सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   Probe into development works begins; stay imposed on all tenders.

Sirsa News: विकास कार्यों की जांच शुरू, सभी टेंडर पर लगी रोक

संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sun, 21 Jun 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
Probe into development works begins; stay imposed on all tenders.
सिरसा के बाजार में नगर परिषद की ओर से बनाई गई सड़क। 
विज्ञापन
सिरसा। जिला कष्ट निवारण समिति के लिए सिरसा आए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पार्षदों के टेंडरों में अनियमितताओं के आरोपों के बाद जिला उपायुक्त शांतनु शर्मा को सभी टेंडरों की जांच करने के आदेश दिए थे। अब इस मामले में जांच शुरू हो गई। जिला उपायुक्त ने नगर परिषद की ओर से लगाए गए सभी 40 टेंडरों पर रोक लगा दी है। इसके साथ-साथ दो से तीन दिनों में खोले गए सभी टेंडरों पर रोक लगाई गई है। इस मामले में सोमवार से त्वरित गति से जांच की जाएगी।


बता दें कि वीरवार रात को मुख्यमंत्री से मुलाकात करके भाजपा पार्षदों ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि कुछ विकास कार्यों के टेंडर नियमों के विपरीत तरीके से अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आवंटित किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पार्षदों का कहना था कि जिन टेंडरों में प्रतिस्पर्धात्मक दरों के आधार पर काम होना चाहिए था, उनमें कथित रूप से माइनस दरों वाले टेंडरों को नजरअंदाज कर प्लस दरों वाले टेंडर मंजूर किए जा रहे हैं। जो सरकारी धन का दुरुपयोग है।
विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार, इस मामले में टेंडर प्रक्रिया से टेंडर खोलने वाले से लेकर संबंधित एक्सईएन तक की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने वाली प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया गया।
इसी कारण जांच का दायरा केवल टेंडर आवंटन तक सीमित न रहकर पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की समीक्षा तक बढ़ाया गया है। इतना ही नहीं, कुछ टेंडरों को प्लस में देने की प्रक्रिया में जिला नगर आयुक्त कार्यालय की भूमिका भी संदेह के घेरे में रही है। एक सीसी के टेंडर तीन प्रतिशत प्लस में दे दिया गया है।
इसके अलावा एक टेंडर 23 प्रतिशत तक प्लस में दिया गया है। जब प्रतिस्पर्धा के दौर में 10 से 20 प्रतिशत तक माइनस में लेने के लिए ठेकेदार तैयार है। ऐसे में प्लस में टेंडर देकर ठेकेदारों और उसके साथ मिले राजनीतिक लोगों को फायदा पहुंचाने का काम किया गया है। इसीलिए पार्षदों ने इस मामले में जांच करवाने की मांग की।

पूर्व विधायक गोपाल कांडा भी जांच की उठा चुके हैं मांग
इस मुद्दे पर भाजपा पार्षदों से पहले पूर्व विधायक गोपाल कांडा भी नगर परिषद की टेंडर प्रक्रिया को लेकर आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने भी विकास कार्यों में अनियमितताओं और वित्तीय नुकसान की आशंका जताते हुए जांच की मांग की थी। उन्होंने भी पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री से जांच करवाने की मांग की थी। इतना ही नहीं, मौजूदा विधायक गोकुल सेतिया भी टेंडरों में भ्रष्टाचार की बात कह जांच करवाने की मांग कर चुके हैं।

छह माह के सभी संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा होगी
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान छह माह के सभी संबंधित दस्तावेजों, निविदा शर्तों, स्वीकृति प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसलिए फिलहाल नगर परिषद के विकास कार्यों से जुड़े सभी टेंडर रोक दिए गए हैं और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed