन बाद में उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बना ली और पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित किया। गीता के घर में माता-पिता, दो छोटे भाई और दादी हैं। गीता के पिता शिवकुमार सेना से सेवानिवृत्त हैं और अब खेतीबाड़ी कर रहे हैं। उनकी माता परवीन गृहिणी हैं। वह अब गांव बहु अकबरपुर से पढ़ रही हैं। गीता खेलों में भी रुचि रखती हैं। बैडमिंटन उनका मनपसंद खेल है। दोनों छोटे भाई पहलवानी कर रहे हैं। माता परवीन का कहना है कि उन्होंने कभी बेटी से घर का काम नहीं कराया। सम्मान समारोह का न्योता आने की वजह से घर में काफी उत्साह का माहौल है। कुछ रिश्तेदार तो गीता के मुख्यमंत्री नायब सैनी के साथ फोटो का इंतजार कर रहे हैं।
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99% अंकों के साथ इशांत ने हासिल किया तीसरा स्थान, सोशल मीडिया से बनाए रखी दूरी
इशांत ने 10वीं कक्षा में 99% अंकों के साथ जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है। वह सोशल मीडिया से दूरी बनाकर केवल पढ़ाई को ही ज्यादातर समय देते थे। इशांत ने कहा कि मुख्यमंत्री से सम्मानित होना उनके जीवन के यादगार पलों में से एक है। इशांत ने ट्यूशन नहीं लिया। उनकी पढ़ाई में उनकी चचेरी बहन ईशा ने बहुत मदद की। वही उनका स्कूल का काम करवाती थीं। वह एमडीयू से एमएससी कर रही हैं। उन्होंने कभी सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं किया और वह न ही वीडियो गेम खेलते हैं। वह आईआईटी में पढ़ना चाहते हैं। इशांत की खेल में कोई खास रुचि नहीं है, वह केवल मनोरंजन के लिए खेलते हैं। इशांत के पिता नरेंद्र सिंह उन्हीं के स्कूल में भूगोल के शिक्षक हैं और उनकी माता सरला गृहिणी हैं।
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रोज का काम रोज करती थीं ईशा, 99.2% अंकों के साथ जिले में आया था दूसरा स्थान
काहनौर गांव की रहने वाली ईशा 10वीं में 99.2% अंक हासिल कर दूसरे स्थान पर रही हैं। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने शिक्षकों को दिया। उनका कहना है कि वह अध्यापकों के कहे अनुसार परीक्षा की तैयारी करती रहीं। वह रोज का काम रोज करती थीं। मुख्यमंत्री से सम्मानित होकर उत्साहित महसूस कर रही हैं। ईशा ने कहा कि माता-पिता कम शिक्षित होने के कारण उन्हें पढ़ाई खुद ही करनी पड़ती थी। वह स्कूल के अतिरिक्त किसी और माध्यम से पढ़ाई नहीं करती थी। उन्होंने 10वीं की पढ़ाई एसवीएम सीनियर सेकंडरी स्कूल से की है। उनके घर में माता-पिता, दादा-दादी, एक बहन और दो छोटे भाई हैं। उनके पिता छत्र सिंह एक निजी कंपनी में चौकीदार और माता सुमन गृहिणी हैं। समारोह में ईशा के साथ आए उनके मामा सचिन ने बताया कि तनख्वाह कम होने के बावजूद ईशा के पिता ने उन्हें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी।
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रोहतक। जिले के टॉपरों की सफलता को जब सम्मान मिला तो चेहरे खुशी से चमक उठे। रोहतक की माटी के लाल अपनी ही सरजमीं पर मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होने पर चहक उठे।
वीरवार को महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के डॉ. राधाकृष्णन सभागार में अमर उजाला मेधावी सम्मान समारोह में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा के टॉपर्स को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सम्मानित किया। इस मौके पर रोहतक जिले के टॉपरों को भी सम्मानित किया गया।
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10वीं में आए थे सिर्फ 75% अंक, 12वीं में अंजलि बनी जिला टॉपर
खेड़ी सांपला निवासी अंजलि ने 12वीं कक्षा में 98% अंक हासिल किए हैं। दो वर्ष पहले 10वीं कक्षा में अंजलि सिर्फ 75% अंक हासिल किए थे। ऐसा इसलिए है क्योंकि उस समय उनका ध्यान खेल पर अधिक केंद्रित था। अंजलि राष्ट्रीय स्तर की धावक हैं। 2023 में पानीपत में नेशनल चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता था।
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अंजलि के पिता छत्र सिंह का कहना है कि पहले वह अंजलि को खेल के क्षेत्र में ही आगे बढ़ाना चाहते थे लेकिन बाद में उन्होंने बेटी को पढ़ाई के बूते आगे जाने के लिए कहा। उसने कोई ट्यूशन नहीं ली। सिर्फ घर पर रहकर खुद पढ़ाई की है। उन्होंने 12वीं में आर्ट्स वर्ग में पढ़ाई की है। उन्होंने 10वीं की परीक्षा गांव के ही मॉडल संस्कृति स्कूल से पास की थी जबकि 12वीं कक्षा बाबा हरिदास सीनियर सेकंडरी स्कूल से की है। अंजलि की उम्र 17 वर्ष है।
अंजलि अभी वायुसेना के वाई ग्रुप की परीक्षा के लिए तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कॉलेज में बीए में दाखिला लेने के लिए आवेदन भी किया है। उनके पिता एक निजी कंपनी में सुपरवाइजर हैं और माता सीमा गृहिणी हैं।
