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Sirsa News: 60 बार रक्तदान कर बिमला देवी बनीं प्रेरणास्रोत
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 13 Jun 2026 10:52 PM IST
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बिमला देवी।
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सिरसा। महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। शहर की बंसल कॉलोनी निवासी 65 वर्षीय बिमला देवी ने मानव सेवा के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। बिमला देवी अब तक 60 बार रक्तदान कर चुकी हैं वे लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।
बिमला देवी ने बताया कि बचपन में घरेलू जिम्मेदारियों के कारण उन्हें शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिल पाया। 12 वर्ष की आयु में उनके पिता का निधन हो गया था। बाद में उनकी शादी गांव उमेदपुरा निवासी भागीरथ से हुई, जो पटवारी के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि एक बार अस्पताल में उपचाराधीन एक परिचित को रक्त की तत्काल आवश्यकता थी।
उस समय उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के रक्तदान किया। रक्तदान के बाद परिजनों ने जो आशीर्वाद और दुआएं दीं, उससे वे भावुक हो गईं और तभी से नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प ले लिया। उन्होंने बताया कि रक्तदान से किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है, इसलिए प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए।
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बिमला देवी का कहना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है, इससे समाज में मानवता की भावना मजबूत होती है। सिरसा के शिव शक्ति ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ. आरएम अरोड़ा ने बताया कि बिमला देवी रक्तदान के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं। उनका ब्लड ग्रुप बी-नेगेटिव है, जो अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है। आपातकालीन परिस्थितियों में उन्होंने हर बार रक्तदान कर मरीजों की मदद की है।
43 बार रक्तदान कर चुके राजेंद्र भाटिया, थैलेसीमिया बच्चों के लिए बने सहारा
रक्तदान को महादान कहा जाता है, सिरसा निवासी राजेंद्र भाटिया इस सोच को सार्थक कर रहे हैं। राजेंद्र भाटिया अब तक 43 बार रक्तदान कर चुके हैं और लगातार जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं। राजेंद्र भाटिया ने बताया कि वे थैलेसीमिया सोसायटी से जुड़े हुए हैं। यह संस्था थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए रक्त की व्यवस्था करने का कार्य करती है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों को नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है, ऐसे में रक्तदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने बताया कि रक्तदान से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। किसी जरूरतमंद को जीवनदान देने और उसके चेहरे पर मुस्कान देखने से जो संतोष और खुशी मिलती है, उसकी तुलना किसी अन्य कार्य से नहीं की जा सकती।
बिमला देवी ने बताया कि बचपन में घरेलू जिम्मेदारियों के कारण उन्हें शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिल पाया। 12 वर्ष की आयु में उनके पिता का निधन हो गया था। बाद में उनकी शादी गांव उमेदपुरा निवासी भागीरथ से हुई, जो पटवारी के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि एक बार अस्पताल में उपचाराधीन एक परिचित को रक्त की तत्काल आवश्यकता थी।
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उस समय उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के रक्तदान किया। रक्तदान के बाद परिजनों ने जो आशीर्वाद और दुआएं दीं, उससे वे भावुक हो गईं और तभी से नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प ले लिया। उन्होंने बताया कि रक्तदान से किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है, इसलिए प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए।
बिमला देवी का कहना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है, इससे समाज में मानवता की भावना मजबूत होती है। सिरसा के शिव शक्ति ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ. आरएम अरोड़ा ने बताया कि बिमला देवी रक्तदान के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं। उनका ब्लड ग्रुप बी-नेगेटिव है, जो अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है। आपातकालीन परिस्थितियों में उन्होंने हर बार रक्तदान कर मरीजों की मदद की है।
43 बार रक्तदान कर चुके राजेंद्र भाटिया, थैलेसीमिया बच्चों के लिए बने सहारा
रक्तदान को महादान कहा जाता है, सिरसा निवासी राजेंद्र भाटिया इस सोच को सार्थक कर रहे हैं। राजेंद्र भाटिया अब तक 43 बार रक्तदान कर चुके हैं और लगातार जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं। राजेंद्र भाटिया ने बताया कि वे थैलेसीमिया सोसायटी से जुड़े हुए हैं। यह संस्था थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए रक्त की व्यवस्था करने का कार्य करती है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों को नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है, ऐसे में रक्तदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने बताया कि रक्तदान से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। किसी जरूरतमंद को जीवनदान देने और उसके चेहरे पर मुस्कान देखने से जो संतोष और खुशी मिलती है, उसकी तुलना किसी अन्य कार्य से नहीं की जा सकती।