यूपी की उदिता बनी रोहतक जिले की टॉपर, हरियाणा में दूसरे नंबर पर
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की बेटी उदिता रोहतक के रुड़की गांव में संचालित विश्वकारा कन्या गुरुकुल की छात्रा रही हैं। उन्होंने 99.6% अंकों के साथ जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। वह प्रदेश में भी दूसरे नंबर पर आई हैं। उदिता ने बताया कि इतिहास और राजनीतिक शास्त्र में उनका एक-एक नंबर कम आया है। इसी कारण उनके 0.4 प्रतिशत अंक काम आए हैं। वह शुरू से ही पढ़ाई में होशियार रही हैं। उन्होंने 10वीं की परीक्षा में 97.5 हासिल किए थे। उदिता अभी दिल्ली के मुखर्जी नगर में एनडीए परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। उनके घर में माता-पिता और दादा-दादी हैं। उनका परिवार बागपत में रहता है जबकि वह पांचवीं कक्षा से ही गुरुकुल में पढ़ रही थीं। वह रोहतक में भी सिर्फ गुरुकुल की वजह से आई है। उदिता का कहना है कि उनके घर में खुशी का माहौल है क्योंकि वह यूपी से होने के बावजूद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सम्मानित हुई हैं। उनके पिता नीरज कुमार खेतीबाड़ी कर परिवार का गुजारा चलाते हैं। माता नीलम गृहिणी हैं।
ऑनलाइन माध्यम से ही पढ़ाई कर गीता बनी जिले की टॉपर, राज्य में तीसरा स्थान
जिले के सुंडाना गांव की रहने वाली गीता ने 10वीं की परीक्षा में 99.4% अंक प्राप्त कर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया। वह प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही हैं। गीता ने घर पर रहकर ऑनलाइन माध्यम से ही पढ़ाई की थी। वह रोजाना 8-10 घंटे पढ़ती थीं। गीता ने कुल 497 अंक हासिल किए थे। उन्होंने बताया कि सामाजिक शिक्षा, अंग्रेजी और विज्ञान में उनके एक-एक अंक कम आए हैं। सत्र की शुरुआत में गीता रोजाना 2 से 3 घंटे सोशल मीडिया चलाती थीं लेकिन बाद में उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बना ली और पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित किया। गीता के घर में माता-पिता, दो छोटे भाई और दादी हैं। गीता के पिता शिवकुमार सेना से सेवानिवृत्त हैं और अब खेतीबाड़ी कर रहे हैं। उनकी माता परवीन गृहिणी हैं। वह अब गांव बहु अकबरपुर से पढ़ रही हैं। गीता खेलों में भी रुचि रखती हैं। बैडमिंटन उनका मनपसंद खेल है। दोनों छोटे भाई पहलवानी कर रहे हैं। माता परवीन का कहना है कि उन्होंने कभी बेटी से घर का काम नहीं कराया। सम्मान समारोह का न्योता आने की वजह से घर में काफी उत्साह का माहौल है। कुछ रिश्तेदार तो गीता के मुख्यमंत्री नायब सैनी के साथ फोटो का इंतजार कर रहे हैं।
99% अंकों के साथ इशांत ने हासिल किया तीसरा स्थान, सोशल मीडिया से बनाए रखी दूरी
इशांत ने 10वीं कक्षा में 99% अंकों के साथ जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है। वह सोशल मीडिया से दूरी बनाकर केवल पढ़ाई को ही ज्यादातर समय देते थे। इशांत ने कहा कि मुख्यमंत्री से सम्मानित होना उनके जीवन के यादगार पलों में से एक है। इशांत ने ट्यूशन नहीं लिया। उनकी पढ़ाई में उनकी चचेरी बहन ईशा ने बहुत मदद की। वही उनका स्कूल का काम करवाती थीं। वह एमडीयू से एमएससी कर रही हैं। उन्होंने कभी सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं किया और वह न ही वीडियो गेम खेलते हैं। वह आईआईटी में पढ़ना चाहते हैं। इशांत की खेल में कोई खास रुचि नहीं है, वह केवल मनोरंजन के लिए खेलते हैं। इशांत के पिता नरेंद्र सिंह उन्हीं के स्कूल में भूगोल के शिक्षक हैं और उनकी माता सरला गृहिणी हैं।
रोज का काम रोज करती थीं ईशा, 99.2% अंकों के साथ जिले में आया था दूसरा स्थान
काहनौर गांव की रहने वाली ईशा 10वीं में 99.2% अंक हासिल कर दूसरे स्थान पर रही हैं। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने शिक्षकों को दिया। उनका कहना है कि वह अध्यापकों के कहे अनुसार परीक्षा की तैयारी करती रहीं। वह रोज का काम रोज करती थीं। मुख्यमंत्री से सम्मानित होकर उत्साहित महसूस कर रही हैं। ईशा ने कहा कि माता-पिता कम शिक्षित होने के कारण उन्हें पढ़ाई खुद ही करनी पड़ती थी। वह स्कूल के अतिरिक्त किसी और माध्यम से पढ़ाई नहीं करती थी। उन्होंने 10वीं की पढ़ाई एसवीएम सीनियर सेकंडरी स्कूल से की है। उनके घर में माता-पिता, दादा-दादी, एक बहन और दो छोटे भाई हैं। उनके पिता छत्र सिंह एक निजी कंपनी में चौकीदार और माता सुमन गृहिणी हैं। समारोह में ईशा के साथ आए उनके मामा सचिन ने बताया कि तनख्वाह कम होने के बावजूद ईशा के पिता ने उन्हें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी।